जोधपुर, 3 नवंबर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच तीखी नोकझोंक छिड़ गई है। मंगलवार को जोधपुर में भाजपा की 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा की रैली में सीएम भजनलाल ने गहलोत पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए, जिसके जवाब में कांग्रेस नेता ने 24 घंटे में सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की है।
यह राजनीतिक टकराव अनंता रिजॉर्ट को मिले विशेष पैकेज और वरिष्ठ IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल की संपत्ति विवाद को लेकर पहले से ही जारी विवाद के बीच发生 हुआ है, जिसमें गहलोत लगातार सीबीआई और ईडी जांच की मांग कर रहे हैं।
गहलोत का पलटवार: 'तथ्यों सहित विवरण दें, वरना माफी मांगें'
सूत्रों के अनुसार, पत्रिका न्यूज़ की रिपोर्टिंग के अनुसार, गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि भजनलाल ने बिना तथ्यों के झूठे आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जो बोल रहे हैं, वह पूरी तरह से झूठ है और इसका जवाब वे देंगे।
गहलोत ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री के खिलाफ जो भी कहा, वह दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर कहा। उन्होंने आरोप लगाया कि भजनलाल सरकार के शासनकाल में राज्य में भ्रष्टाचार अपने चरम पर है।
गहलोत ने अपने बयान में कहा, “मैं उम्मीद कर रहा था कि वे लोकतांत्रिक मर्यादा के अनुरूप स्वयं जनता को सच बताएंगे, परंतु ऐसा लगता है कि वे अपराधबोध से ग्रसित होकर भाषा की सारी सीमाएं लांघ गए।”
गहलोत ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री इन विवादों से ध्यान भटकाने के लिए जनता को भ्रमित करने का असफल प्रयास कर रहे हैं।
अनंता रिजॉर्ट पैकेज और शिखर अग्रवाल विवाद
गहलोत ने सीएम भजनलाल से सीधा सवाल उठाया, “अनंता रिजॉर्ट को विशेष पैकेज दिए जाने में आपकी क्या भूमिका है, क्योंकि जिस निवेश बोर्ड के निर्णय के आधार पर यह पैकेज जारी हुआ, उसके अध्यक्ष आप ही हैं?”
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जांच मुख्यमंत्री के अधीन आने वाली एसीबी की बजाय केंद्रीय एजेंसी सीबीआई को क्यों नहीं सौंपी जा रही। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री के अधीन एजेंसी निष्पक्ष जांच नहीं कर सकती।
इससे पहले, एबीपी न्यूज़ के अनुसार, IAS शिखर अग्रवाल के 40 विला की संपत्ति विवाद पर गहलोत ने मुख्यमंत्री की संदिग्ध भूमिका पर सवाल उठाते हुए सीबीआई और ईडी जांच की मांग की थी।
सीएम भजनलाल के आरोप: 'गहलोत शासन राजनीतिक अस्थिरता का दौर रहा'
इस विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब सीएम भजनलाल शर्मा ने जोधपुर में भाजपा की पदयात्रा और रैली को संबोधित करते हुए गहलोत और कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में राजस्थान में राजनीतिक अस्थिरता और सत्ता संघर्ष का दौर रहा।
भजनलाल ने कहा, “गहलोत सरकार जनता की समस्याओं का समाधान करने के बजाय होटल तक सीमित रही।” उन्होंने कांग्रेस में कुर्सी के लिए संघर्ष का आरोप लगाते हुए कहा कि हाल की कांग्रेस रैली में गहलोत को मंच पर जगह तक नहीं मिली।
उन्होंने आरोप लगाया कि गहलोत के कार्यकाल में आरपीएससी की नियुक्तियों और पेपरलीक प्रकरणों में उनके PSO गिरफ्तार हुए। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन घोटाले में गहलोत सरकार के मंत्री और अधिकारी जेल गए।
भजनलाल ने कहा, “भ्रष्टाचार करने वाला कोई भी व्यक्ति कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे जवाबदेह होना पड़ेगा।”
राजनीतिक विश्लेषण: जवाबदेही और नैतिकता का प्रश्न
इस पूरे प्रकरण में सबसे गंभीर सवाल जवाबदेही का है। चाहे अनंता रिजॉर्ट को दिया गया विशेष पैकेज हो या IAS शिखर अग्रवाल की संपत्ति, दोनों मामलों में जांच की मांग लगातार जोर पकड़ रही है। दैनिक भास्कर के अनुसार, गहलोत ने इसे सरकार के तीन वर्षों का सबसे बड़ा घोटाला बताते हुए जांच की मांग की है।
लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की जवाबदेही जनता के सामने होनी चाहिए। जब आरोप लगते हैं तो उनका जवाब दस्तावेजों और तथ्यों से दिया जाना चाहिए, न कि कपोलकल्पित कहानियों से। यही भारतीय लोकतंत्र की मूल भावना है, जो हमारी सभ्यता के मूल्यों में निहित है।
मौजूदा राजनीतिक बयानबाजी में जनता के हित सबसे पीछे छूट रहे हैं। दोनों पक्षों को चाहिए कि वे आरोपों का जवाब तथ्यों से दें और जांच को पारदर्शी बनाएं।
आगे क्या?
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सीएम भजनलाल गहलोत की मांग पर 24 घंटे के भीतर कोई जवाब देते हैं या नहीं। यह टकराव राजस्थान की राजनीति में आगे भी गर्मी बनाए रखेगा, खासकर जब अनंता रिजॉर्ट और शिखर अग्रवाल मामलों की जांच को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं।
