अभिजीत दीपके के माता-पिता का बयान: बेटे की चिंता है, पर आंदोलन से पीछे हटने को नहीं कहेंगे
NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ जंतर-मंतर पर 23 दिनों से चल रहे छात्र आंदोलन ने सोमवार को एक नया मोड़ ले लिया, जब संसद मार्च के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। इस घटना के बाद, सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) के संस्थापक अभिजीत दीपके के माता-पिता ने पहली बार खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि बेटे की सुरक्षा को लेकर चिंता जरूर है, लेकिन वे उसे आंदोलन से पीछे हटने के लिए नहीं कहेंगे।
माता-पिता का बयान: बेटे की चिंता, पर आंदोलन वापस लेने को नहीं कहेंगे
छत्रपति संभाजीनगर जिले से फोन पर बातचीत में, अभिजीत दीपके के पिता भगवान दीपके ने केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि पुलिस कार्रवाई के बाद उन्हें अपने बेटे की चिंता जरूर है, लेकिन वे उसे आंदोलन वापस लेने के लिए नहीं कहेंगे। उनका कहना था कि यह आंदोलन अभिजीत ने खुद शुरू किया है और इस चरण में उसे पीछे हटने की सलाह नहीं दी जा सकती।
मां ने पूछा: छात्रों के साथ आतंकवादियों जैसा व्यवहार क्यों?
अभिजीत दीपके की मां अनीता ने भी पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 18 से 20 साल के छात्रों के साथ आतंकवादियों जैसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है। उनका कहना था कि ये छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं और पिछले एक महीने से शांतिपूर्ण तरीके से विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे। उनकी मांगों को सुनने के बजाय उन पर लाठीचार्ज किया गया। सरकार को उनकी बातें सुनकर कोई निर्णय लेना चाहिए था। अनीता ने कहा कि उन्होंने मोबाइल फोन पर कार्रवाई के वीडियो देखे, जिन्हें देखकर उनकी आंखों में आंसू आ गए। उनके अनुसार छात्रों के साथ जो हुआ, वह बेहद दुखद था।
संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई
सोमवार सुबह संसद की ओर बढ़ रही भीड़ को रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। यह भीड़ जंतर-मंतर पर 23 दिनों से चल रही भूख हड़ताल के बाद संसद तक मार्च करने की कोशिश कर रही थी। प्रदर्शनकारी पेपर लीक और परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
पिता का आरोप: सरकार अहंकारी हो गई है
भगवान दीपके ने कहा कि प्रदर्शन पर पुलिस की सख्त कार्रवाई सरकार के अहंकार को दिखाती है। उन्होंने कहा कि छात्रों के इस आंदोलन के दौरान पहले कभी लाठीचार्ज नहीं हुआ। उनके मुताबिक सभी प्रदर्शनकारी पढ़े-लिखे छात्र हैं, जिन्होंने हिंसा या दंगे का रास्ता नहीं अपनाया। उनका दावा है कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को लगने लगा है कि उसे कोई हरा नहीं सकता। उनका कहना था कि जब कोई सरकार लंबे समय तक सत्ता में रहती है तो ऐसी मानसिकता बन जाती है।
हिंसा भड़काने का भी लगाया आरोप
महाराष्ट्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MIDC) के सेवानिवृत्त इंजीनियर भगवान दीपके ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पुलिस लाठीचार्ज करेगी। उन्होंने अधिकारियों पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाते हुए कहा कि छात्र पढ़े-लिखे और जिम्मेदार हैं तथा कानून-व्यवस्था बिगाड़ने जैसा कोई काम नहीं करते। उनके मुताबिक वहां जो कुछ हुआ, वह सरकार प्रायोजित दंगे जैसा प्रतीत होता है।
अशोक वाणी का दृष्टिकोण
यह घटना हमें याद दिलाती है कि भारत की लोकतांत्रिक परंपरा में अहिंसा और संवाद का महत्व है। सम्राट अशोक के धम्म में शांति और न्याय का संदेश था। आज भी, जब छात्र अपने भविष्य के लिए शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाते हैं, तो सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए, न कि लाठीचार्ज का सहारा लेना चाहिए। यह देश की एकता और न्याय के मूल्यों के खिलाफ है।