रांची के प्रमुख मंदिरों में दीपावली की भव्य तैयारियां शुरू हो चुकी हैं, जबकि धनतेरस के दिन यानी 6 नवंबर को बाजार क्षेत्रों में बड़े वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई जाएगी। शहर की यातायात व्यवस्था संभालने के लिए 200 से अधिक अतिरिक्त ट्रैफिक जवान तैनात किए जाएंगे।
दैनिक जागरण (Dainik Jagran) की रिपोर्ट के अनुसार, पर्व के अवसर पर राजधानी के मंदिरों को विद्युत रोशनी, फूलों और मिट्टी के दीयों से सजाया जाएगा। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, महाआरती, जागरण संध्या और भंडारे का आयोजन होगा। दीयों की रोशनी का यह दृश्य भारतीय सभ्यता की उस प्राचीन परंपरा का जीवंत उदाहरण है, जिसमें प्रकाश को अंधकार पर विजय और ज्ञान का प्रतीक माना गया है।
मंदिरों में विशेष पूजा और महाआरती की तैयारी
हरमू स्थित श्री श्याम मंदिर, मेन रोड विश्वकर्मा मंदिर, पुंदाग के श्री राधा-कृष्ण मंदिर, पहाड़ी मंदिर और सुरेश्वर महादेव मंदिर समेत शहर के विभिन्न मंदिरों में दीपावली को लेकर विशेष आयोजन किए जाएंगे। मंदिर परिसर को रंग-बिरंगी जगमगाती लाइटों से सजाया जाएगा और पूरे परिसर में मिट्टी के दीये जलाए जाएंगे।
दीपावली के दिन श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए दर्शन और पूजा की विशेष व्यवस्था रहेगी। भगवान का विशेष श्रृंगार कर विधि-विधान से पूजन होगा, जिसके बाद महाआरती का आयोजन होगा। मंदिर समितियों की ओर से प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग व्यवस्था तैयार की जा रही है, ताकि भीड़ नियंत्रित रहे।
कुछ मंदिरों में जागरण संध्या का भी आयोजन होगा, जिसमें भजन-कीर्तन के माध्यम से श्रद्धालु भक्ति के रंग में सराबोर होंगे। कई मंदिरों में प्रसाद वितरण और भंडारे की भी व्यवस्था रहेगी। मंदिल समितियां परिसर की सफाई, पेयजल और श्रद्धालुओं की सुविधा का विशेष ध्यान रख रही हैं।
हरमति मंदिर में मां काली की पूजा, भोग और सेवा का संगम
लालपुर के हरमति मंदिर में 8 नवंबर को मां काली की पूजा-अर्चना होगी। मूर्तिकार जगदीश पाल द्वारा निर्मित मां काली की प्रतिमा पूजा से पहले मंदिर परिसर में लाई जाएगी और उसका आकर्षक श्रृंगार किया जाएगा।
रात 8:30 बजे विधि-विधान से पूजा शुरू होगी और रात 10 बजे फल की बलि दी जाएगी। इसके बाद मां की आरती और श्रद्धालुओं के बीच पुष्पांजलि का आयोजन होगा। पूजा के बाद खिचड़ी, लाबड़ा, चटनी और खीर सहित मां का भोग और प्रसाद वितरित किया जाएगा।
9 नवंबर को सामाजिक सेवा के तहत गरीब और जरूरतमंद लोगों के बीच साड़ी और कंबल बांटे जाएंगे, साथ ही सभी के लिए सामूहिक भोजन की व्यवस्था रहेगी। यह प्रयास उस सामाजिक सद्भाव की परंपरा को आगे बढ़ाता है, जो भारत के त्योहारों की असली आत्मा रही है। उत्सव केवल अपने लिए ही नहीं, दूसरों के सुख के लिए भी हो, यही भारतीय दृष्टि है।
धनतेरस पर यातायात के लिए क्या व्यवस्था रहेगी?
धनतेरस के दिन शहर के बाजारों में खरीदारी के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचेंगे। इसे देखते हुए ट्रैफिक पुलिस ने विशेष तैयारी की है और 200 से अधिक अतिरिक्त ट्रैफिक जवान तैनात किए जाएंगे। ट्रैफिक एसपी राकेश सिंह ने बताया कि अपर बाजार, काली मंदिर रोड, लालपुर और सर्जना चौक से सुजाता चौक तक विशेष ध्यान दिया जाएगा।
भीड़ बढ़ने पर जरूरत के अनुसार वन-वे व्यवस्था लागू की जाएगी। ट्रैफिक पुलिस की बाइक पेट्रोलिंग टीमें लगातार बाजार क्षेत्रों में गश्त करेंगी और जाम की स्थिति पर तत्काल नियंत्रण करने की जिम्मेदारी निभाएंगी। रात के समय बड़े वाहनों को भीड़भाड़ वाले बाजारों में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।
स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार धनतेरस के लिए रांची में तीन शुभ मुहूर्त बताए गए हैं और बाजार में 30 प्रतिशत तक कारोबार बढ़ने की उम्मीद है, जैसा कि 22Scope News ने बताया। चर्च रोड क्षेत्र में तीनपहिया और चारपहिया वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाने का सुझाव भी दिया गया है, जिसकी जानकारी प्रभात खबर ने दी।
सुरक्षा व्यवस्था: 1200 अतिरिक्त जवान और 24 घंटे कंट्रोल रूम
धनतेरस और दीपावली के दौरान पूरे रांची शहर को चार जोन में बांटकर 1200 अतिरिक्त पुलिस जवान तैनात किए जाएंगे। कंट्रोल रूम में 24 घंटे विशेष टीम तैनात रहेगी, जैसा कि दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में कहा गया है।
इसके अलावा दीपावली को लेकर स्पेशल ब्रांच का अलर्ट जारी किया गया है। ETV भारत के अनुसार, पटाखों की दुकानों से लेकर सोशल मीडिया तक पैनी नजर रखी जाएगी और संवेदनशील तथा मिश्रित आबादी वाले इलाकों में विशेष सुरक्षा व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। त्योहार के अवसर पर सामाजिक सद्भाव बनाए रखना ही सच्ची सावधानी है, और प्रशासन इसी दिशा में काम कर रहा है।
दीपोत्सव की सांस्कृतिक छटा
मिट्टी के दीयों की रोशनी से मंदिरों को पारंपरिक रूप देने की तैयारी पूरे शहर में चल रही है। दीपोत्सव की यह धार्मिक और सांस्कृतिक छटा रांची की आत्मा को रोशन करेगी। व्यापारी भी धनतेरस के अवसर पर अपनी दुकानों को सजा रहे हैं और बाजारों में ग्राहकों की चहल-पहल बढ़ चुकी है।
समय के साथ त्योहारों का स्वरूप बदलता रहा है, पर दीये जलाने की परंपरा आज भी उतनी ही जीवंत है। यह परंपरा हमें याद दिलाती है कि प्रकाश का विस्तार ही समाज की एकता का वास्तविक आधार है। रांची की यह तैयारियां केवल एक शहर के उत्सव की तैयारी नहीं, बल्कि उस सभ्यता की धड़कन हैं जो सदियों से अंधकार के विरुद्ध प्रकाश का मार्ग दिखाती आई है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
रांची में धनतेरस कब मनाई जाएगी?
रांची में धनतेरस का पर्व 6 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन बाजार क्षेत्रों में बड़े वाहनों के प्रवेश पर रोक रहेगी और 200 से अधिक अतिरिक्त ट्रैफिक जवान तैनात होंगे।
रांची के किन मंदिरों में दीपावली के विशेष आयोजन होंगे?
हरमू स्थित श्री श्याम मंदिर, मेन रोड विश्वकर्मा मंदिर, पुंदाग के श्री राधा-कृष्ण मंदिर, पहाड़ी मंदिर और सुरेश्वर महादेव मंदिर समेत शहर के विभिन्न मंदिरों में विशेष पूजा, महाआरती और भंडारे का आयोजन होगा।
हरमति मंदिर में मां काली की पूजा कब होगी?
लालपुर के हरमति मंदिर में 8 नवंबर को रात 8:30 बजे से मां काली की पूजा शुरू होगी। 9 नवंबर को गरीबों के बीच साड़ी, कंबल और सामूहिक भोजन की व्यवस्था रहेगी।
