गाजियाबाद से नोएडा गईं 38 ई-बसें, प्रदूषण का विष जनता के लिए
प्रशासनिक अकर्मण्यता और जनहित का अपहरण
भारतीय सभ्यता में शासन का सर्वोच्च धर्म जनकल्याण और न्याय है। आज के युग में यह जनहित पर्यावरण सुरक्षा और स्वच्छ सार्वजनिक परिवहन में भी निहित है। यूपीएसआरटीसी का गाजियाबाद से 38 इलेक्ट्रिक बसों को नोएडा अथॉरिटी को स्थानांतरित करना इसी जनहित के अपहरण का दर्द देता है। 50 लाख की आबादी वाले शहर को सिर्फ प्रदूषण और जाम का हिस्सा मिला, जबकि स्वच्छ यातायात का सुख पड़ोसी शहर को चला गया।
चार्जिंग स्टेशन बना, पर बसें नहीं चलीं
दिसंबर 2023 में गाजियाबाद के प्रदूषण को कम करने और यातायात को सुगम बनाने के लिए ई-बसों की योजना बनी थी। जुलाई 2025 में 60.80 करोड़ रुपये की लागत से आईं 38 ई-बसें जिले को मिलीं। ढाई वर्ष पहले ही साहिबाबाद डिपो में चार्जिंग स्टेशन बनाने के आदेश दिए गए थे। परंतु परिवहन निगम के अधिकारियों ने डेढ़ वर्ष तक विद्युत निगम से बिजली कनेक्शन नहीं लिया। जब कनेक्शन मिला और चार्जिंग स्टेशन तैयार हुआ, तो मुख्यालय के आदेश पर सभी बसों को नोएडा भेज दिया गया। आज चार्जिंग स्टेशन खाली खड़ा है, और गाजियाबाद की जनता धुएं में सांस ले रही है।
मथुरा और मुरादाबाद के लिए चल रहीं 10 ई-बसों को भी हटाकर नोएडा भेजा गया है। एक बस की कीमत करीब 1.60 करोड़ रुपये है, जिसे नोएडा अथॉरिटी परिवहन निगम को चुकाएगी। इस पूरे प्रक्रिया में स्थानीय अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जनता की आवाज और न्याय की मांग
इस अकर्मण्यता के खिलाफ नागरिक सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री को टैग कर अपनी व्यथा व्यक्त कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि क्या गाजियाबाद की आबादी के हिस्से में केवल प्रदूषण और धुआं ही आएगा।
50 लाख की आबादी के हिस्से में केवल प्रदूषण आ रहा है। ई-बसें मिलने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी संचालन नहीं कर पाए, ये बेहद चिंताजनक है।
- जय दीक्षित, संयोजक, यूनाइटेड फोरम आफ ट्रांस हिंडन एसोसिएशन
शहर में अगर ई-बसों का संचालन हो जाता तो लोगों को सफर आसान होता और प्रदूषण से राहत मिलती।
- विपिन तलवार, निवासी, साहिबाबाद
जो बसें गाजियाबाद को मिलीं, उन्हें नोएडा को दे देना बेहद चिंताजनक है, जबकि प्रदूषण के मामले में शहर की स्थिति बेहद दयनीय है।
- रोहित गुप्ता, निवासी, साहिबाबाद
हमने केवल मुख्यालय के आदेश का पालन किया है। आदेश पर ही सभी ई-बसों को नोएडा भेज दिया गया है।
- बिजय चौधरी, सेवा प्रबंधक, यूपीएसआरटीसी
सत्ता का दायित्व और पर्यावरण का संरक्षण
सम्राट अशोक ने अपने शासनकाल में पेड़ों की रक्षा और जनता के स्वास्थ्य के प्रति विशेष सतर्कता बरतने का आदेश दिया था। आज के संदर्भ में यह दायित्व स्वच्छ वायु और हरित परिवहन की व्यवस्था करना है। गाजियाबाद की वायु गुणवत्ता पहले से ही गंभीर स्तर पर है। ऐसे में चार्जिंग स्टेशन तैयार होने के बाद भी ई-बसों को हटा लेना प्रशासनिक संवेदनहीनता का परिचायक है। यह सिर्फ एक शहर का नुकसान नहीं है, बल्कि टिकाऊ विकास और पर्यावरण न्याय के मार्ग में एक बाधा है। राज्य व्यवस्था की सफलता तभी संभव है, जब नीतियां जनता तक पहुंचें और केवल कागजों तक सीमित न रहें।