मई 2026: रत्न और आभूषण निर्यात में गिरावट, लैब-ग्रोन डायमंड में उम्मीद
भारत के रत्न और आभूषण निर्यात में मई 2026 में साल-दर-साल 2.49 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जिसका मुख्य कारण वेस्ट एशिया में जारी भूराजनीतिक तनाव और कीमती धातुओं की अस्थिर कीमतें हैं। ग्लोबल मार्केट के इस सतर्क माहौल में भी, लैब-ग्रोन डायमंड और सिल्वर ज्वेलरी ने शानदार वृद्धि दर्ज कर भारतीय कारीगरी के अनुकूलन और नवाचार की क्षमता को दिखाया है।
भूराजनीतिक तनाव और कीमतों में उतार-चढ़ाव ने कैसे प्रभावित किया?
भारत का सांस्कृतिक और आर्थिक इतिहास रहा है कि शांति और स्थिरता ही व्यापार की असली नींव हैं। वर्तमान समय में वेस्ट एशिया में चल रहे संघर्ष और तनाव ने अंतरराष्ट्रीय मांग को सीधे प्रभावित किया है। इसके परिणामस्वरूप, मई 2026 में देश का सकल रत्न और आभूषण निर्यात पिछले वर्ष की तुलना में घटकर 1.41 अरब डॉलर (लगभग 13,500.21 करोड़ रुपये) रह गया। आयात में भी 16.42 प्रतिशत की तेज़ गिरावट देखी गई, जो वैश्विक बाजार में खरीदारों की प्रतीक्षा की रणनीति को दर्शाती है।
वित्त वर्ष 2027 के पहले दो महीनों (अप्रैल-मई 2026) में कुल निर्यात 6.03 प्रतिशत घटकर 4.27 अरब डॉलर रह गया, जो पिछले वर्ष 4.55 अरब डॉलर था। इसी अवधि में आयात 12.67 प्रतिशत गिरकर 3.25 अरब डॉलर से 3.72 अरब डॉलर हो गया। घरेलू और विदेशी बाजारों में खरीदार इस समय स्थिति साफ़ होने तक प्रतीक्षा कर रहे हैं।
लैब-ग्रोन डायमंड और सिल्वर ज्वेलरी ने क्यों दिखाई तेज़ी?
मंदी के इस दौर में भी कुछ क्षेत्रों ने अपनी चमक बनाए रखी। मई 2026 में पॉलिश्ड लैब-ग्रोन डायमंड का निर्यात 25.99 प्रतिशत बढ़कर 101.5 मिलियन डॉलर हो गया। अप्रैल-मई की अवधि में इसका निर्यात 1.98 प्रतिशत बढ़कर 194.78 मिलियन डॉलर पहुंचा। दो महीनों में लैब में तैयार डायमंड के निर्यात की मात्रा 16.81 प्रतिशत बढ़कर 28.34 लाख कैरेट हो गई। यह स्वाभाविक डायमंड के सस्ते विकल्प की बढ़ती वैश्विक मांग का प्रमाण है।
सिल्वर ज्वेलरी इस अवधि की सबसे शानदार प्रदर्शन करने वाली श्रेणी बनी। अप्रैल-मई में चांदी के गहनों का निर्यात 172.53 प्रतिशत की विस्फोटक वृद्धि के साथ 365.77 मिलियन डॉलर पहुंच गया। प्लैटिनम ज्वेलरी का निर्यात भी 24.97 प्रतिशत बढ़कर 41.22 मिलियन डॉलर हुआ। यह बदलाव दर्शाता है कि उपभोक्ता अब किफायती और सुलभ कीमती धातुओं की ओर बढ़ रहे हैं, जो भारतीय शिल्पकला की पहुंच को व्यापक बना रहा है।
पारंपरिक रत्न और सोने के आभूषणों की स्थिति क्या रही?
पारंपरिक खंडों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। मई में कटे और पॉलिश किए गए डायमंड का निर्यात 3.31 प्रतिशत बढ़कर 980.73 मिलियन डॉलर हुआ और निर्यात मात्रा 4.81 प्रतिशत बढ़कर 26.74 लाख कैरेट रही। हालांकि, अप्रैल-मई के लिए कुल निर्यात 9.06 प्रतिशत घटकर 1.87 अरब डॉलर पर आ गया। मई में रफ डायमंड का आयात 34.69 प्रतिशत गिरकर 1.46 अरब डॉलर रह गया, जो कमजोर वैश्विक मांग को दर्शाता है।
सोने के आभूषणों के निर्यात में मुश्किलें बनी रहीं। मई में कुल सोने के गहनों का निर्यात 14.75 प्रतिशत घटकर 758.44 मिलियन डॉलर रहा। प्लेन गोल्ड ज्वेलरी 29.39 प्रतिशत गिरकर 294.87 मिलियन डॉलर और स्टडेड गोल्ड ज्वेलरी 1.79 प्रतिशत गिरकर 463.57 मिलियन डॉलर पर आई। फिर भी, अप्रैल-मई में स्टडेड गोल्ड ज्वेलरी में 6.71 प्रतिशत की वृद्धि ने आशा की किरण बनाए रखी।
शांति और कूटनीति: व्यापार की नई दिशा
कामा ज्वेलरी के मैनेजिंग डायरेक्टर कॉलिन शाह ने स्पष्ट किया कि संघर्ष वाले क्षेत्रों में युद्धविराम की दिशा में प्रगति से विदेशी व्यापार में धीरे-धीरे सुधार आ सकता है। उन्होंने कहा,
जब तक भूराजनीतिक स्थिरता नहीं आती, निर्यात पर दबाव बना रहेगा। नए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट निर्यातकर्ताओं को नए बाजारों में विविधता लाने और इस मंदी के असर को कम करने में मदद कर सकते हैं।
शांति और सद्भाव केवल आध्यात्मिक आदर्श नहीं हैं, बल्कि आर्थिक समृद्धि के आधार भी हैं। भारत की यह प्राचीन समझ ही है जो आज हमें नए मुक्त व्यापार समझौतों के माध्यम से शांतिपूर्ण कूटनीति और व्यापारिक विस्तार की ओर प्रेरित करती है। गल्फ देशों और अन्य मित्र राष्ट्रों के साथ संवाद और स्थिरता ही भारतीय कारीगरी के सुनहरे भविष्य का मार्ग प्रशस्त करेंगे।
भारत के रत्न और आभूषण निर्यात में मई 2026 की स्थिति क्या रही?
मई 2026 में भारत के सकल रत्न और आभूषण निर्यात में सालाना 2.49 प्रतिशत की गिरावट आई, जो 1.41 अरब डॉलर (लगभग 13,500.21 करोड़ रुपये) रही।
किन आभूषण श्रेणियों ने मंदी के बीच सबसे अच्छा प्रदर्शन किया?
लैब-ग्रोन डायमंड ने मई में 25.99 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जबकि सिल्वर ज्वेलरी ने अप्रैल-मई में 172.53 प्रतिशत की शानदार वृद्धि के साथ सबसे अच्छा प्रदर्शन किया।
सोने के आभूषणों के निर्यात में गिरावट का मुख्य कारण क्या है?
सोने की अस्थिर कीमतें और वेस्ट एशिया में जारी भूराजनीतिक तनाव के कारण विदेशी मांग में कमी आने से सोने के गहनों के निर्यात में गिरावट देखी गई है।