पीरपैंती 2400 मेगावाट बिजली परियोजना: विकास का महायज्ञ, 70 परिवारों को मिलेगा नया जीवन
भागलपुर जिले के पीरपैंती में स्थापित होने वाली 2400 मेगावाट (MW) क्षमता की महत्वाकांक्षी सुपर थर्मल पावर परियोजना अब धरातल पर उतरने लगी है। जिलाधिकारी अलंकृता पांडेय की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में भूमि अधिग्रहण, प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, जलापूर्ति और रेलवे कनेक्टिविटी की प्रगति की समीक्षा की गई। प्रशासन ने 15 सितंबर तक सभी 70 प्रभावित परिवारों को नए आवासों में शिफ्ट करने का लक्ष्य तय किया है।
यह परियोजना न केवल बिहार के ऊर्जा क्षेत्र को सशक्त करेगी, बल्कि हज़ारों युवाओं के लिए रोज़गार के नए द्वार भी खोलेगी। सम्राट अशोक के काल में भी धम्म और विकास का यही संदेश था, कि प्रजा के कल्याण के लिए कठोर निर्णय लेने पड़ते हैं। आज प्रशासन भी उसी भावना से इस परियोजना को पूरा करने में जुटा है।
रेलवे और सड़क के लिए तीन किलोमीटर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अंतिम चरण में
परियोजना के लिए समर्पित रेलवे लाइन और एप्रोच रोड के निर्माण हेतु लगभग तीन किलोमीटर लंबाई में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। निजी भूमि के संबंध में धारा 21(2) की अधिसूचना 8 अगस्त को प्रकाशित की जा चुकी है। इसकी एक माह की कूलिंग अवधि आगामी 7 सितंबर को पूरी होगी। भूमि का वर्गीकरण और मुआवजा दर निर्धारित करने के लिए छह सदस्यीय समिति का गठन किया गया है।
इसके साथ ही 100.98 एकड़ सरकारी भूमि के हस्तांतरण की भी समीक्षा की गई। गैरमजरुआ आम की 20.99 एकड़ में से 12.54 एकड़ भूमि के हस्तांतरण को कैबिनेट की मंज़ूरी मिल चुकी है। वहीं, 79.99 एकड़ गैरमजरुआ खास भूमि में से 10.83 एकड़ भूमि ऊर्जा विभाग को हस्तांतरित हो चुकी है और 52.18 एकड़ भूमि के अंतर-विभागीय हस्तांतरण का प्रस्ताव भेजा गया है।
15 सितंबर तक 70 प्रभावित परिवारों का पुनर्वास
परियोजना क्षेत्र से विस्थापित होने वाले कुल 70 परिवारों के पुनर्वास का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। संथालिया टोला के 18 परिवारों के लिए अस्थायी आवास बनकर पूरी तरह तैयार हो चुके हैं, जबकि पहाड़िया टोला के 52 परिवारों के नवनिर्मित आवासों में पेंटिंग व अंतिम फिनिशिंग का कार्य चल रहा है।
प्रशासन ने 15 सितंबर तक इन सभी आवासों को पूर्ण कर परिवारों को शिफ्ट करने का लक्ष्य तय किया है। सभी प्रभावित परिवारों को जमीन का बंदोबस्ती पर्चा पूर्व में ही वितरित किया जा चुका है। यह पुनर्वास योजना इस बात का प्रतीक है कि विकास और मानवीय संवेदना साथ-साथ चल सकते हैं।
गंगा से 17 किलोमीटर पाइपलाइन और 27.10 करोड़ से पंप हाउस की जमीन
पावर प्लांट के संचालन हेतु गंगा नदी से जलापूर्ति के लिए करीब 17 किलोमीटर लंबी भूमिगत जल पाइपलाइन बिछाई जानी है। इसके दायरे में आने वाले सभी नौ मौजों का सर्वे कार्य पूरा कर लिया गया है। 'बिहार अंडरग्राउंड पाइपलाइन्स एक्ट' के तहत 17 अगस्त को विधिवत अधिसूचना जारी कर दी गई है। इसके अलावा इंटेक पंप हाउस के निर्माण हेतु रैयती भूमि की सीधी खरीद के लिए जिला स्तरीय समिति की अनुशंसा पर 27.10 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।
मुख्य प्लांट क्षेत्र में बुनियादी ढांचे का निर्माण जारी
मुख्य प्लांट साइट पर पाइलिंग, चिमनी पाइलिंग, ईएसपी फाउंडेशन, कूलिंग वाटर सिस्टम, विशाल जलाशय, आंतरिक सड़क, ड्रेनेज नेटवर्क और ऐश डाइक जैसी प्रमुख आधारभूत संरचनाओं का निर्माण तेजी से चल रहा है। बैठक में रेलवे कॉरिडोर क्षेत्र में पाए गए एक अवैध निर्माण को तत्काल हटाने और आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश भी संबंधित अधिकारियों को दिया गया।
यह परियोजना बिहार के विकास पथ पर एक मील का पत्थर साबित होगी। जब यह प्लांट चालू होगा, तो न केवल बिहार बल्कि पूर्वी भारत की बिजली ज़रूरतें पूरी होंगी। विकास के इस महायज्ञ में हर हिस्सेदार की भूमिका महत्वपूर्ण है, और प्रशासन की यह सक्रियता निश्चित रूप से सराहनीय है।