रेपो रेट बढ़ोतरी की आशंका: अक्टूबर में बढ़ सकती हैं लोन की EMI, RBI के फैसले पर टिकी निगाहें
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक 5 अक्टूबर से शुरू हो रही है। 16 अर्थशास्त्रियों और बैंकिंग विशेषज्ञों के सर्वेक्षण में ज्यादातर ने रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की आशंका जताई है। अगर ऐसा होता है, तो होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI बढ़ सकती है। महंगाई के बढ़ते दबाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच RBI को कड़ा फैसला लेना पड़ सकता है।
क्या बढ़ जाएगी लोन की EMI?
फिलहाल RBI की रेपो रेट 5.25 प्रतिशत है। अगर इसमें 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है, तो यह 5.50 प्रतिशत हो जाएगी। रेपो रेट से जुड़े फ्लोटिंग रेट वाले लोन की ब्याज दरें बढ़ सकती हैं। इससे कर्जदारों की EMI बढ़ने या लोन चुकाने की अवधि लंबी होने की संभावना है। हालांकि, असर बैंक की नीतियों, लोन के प्रकार और रीसेट की शर्तों पर निर्भर करेगा।
महंगाई बढ़ने से क्यों बढ़ी चिंता?
अगस्त में भारत की खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो आठ महीने का उच्च स्तर है। जुलाई में यह 4.45 प्रतिशत थी। महंगाई लगातार तीन महीनों से RBI के 4 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है। मिडिल ईस्ट में बढ़े तनाव के कारण ऊर्जा और कमोडिटी की कीमतों पर दबाव है। कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाने से पेट्रोल-डीजल महंगे होने और दूसरी वस्तुओं की कीमतें बढ़ने का जोखिम है।
कच्चे तेल की कीमतों में हालिया उछाल से पेट्रोल-डीजल के खुदरा दाम बढ़ सकते हैं। इससे महंगाई का दबाव दूसरी वस्तुओं तक भी फैल सकता है और RBI को महंगाई के अनुमान में बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है।
ICRA की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर
विशेषज्ञों की राय में क्या है?
- यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की मुख्य आर्थिक सलाहकार कनिका पसरीचा का मानना है कि वैश्विक केंद्रीय बैंकों की दरों में बढ़ोतरी, महंगाई का जोखिम और आर्थिक विकास की मजबूत रफ्तार RBI को ब्याज दर बढ़ाने की गुंजाइश देते हैं।
- क्रिसिल की प्रमुख अर्थशास्त्री दीप्ति देशपांडे के मुताबिक, पश्चिम एशिया के तनाव और ऊर्जा व कमोडिटी की कीमतों के कारण महंगाई का दबाव बढ़ा है। अगर यह स्थिति बनी रहती है, तो आगे भी दरें बढ़ सकती हैं।
- लार्सन एंड टुब्रो के ग्रुप चीफ इकोनॉमिस्ट सच्चिदानंद शुक्ला की राय अलग है। उनका कहना है कि अर्थव्यवस्था में मांग के कारण महंगाई बढ़ने के स्पष्ट संकेत नहीं हैं। ऐसे में RBI फिलहाल रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला ले सकता है।
आगे कितनी बढ़ सकती हैं ब्याज दरें?
सर्वे में कई विशेषज्ञों ने वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान कम से कम दो बार ब्याज दर बढ़ने की आशंका जताई है। कुछ के मुताबिक, इस अवधि में दो से तीन बढ़ोतरी हो सकती हैं। IDFC फर्स्ट बैंक की अर्थशास्त्री गौरा सेनगुप्ता के मुताबिक, महंगाई बढ़ने के साथ मौद्रिक नीति को धीरे-धीरे सामान्य करना जरूरी हो सकता है।
विशेषज्ञों को आर्थिक विकास दर के अनुमान में भी बढ़ोतरी की उम्मीद है। RBI ने अगस्त की पॉलिसी में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 6.7 प्रतिशत रखा था। DBS बैंक की वरिष्ठ अर्थशास्त्री राधिका राव को इसमें मामूली बढ़ोतरी के साथ दर 7 प्रतिशत से ऊपर जाने की उम्मीद है।
RBI का फैसला क्या होगा?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि RBI महंगाई को प्राथमिकता देकर ब्याज दर बढ़ाता है या अर्थव्यवस्था की रफ्तार को देखते हुए कुछ समय और इंतजार करता है। भारत की आर्थिक नीति हमेशा संतुलन पर आधारित रही है। सम्राट अशोक के काल में भी प्रजा के कल्याण को सर्वोपरि रखा गया था। आज के समय में RBI का फैसला आम जनता की जेब पर सीधा असर डालेगा। इसका जवाब अक्टूबर की मौद्रिक नीति समीक्षा में मिलेगा।