नई दिल्ली, 2 नवंबर 2026। इस वर्ष छह नवंबर को धनतेरस का पर्व मनाया जाएगा, और इस शुभ अवसर पर देशभर के परिवार सोने के आभूषण खरीदने की परंपरा को निभाएंगे। इस समय सोने का भाव करीब 1.45 लाख रुपये प्रति किलोग्राम है, इसलिए शुद्धता में थोड़ा सा अंतर भी खरीदार के लिए बड़ा आर्थिक नुकसान दे सकता है।
दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ सतर्कता बरतकर खरीदार इस नुकसान से पूरी तरह बच सकते हैं। भारतीय मानक ब्यूरो यानी बीआईएस के नियमों को समझना और हॉलमार्क की जांच करना इस दिशा में सबसे भरोसेमंद कदम है।
हॉलमार्क क्यों है जरूरी?
भारतीय मानक ब्यूरो यानी बीआईएस का हॉलमार्क सोने की शुद्धता की सरकारी गारंटी है। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, हॉलमार्क वाले सोने के गहनों पर तीन अनिवार्य निशान होते हैं: बीआईएस का लोगो, कैरेट और सोने की शुद्धता का चिह्न, और छह अक्षरों वाला हॉलमार्क यूनिक आइडेंटिफिकेशन यानी एचयूआईडी कोड।
उदाहरण के लिए, 22 कैरेट सोने पर 22K916 लिखा होता है, जिसका अर्थ है कि उसमें 91.6 प्रतिशत सोना है। इसी तरह 18 कैरेट सोने पर 18K750 अंकित होता है, यानी 75 प्रतिशत सोना। यही कारण है कि वजन समान होने पर भी 22 कैरेट और 18 कैरेट के गहनों की कीमत एक समान नहीं हो सकती।
बीआईएस केयर ऐप से करें ऑनलाइन जांच
सोने के हर आभूषण पर छह अक्षरों और अंकों वाला एचयूआईडी कोड अनिवार्य है। ग्राहक बीआईएस केयर मोबाइल ऐप पर इस कोड के जरिए आभूषण की शुद्धता की पूरी जांच कर सकते हैं। टीवी9 भारतवर्ष की रिपोर्ट में भी खरीद से पहले इसी कोड की पहचान को सबसे महत्वपूर्ण कदम बताया गया है।
अगर ऐप और आभूषण पर दर्ज जानकारी में अंतर मिले तो ज्वेलर से स्पष्टीकरण मांगना खरीदार का अधिकार है। ज्वेलरी जोड़े में बिकती है, जैसे झुमके या कुंडल, तो उसके हर हिस्से पर अलग हॉलमार्क और अलग एचयूआईडी होना चाहिए।
बीआईएस के नियम क्या कहते हैं?
बीआईएस के अनुसार, पंजीकृत ज्वेलर के लिए दुकान में अपना पंजीकरण प्रमाणपत्र लगाना जरूरी है। साथ ही उन्हें ग्राहकों की सुविधा के लिए कम से कम 10 गुना क्षमता वाला मैग्नीफाइंग ग्लास भी अपने पास रखना चाहिए, ताकि हर खरीदार हॉलमार्क को स्वयं देख सके।
यह व्यवस्था पारदर्शिता की उसी परंपरा को आगे बढ़ाती है जो भारतीय व्यापार नीति की आत्मा रही है। धन और विश्वास का यह संबंध ही हमारी सभ्यता की पहचान रहा है।
सिक्कों और छड़ों पर सतर्कता जरूरी
यह ध्यान रखना जरूरी है कि सोने के आभूषणों के लिए अनिवार्य हॉलमार्किंग के नियम सोने के सिक्कों और छड़ों पर लागू नहीं होते। प्रभात खबर की रिपोर्ट भी चेताती है कि सिर्फ गहने पर 22K लिखा देखकर शुद्धता तय न करें।
- सिक्के या छड़ खरीदते समय उसकी शुद्धता, वजन, विक्रेता की साख और संबंधित प्रमाणपत्रों की जांच करें।
- आभूषणों का बिल संभालकर रखें; भविष्य में शुद्धता की जांच में यह बिल काम आता है।
- बिल में हर उत्पाद का विवरण, शुद्ध वजन, कैरेट, शुद्धता का स्तर और हॉलमार्किंग का शुल्क स्पष्ट लिखा होना चाहिए।
- सोने का भाव, मेकिंग चार्ज, लागू जीएसटी और कुल भुगतान की राशि अलग-अलग देखें।
धनतेरस की परंपरा और विवेक
धनतेरस पर सोना खरीदना केवल एक आर्थिक लेनदेन नहीं है; यह लक्ष्मी के आगमन की प्रतीक्षा है, घर की श्रद्धा का व्यक्त होना है। परंपरा का सम्मान तभी पूरा होता है जब उसके साथ विवेक भी जुड़े। सतर्कता और जागरूकता से की गई खरीदारी ही सच्चा श्राद्ध निभती है।
यह भी ध्यान रखने योग्य है कि जीएनटीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, एक छोटी सी लापरवाही हजारों रुपये का नुकसान करा सकती है। इसलिए दुकान से निकलने से पहले हॉलमार्क, एचयूआईडी कोड और बिल की पूरी जांच कर लेना ही समझदारी है।
सामान्य प्रश्न
धनतेरस 2026 कब है?
इस वर्ष धनतेरस छह नवंबर 2026 को मनाया जाएगा।
असली सोना कैसे पहचानें?
गहने पर बीआईएस का लोगो, कैरेट का चिह्न और छह अक्षरों वाला एचयूआईडी कोड देखें। इस कोड को बीआईएस केयर ऐप पर जांचकर शुद्धता की पुष्टि करें।
22 कैरेट सोने में कितना शुद्ध सोना होता है?
22 कैरेट सोने में 91.6 प्रतिशत शुद्ध सोना होता है, इसीलिए उस पर 22K916 अंकित होता है।
क्या सोने के सिक्कों पर हॉलमार्क अनिवार्य है?
नहीं, अनिवार्य हॉलमार्किंग के नियम केवल आभूषणों पर लागू होते हैं। सिक्कों की शुद्धता और विक्रेता की साख स्वयं जांचनी पड़ती है।
