रामगंगा के खादर में तेंदुए का आतंक: विरमो देवी की मौत के बाद गांवों में दहशत, PAC तैनात
मुरादाबाद के रामगंगा खादर क्षेत्र में तेंदुए का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। बलिया गांव में महिला विरमो देवी की जान लेने के बाद बुधवार शाम तेंदुआ एक बार फिर उसके घर के पास जंगल में देखा गया। आबादी के इतने करीब तेंदुए की मौजूदगी ने ग्रामीणों में दहशत और वन विभाग के खिलाफ आक्रोश दोनों बढ़ा दिया है।
गांव में PAC तैनात, रेस्क्यू टीम मौके पर
ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुआ लगातार आबादी और रास्तों के आसपास घूम रहा है, लेकिन उसे पकड़ने के इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। आक्रोश को देखते हुए एहतियात के तौर पर गांव में पीएसी (PAC) तैनात कर दी गई है। वहीं, निर्माणाधीन गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय के पास से तेंदुआ पालतू कुत्ते को उठा ले गया, जिसके पग चिह्न मिले हैं।
वन संरक्षक आदर्श कुमार ने बताया कि पकड़े गए तीन तेंदुओं में से दो को कानपुर और लखनऊ के रेस्क्यू सेंटर भेज दिया गया है। तीसरे तेंदुए को भी अनुमति मिलते ही संरक्षित स्थान पर भेजा जाएगा। आगरा की एसओएस वाइल्डलाइफ रेस्क्यू टीम भी दोबारा मोर्चे पर पहुंच गई है।
सड़क पर तेंदुआ देखकर बाइक सवारों के उड़े होश
ग्रामीणों के मुताबिक, बुधवार को शरीफनगर-मदारपुर मार्ग पर तेंदुआ अचानक बाइक सवारों के सामने आ गया, जिससे उनके होश उड़ गए। किसी तरह उन्होंने जान बचाकर वहां से निकले। मदारपुर से तेंदुआ बंदर और कुत्ते को उठाकर ले गया।
विरमो देवी की मौत के बाद गांव में शोक और गुस्सा
तेंदुए के हमले में विरमो देवी की मौत के बाद मंगलवार को गांव में कोहराम मच गया। पुलिस के पहरे में रामगंगा किनारे उनका अंतिम संस्कार किया गया। पुलिस धार्मिक स्थलों के माध्यम से ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए एलान भी करा रही है, लेकिन तेंदुए के दोबारा दिखने से डर कम नहीं हुआ है।
रामगंगा का बढ़ता जलस्तर बढ़ा रहा चुनौती
वन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती रामगंगा नदी का बढ़ता जलस्तर है। वन संरक्षक के मुताबिक, पानी बढ़ने से तेंदुए आसपास के क्षेत्रों में मूवमेंट कर सकते हैं। खेतों में पानी भरने से तेंदुओं के छिपने की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। ऐसे में किसानों और ग्रामीणों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
क्षेत्र में फिलहाल 22 पिंजरे लगाए गए हैं और आसपास के जिलों से और पिंजरे मंगाए जा रहे हैं। वन विभाग की टीमें निगरानी में जुटी हैं। लेकिन ग्रामीणों का सवाल अब भी वही है कि जब तेंदुआ घरों और सड़कों तक पहुंच चुका है और एक महिला की जान जा चुकी है, तो उसे पकड़ने की कार्रवाई इतनी धीमी क्यों है?