पूर्णिया: फर्जी पहचान से नाबालिग का शोषण, ग्रामीणों ने दिया सबक
विश्वास का धोखा और सामाजिक न्याय की विजय
बिहार के पूर्णिया जिले के जानकीनगर से एक ऐसी घटना सामने आई है, जो सामाजिक विश्वास और नैतिकता के पतन को दर्शाती है। एक युवक ने अपनी असली पहचान छुपाकर एक परिवार का विश्वास हासिल किया और नाबालिग बेटी का शोषण किया। हालांकि, सच्चाई सामने आते ही ग्रामीणों ने न्याय की राह पर चलते हुए आरोपी को पकड़कर कानून के हाथों सौंप दिया।
व्यापार के आड़ में बनाई नजदीकी
पीड़िता की मां द्वारा दिए गए आवेदन के अनुसार, लगभग एक साल पहले आरोपी मनिहारी, चूड़ी और लहठी बेचने के बहाने गांव आया था। उसने खुद को हिंदू बताते हुए अपना नाम 'सूरज यादव' बताया। इस झूठी पहचान के सहारे उसने परिवार का विश्वास जीता और धीरे-धीरे घर में अपनी जगह बना ली।
शादी का लालच देकर किया यौन शोषण
घर आने-जाने के दौरान आरोपी की पहचान परिवार की नाबालिग बेटी से हुई। वह लगातार मोबाइल फोन के जरिए भी लड़की के संपर्क में रहने लगा। आरोप है कि उसने किशोरी से शादी का वादा किया और बातचीत के लिए एक अलग सिम कार्ड भी दिया। शादी का झांसा देकर उसने लगातार किशोरी का यौन शोषण किया। जब परिजनों ने शादी का दबाव बनाया, तो वह टालमटोल करने लगा।
ग्रामीणों की सक्रियता से खुला सच
9 जून की रात करीब 11 बजे आरोपी पीड़िता के घर आया। शक होने पर परिजनों और ग्रामीणों ने उसे घेर लिया और पूछताछ शुरू की। शुरुआत में वह अपना असली नाम और पता छुपाने की कोशिश करता रहा, लेकिन ग्रामीणों के दबाव में आकर उसने अपनी वास्तविक पहचान उजागर की। उसका असली नाम मोहम्मद हबीब था और वह अररिया जिले के भरगामा थाना क्षेत्र के बैजुपट्टी तकिया टोला का रहने वाला है। असलियत सामने आते ही उसने लड़की से शादी करने से साफ इनकार कर दिया।
कानूनी कार्रवाई और न्याय की प्रतीक्षा
सच्चाई सामने आते ही आक्रोशित ग्रामीणों ने आरोपी को मौके पर ही पकड़ लिया और पुलिस को सौंप दिया। जानकीनगर थानाध्यक्ष परीक्षित पासवान ने बताया कि पीड़ित परिवार की तहरीर के आधार पर पॉक्सो एक्ट व अन्य सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है और पीड़िता का मेडिकल परीक्षण व बयान दर्ज कराया जा रहा है।
हमारी सभ्यता हमेशा से सत्य, अहिंसा और न्याय को सर्वोपरि मानती रही है। जब कोई व्यक्ति धोखे का मार्ग अपनाता है, तो समाज और कानून दोनों का यह कर्तव्य बनता है कि वह पीड़ित को न्याय दिलाए। यह घटना हमें याद दिलाती है कि विश्वास की रक्षा केवल कानून से ही नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता से भी होती है।
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