विराट कोहली का पुनरुत्थान: कप्तानी का बोझ छोड़ गुरुओं के मार्गदर्शन से पाई शांति
मैं ऐसी स्थिति में पहुंच गया जहां मैं हमारी बल्लेबाजी इकाई और कप्तानी का केंद्र बिंदु बन गया। मुझे इस बात का एहसास नहीं था कि ये दोनों चीजें मेरे दैनिक जीवन में कितना भार डालेंगी, क्योंकि मैं भारतीय क्रिकेट को शीर्ष पर बनाए रखने के लिए इतना दृढ़ संकल्पित और प्रेरित था। जब मैंने कप्तानी छोड़ी, तब तक मैं पूरी तरह थक चुका था। यह जिम्मेदारी मुझे भीतर तक खा गई थी। यह बेहद कठिन और थकाने वाला अनुभव था।
