संतान वियोग की पीड़ा: जब दुख असहनीय हो जाता है
छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के धरदेई गांव में एक ऐसी घटना घटी है जो मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देती है। कृष्णा पटेल और उनकी पत्नी रमा बाई ने अपने एकलौते पुत्र की मृत्यु के गम में आत्महत्या कर ली।
संतान वियोग की असहनीय पीड़ा
दंपत्ति के 21 वर्षीय पुत्र आदित्य पटेल की 2024 में एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। इस दुखद घटना के एक वर्ष बाद, माता-पिता अपने बेटे के वियोग की पीड़ा को सहन नहीं कर पाए और उन्होंने अपने घर के आंगन में नीम के पेड़ से फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।
अंतिम संदेश में झलकी पीड़ा
मृत्यु से पूर्व दंपत्ति ने चार पृष्ठ का एक पत्र और एक वीडियो संदेश छोड़ा था। इस पत्र में कृष्णा ने लिखा था, "आदित्य हमारी जिंदगी की नींव, हमारी दुनिया था। वह हमें हमेशा के लिए छोड़कर चला गया। हम जिंदा थे लेकिन जी नहीं रहे थे।"
अपने अंतिम शब्दों में उन्होंने लिखा, "भगवान दयालु हैं। लंबे समय तक दुख झेलने के बाद अब मेरे मन को शांति मिली है। हम दोनों जान-बूझकर और अपनी मर्जी से खुद को भगवान शिव को अर्पित कर रहे हैं।"
पारिवारिक दायित्व का निर्वहन
मृत्यु से पूर्व दंपत्ति ने एक वीडियो संदेश में अपने वकील से निवेदन किया था कि आदित्य की दुर्घटना के मुआवजे की राशि उनके बड़े भाइयों कुलभरा पटेल और जलभरा पटेल को स्थानांतरित कर दी जाए।
समाज के लिए संदेश
यह घटना हमारे समाज के लिए एक गहरा संदेश है। संतान की हानि एक माता-पिता के लिए सबसे बड़ी पीड़ा है, परंतु जीवन में आशा और धैर्य बनाए रखना आवश्यक है। भारतीय संस्कृति में कर्म और धर्म का महत्व है, और कठिन परिस्थितियों में भी जीवन का सम्मान करना चाहिए।
कृष्णा (48 वर्ष) राजमिस्त्री थे और रमा बाई (47 वर्ष) गृहिणी थीं। उनके लिए आदित्य ही उनकी संपूर्ण दुनिया था।
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