E-20 से आगे: फ्लेक्सी-फ्यूल वाहनों से नई ऊर्जा क्रांति की तैयारी
भारत अपनी ऊर्जा नीति में एक और ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर ने घोषणा की है कि सरकार मौजूदा E-20 (पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिश्रण) से आगे बढ़कर फ्लेक्सी-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने की योजना पर काम कर रही है। यह कदम न केवल ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि वैश्विक तेल संकट के बीच भारत की सुदृढ़ सोच को भी दर्शाता है।
फ्लेक्सी-फ्यूल वाहनों से क्या बदलेगा?
तरुण कपूर ने 'द इंडिया शुगर एंड बायो-एनर्जी कॉन्फ्रेंस 2026' में कहा कि E-20 कार्यक्रम अब तक बेहद सफल रहा है। कई वाहन निर्माता कंपनियों ने जल्द ही फ्लेक्सी-फ्यूल गाड़ियां पेश करने की घोषणा की है। इन वाहनों में इथेनॉल की मात्रा E-20 से अधिक हो सकती है, जिससे पेट्रोल की खपत में और कमी आएगी।
कपूर ने कहा, ''अब हमारा ध्यान फ्लेक्सी-फ्यूल गाड़ियों पर है और ऐसी ब्लेंडिंग की मंजूरी देना है जो E-20 से ज्यादा हो।'' उन्होंने यह भी बताया कि ऐसी गाड़ियों के लिए ईंधन बिक्री केंद्रों पर शुद्ध इथेनॉल की उपलब्धता बढ़ानी होगी।
पश्चिम एशिया संकट और जैव-ईंधन की प्रासंगिकता
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। इस संकट ने आपूर्ति श्रृंखला को बाधित किया है, जिससे जैव-ईंधन पर जोर देना और भी आवश्यक हो गया है। तरुण कपूर ने कहा, ''यह जरूरी है कि हम देश में जो कुछ भी उपलब्ध है, उसका इस्तेमाल करने की कोशिश करें।''
E-20 की आलोचना पर स्पष्टीकरण
E-20 को लेकर हालिया आलोचनाओं का जवाब देते हुए कपूर ने कहा कि अधिकांश आलोचनाएं गलत सूचना या 'खास मकसद से की गई' हैं। शोध से पता चला है कि E-20 ईंधन क्षमता में थोड़ी कमी की भरपाई उच्च 'ऑक्टेन' सामग्री से कर लेता है। यह तकनीकी रूप से सुदृढ़ और पर्यावरण के अनुकूल है।
डीजल में जैव-ईंधन एडिटिव्स: नया प्रयोग
डीजल सेक्शन में भी सरकार नई संभावनाएं तलाश रही है। कपूर ने बताया कि आइसोब्यूटेनॉल के साथ किए जा रहे प्रयोग सफल रहे तो यह जैव-ईंधन के लिए एक बड़ा अवसर खोल सकते हैं। रिफाइनरी उत्पादन में डीजल का बड़ा हिस्सा होता है, इसलिए यह प्रयोग महत्वपूर्ण है।
गोवर्धन योजना और सीबीजी को बढ़ावा
सरकार की नई गोवर्धन योजना संपीड़ित बायोगैस (सीबीजी) को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न मंत्रालयों के प्रयासों को एक साथ जोड़ती है। कपूर ने इथेनॉल उत्पादक कंपनियों से सीबीजी उत्पादन और पोटाश जैसे मूल्यवर्धित उप-उत्पादों पर भी ध्यान देने का आग्रह किया।
निवेश की सुरक्षा और सरकार की प्रतिबद्धता
सरकार जैव-ईंधन क्षेत्र के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। कपूर ने आश्वासन दिया कि बाजार के विस्तार के साथ मौजूदा निवेश में कोई अनिश्चितता नहीं आने दी जाएगी। यह नीति भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
E-20 क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
E-20 का अर्थ है पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिलाना। यह पेट्रोलियम आयात कम करने और पर्यावरण को स्वच्छ बनाने में सहायक है। भारत ने इसे सफलतापूर्वक लागू किया है।
फ्लेक्सी-फ्यूल वाहन कैसे काम करते हैं?
फ्लेक्सी-फ्यूल वाहन इंजन में इथेनॉल की अधिक मात्रा (20% से अधिक) के साथ चल सकते हैं। ये वाहन पेट्रोल और इथेनॉल के विभिन्न अनुपातों में ईंधन का उपयोग करने में सक्षम होते हैं।
क्या E-20 से वाहनों की परफॉर्मेंस प्रभावित होती है?
शोध के अनुसार, E-20 से ईंधन क्षमता में मामूली कमी आ सकती है, लेकिन उच्च ऑक्टेन सामग्री इसकी भरपाई कर देती है। समग्र प्रदर्शन संतोषजनक है।
गोवर्धन योजना का उद्देश्य क्या है?
गोवर्धन योजना का उद्देश्य संपीड़ित बायोगैस (सीबीजी) उत्पादन को बढ़ावा देना है, जिससे किसानों की आय बढ़े और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिले।