राजस्थान: सत्ता संघर्ष और गुटबाजी, बेढम ने गहलोत पर साधा निशाना
राजस्थान की सियासत में एक बार फिर शब्दों की बारात शुरू हो गई है। राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के हालिया बयानों को हताशा और राजनीतिक बौखलाहट का प्रतीक बताया है। इस आरोप-प्रत्यारोप के बीच एक गंभीर सवाल यह भी उठता है कि जब राजनीतिक दल आपसी कलह में उलझे रहते हैं, तो शासन का धर्म और जनता का हित कहां जाता है।
कोरोना काल में सत्ता संघर्ष और शासन का धर्म
मंत्री बेढम ने कांग्रेस के इतिहास के पन्ने पलटते हुए उस दौर की याद दिलाई, जब पूरा राजस्थान कोरोना महामारी की चपेट में था। तब जनता बेहाल थी, लेकिन कांग्रेस के नेता मानेसर के होटलों में अपनी ही सरकार को बचाने और गिराने के खेल में व्यस्त थे। यह वह समय था जब शासक का प्रथम कर्तव्य जनता की सुरक्षा और सेवा होना चाहिए था, लेकिन सत्ता के लोभ ने उस नैतिक धर्म को भुला दिया।
बेढम ने कहा कि जनता को भगवान भरोसे छोड़कर कांग्रेस के नेता होटलों में सत्ता संघर्ष का लुत्फ उठा रहे थे। यह अंतर्कलह आज भी खत्म नहीं हुई है, बल्कि और बढ़ गई है।
पुष्कर शिविर: एकता के अभाव का प्रमाण
कांग्रेस के सांगठनिक पुनर्गठन और पदों को लेकर मचे घमासान पर बोलते हुए बेढम ने पुष्कर प्रशिक्षण शिविर का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वहां मंच से दिग्गज नेताओं के फोटो हटाए जाने जैसी घटनाएं किसी भी संगठन की आंतरिक एकता के अभाव को सामने ला रही हैं। भारतीय दर्शन में एकता को सर्वोपरि माना गया है, और बिना सामंजस्य के कोई भी राजनीतिक इकाई जनता का विश्वास जीतने में सफल नहीं हो सकती।
आरोपों का दौर और जवाबदेही
बेढम ने दावा किया कि पदों की अंदरूनी खींचतान के कारण ही अशोक गहलोत खुद को असहज महसूस कर रहे हैं और अपनी कमजोरी छिपाने के लिए वे सरकार पर आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने गहलोत सरकार के कार्यकाल के दौरान कथित भ्रष्टाचार, माफिया राज और पेपर लीक जैसे मुद्दों को भी उठाया, जो न्याय और निष्पक्षता के मूल्यों के विरुद्ध हैं।
लोकतंत्र में जनता का फैसला अंतिम
राजनीतिक दलों की आंतरिक सिरफुटव्वल अंततः जनता के सामने ही खुलती है। बेढम ने पश्चिम बंगाल की राजनीतिक बदलाव का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह वहां बदलाव की आंधी आई, वैसे ही राजस्थान की जागरूक जनता भी अब उन लोगों को रास्ता दिखाने को तैयार है, जो जनकल्याण से ज्यादा अपनी गुटबाजी में व्यस्त रहे। आने वाले समय में राजस्थान की राजनीति का क्या रुख होगा, यह जनता की जागरूकता और उसके निर्णय पर निर्भर करेगा। लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत आम जनता है, जो न्याय और अहिंसा के मार्ग पर चलकर ही सही शासन का निर्माण कर सकती है।