कनाडा में कुरुक्षेत्र के युवक की अकाल मृत्यु, अधूरी रही बारात
कुरुक्षेत्र, जो इतिहास में धर्म और न्याय की भूमि रही है, आज एक युवा के अकाल निधन से शोकाकुल है। बेहतर भविष्य की आश लेकर कनाडा गए 21 वर्षीय मंदीप सिंह की मौत वहां एक दर्दनाक हादसे में हो गई। जीवन और मृत्यु के बीच तीन दिन तक जूझने के बाद उन्होंने इस दुनिया को छोड़ दिया, जिससे परिवार और आसपास के लोगों में गहरा शोक व्याप्त है। यह घटना हमें जीवन की नश्वरता और परिवार के स्नेह की अमूल्यता की याद दिलाती है।
हैमिल्टन में हुआ दर्दनाक हादसा
परिवार के अनुसार, 20 मई को कनाडा के हैमिल्टन शहर में दोपहर करीब साढ़े तीन बजे यह दुर्घटना घटी। मंदीप उस समय स्विमिंग पूल में नहा रहे थे। अचानक पैर फिसलने से उनका संतुलन बिगड़ गया और वह गहरे पानी में चले गए, जबकि उन्हें तैरना नहीं आता था। तुरंत अस्पताल पहुंचाए जाने के बावजूद, पानी ने उनके शरीर और मस्तिष्क पर अपना भारी असर डाल दिया था।
तीन दिन तक चला जीवन संघर्ष
मंदीप के पिता प्रदीप कुमार ने फोन पर बताया कि हादसे के बाद छह से सात डॉक्टरों की टीम ने लगातार तीन दिन तक उनके बेटे को बचाने का प्रयास किया। हालांकि, मस्तिष्क में पानी पहुंचने से उनकी हालत लगातार गंभीर होती गई। अंततः 23 मई की रात करीब 10 बजे डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बेटे की इस खबर ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया।
अधूरे रह गए सपने और दिसंबर की बारात
मंदीप सिंह ने पिछले साल 3 दिसंबर को अपना 21वां जन्मदिन मनाया था। पढ़ाई पूरी करने के बाद वे करियर की उम्मीद लेकर कनाडा गए थे और वहां बच्चों की हेल्थ केयर से जुड़े क्षेत्र में काम कर रहे थे। उनकी सगाई हलालपुर गांव की एक युवती के साथ हो चुकी थी और इसी वर्ष दिसंबर में उनकी शादी तय हुई थी। परिवार को उम्मीद थी कि वे अपना भविष्य संवारकर लौटेंगे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
वापसी और अंतिम संस्कार
मंदीप के चाचा राम कुमार, जो श्री सनातन धर्म महावीर दल लाड़वा के उप प्रधान हैं, ने बताया कि आज सुबह करीब साढ़े सात बजे युवक का पार्थिव शरीर घर पहुंचा। उनके बड़े भाई के मित्र अमन, जो कुरुक्षेत्र के सेक्टर-5 के निवासी हैं, ने ब्रैम्पटन से लगभग 14 लाख रुपये की लागत से शरीर को भारत भिजवाया। मंदीप के पीछे उनके किसान पिता, माता और निजी क्षेत्र में काम करने वाले बड़े भाई नरेश सहित पूरा परिवार शोक संतप्त है। पार्थिव शरीर के आगमन के बाद आज ही अंतिम संस्कार कर दिया गया।
यह घटना हमें यह एहसास कराती है कि भौतिक सुखों की तलाश में जब युवा अपनी माटी से दूर जाते हैं, तो कभी कभी ऐसी अकल्पनीय पीड़ा भी झेलनी पड़ती है। समाज को ऐसे दुखित परिवारों के साथ खड़े रहकर एकता और सहानुभूति का अपना कर्तव्य निभाना चाहिए।