गुरुग्राम: लंबित सरकारी अस्पताल, जनता की पुकार और राजधर्म
विकास की छवि और स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत
गुरुग्राम जैसे आधुनिक महानगर में आज भी एक पूर्ण विकसित सरकारी अस्पताल का न होना जनता के मूल अधिकारों की अनदेखी है। शहर में निजी अस्पतालों की भरमार है, लेकिन गरीब तबके के लिए सरकारी स्वास्थ्य सुविधा न के बराबर है। स्वास्थ्य मंत्री से लेकर केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों तक ने कई दौरे किए और बड़े दावे किए, लेकिन धरातल पर स्थिति नहीं बदली। प्रस्तावित अस्पताल के लिए सरकारी स्कूल की कई एकड़ जमीन भी ले ली गई, फिर भी निर्माण कार्य एक कदम भी आगे नहीं बढ़ा। यह प्रशासनिक उदासीनता और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी का प्रतीक है।
स्वास्थ्य अधिकार और राजधर्म की उपेक्षा
हमारी सभ्यता हमें सिखाती है कि शासन का प्रथम कर्तव्य प्रजा की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करना है। आपातकालीन स्थिति में गरीब मरीजों को या तो महंगा इलाज कराना पड़ता है या दिल्ली और रोहतक जैसे शहरों का रुख करना पड़ता है। यह देरी कई बार मरीज की जान पर भारी पड़ती है। रविवार को इसी व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठी। कांग्रेस जिला अध्यक्ष (शहरी) पंकज डावर के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने कमान सराय स्थित कार्यालय परिसर से नागरिक अस्पताल स्थल तक पैदल मार्च निकाला। पंकज डावर ने स्पष्ट कहा कि लाखों लोग निजी अस्पतालों की महंगी फीस चुकाने में असमर्थ हैं और सैकड़ों मरीज इलाज के अभाव में दर दर भटक रहे हैं।
जब सरकार स्मार्ट सिटी की बात करती है, तो बुनियादी स्वास्थ्य सुविधा का अभाव विकास की परिभाषा पर गंभीर सवाल खड़े करता है। स्वास्थ्य केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि न्याय और जनकल्याण का अभिन्न अंग है।
नागरिक अधिकारों की आवाज और आगे का रास्ता
बढ़ती आबादी, यातायात और औद्योगिक विस्तार को देखते हुए एक मजबूत सरकारी अस्पताल की जरूरत पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। पैदल मार्च में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता, महिलाएं और स्थानीय नागरिक शामिल हुए। उन्होंने सरकार से मांग की कि अस्पताल निर्माण के लिए तत्काल बजट जारी किया जाए, टेंडर प्रक्रिया में तेजी लाई जाए और निर्माण कार्य की समयसीमा तय की जाए। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि अगर शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह मुद्दा सड़कों से लेकर सदन तक उठाया जाएगा। जनता अब जानना चाहती है कि फाइलें कहां अटकी हैं और काम कब शुरू होगा। जनता की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को नजरअंदाज करना अब बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।