श्याम रसोई साहिबाबाद: 1 रुपये में भरपेट सात्विक भोजन, सेवा का अनूठा उदाहरण
गाजियाबाद के साहिबाबाद में स्थित श्री राम जानकी मंदिर की श्याम रसोई इन दिनों चर्चा का केंद्र है। यहां हर दिन दोपहर 12 से 1 बजे तक सैकड़ों लोगों को सिर्फ 1 रुपये में भरपेट, शुद्ध सात्विक भोजन परोसा जाता है। यह पहल न केवल भूख मिटाने का माध्यम है, बल्कि मानवीय गरिमा और स्वाभिमान को सुरक्षित रखने की एक अनोखी सोच का प्रतीक भी है।
कहां मिलता है 1 रुपये में अनलिमिटेड थाली?
यह भोजन जीटी रोड मेट्रो पिलर नंबर 268 (श्याम पार्क-मोहन नगर) के पास बने पार्क में पीपल के पेड़ के नीचे परोसा जाता है। थाली में मटर पनीर, सोया चाप, राजमा-चावल, पूड़ी-सब्जी, दाल मखनी-रोटी और मिठाई शामिल होती है। भोजन श्री राम जानकी मंदिर में बनता है और सनातन पद्धति से बैठकर खिलाया जाता है।
पंडित गोपाल पुजारी की प्रेरणा और संघर्ष
इस सेवा के पीछे मंदिर के पंडित गोपाल पुजारी हैं। वे बताते हैं, 'एक समय ऐसा भी था जब मेरे पास खाने के लिए भोजन नहीं था। दो रोटियां थीं। उसके चार टुकड़े किए। एक-एक टुकड़ा बच्चों को दिया। एक पत्नी को दिया और एक खुद खाया। फिर भगवान खाटू श्याम की कृपा से मन में गरीबों के लिए रसोई खोलने का विचार आया।'
पंडित गोपाल पुजारी पहले सरकारी स्कूल में संगीत शिक्षक थे। 2019 में स्वास्थ्य कारणों से वीआरएस लेने के बाद वे मंदिर में पूजा-पाठ करने लगे। कोरोना काल में अपनी पूरी बचत खर्च कर उन्होंने श्याम रसोई की शुरुआत की। जनवरी 2022 में उन्होंने 1 रुपये में भोजन देने की घोषणा की, और तब से यह क्रम निरंतर जारी है।
1 रुपये लेने के पीछे की विचारधारा
पंडित गोपाल पुजारी ने 1 रुपये लेने के पीछे की गहरी सोच साझा की: 'यह एक विचारधारा है कि किसी को यह न लगे कि उसे भीख में भोजन दिया जा रहा है। हर गरीब जरूरतमंद को यह लगना चाहिए कि वह अपने पैसे से भोजन खरीदकर खा रहा है। उसका स्वाभिमान बना रहे।' उन्होंने यह भी बताया कि 1 रुपये देने के बाद लोग भोजन के बारे में फीडबैक देते हैं, क्योंकि वे अपने पैसे से खाना खरीद रहे हैं।
सामाजिक विरोध और प्रशासनिक सहयोग
इस सेवा का मार्ग आसान नहीं रहा। कुछ असामाजिक तत्वों ने इसका विरोध किया। पंडित गोपाल पुजारी बताते हैं, 'विरोध इतना बढ़ गया था कि मेरे बच्चे स्कूल नहीं जा पाते थे। फिर पुलिस ने सहयोग किया। सीएम योगी ने भी मदद का आश्वासन दिया। स्थानीय लोगों ने सहयोग किया।'
अन्न दान की परंपरा और समाज सेवा
श्याम रसोई में लोग स्वयं सेवा के लिए आते हैं। पंडित गोपाल पुजारी अन्न दान की अपील करते हैं, नकद पैसे नहीं मांगते। एक दिन का खर्च करीब 15 हजार रुपये है, और 300-400 लोगों के लिए भोजन बनता है। मंदिर में रोटी मशीन, आटा गूंथने की मशीन और 120 लीटर का कुकर मौजूद है।
सनातन परंपरा और सामाजिक समावेश
श्याम रसोई में हर समुदाय के लोगों को भोजन मिलता है। पंडित गोपाल पुजारी कहते हैं, 'किसी व्यक्ति को खास समुदाय का होने की वजह से भोजन-प्रसादी से वंचित किया जाए, यह कहीं से उचित नहीं है, सनातन की परंपरा भी नहीं है।' उन्होंने श्री श्याम रसोई डिस्पेंसरी भी शुरू की है, जहां 1 रुपये में इलाज की सुविधा मिलती है।
सेवा का अमृत: समाज के लिए प्रेरणा
यह पहल भारतीय संस्कृति की उस परंपरा को जीवंत करती है, जहां अन्न दान को सबसे बड़ा दान माना गया है। अशोक के धम्म की तरह, यह सेवा मानवता की एकता और करुणा का संदेश देती है। पंडित गोपाल पुजारी की यह पहल न केवल भूखों का पेट भरती है, बल्कि समाज को सेवा और स्वाभिमान का पाठ भी सिखाती है।