तेल 100 डॉलर पार, रुपया 96 के पार: RBI के सामने महंगाई की चुनौती, ब्याज दरों पर संकट
बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों, महंगाई के दबाव और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में तेजी के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लिए ब्याज दरों को मौजूदा स्तर पर बनाए रखना पहले की तुलना में कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है, जिससे भारत जैसे तेल आयातक देश पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है।
BNP परिबास की रिपोर्ट में क्या कहा गया?
मंगलवार को जारी BNP परिबास इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, हाल के हफ्तों में भारत का व्यापक आर्थिक परिदृश्य कमजोर हुआ है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पश्चिम एशिया में ताजा तनाव से ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है। अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5 प्रतिशत के आसपास है और यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) तथा बैंक ऑफ जापान (BoJ) ने ब्याज दरें 25 आधार अंक बढ़ाई हैं, जिससे वैश्विक वित्तीय स्थितियां सख्त हुई हैं।
पिछले दो सप्ताह में रुपया करीब 1 प्रतिशत कमजोर हुआ है, भारत की 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 7 प्रतिशत के ऊपर है और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली फिर शुरू हो गई है। BNP परिबास इंडिया के इक्विटी रिसर्च प्रमुख कुणाल वोरा ने कहा कि भारत का आर्थिक दृष्टिकोण तेल कीमतों के प्रति बेहद संवेदनशील है।
विदेशी मुद्रा भंडार को अस्थायी राहत
रिपोर्ट ने माना कि विदेशी मुद्रा गैर-निवासी (FCNR) जमा से विदेशी मुद्रा भंडार को सहारा मिला है। लगभग 127 अरब डॉलर के प्रवाह की मदद से यह करीब 800 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। हालांकि, यह राहत अस्थायी है, क्योंकि ये प्रवाह तीन से पांच साल में लौट सकते हैं।
रिपोर्ट के सकारात्मक पहलुओं में मजबूत ऋण वृद्धि, ऑटो बिक्री, रोजगार आंकड़ों में सुधार और खाद्यान्न का बड़ा भंडार शामिल हैं। वहीं, ग्रामीण मांग पर मानसून की कमी और खाद्य महंगाई का जोखिम बताया गया है।
RBI की मौजूदा स्थिति और आगे की राह
RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने 3 से 5 अगस्त 2026 की बैठक में रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा और रुख