पटना: बिहार सरकार ने नवंबर 2026 की शुरुआत में राज्य के हवाई परिवहन को नई दिशा देने की तैयारी पूरी कर ली है। सोनपुर और सुल्तानगंज में दो नए अंतरराष्ट्रीय ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनेंगे, जहां सिर्फ यात्री सेवा नहीं, बल्कि बड़े विमानों की मरम्मत और पायलट प्रशिक्षण की सुविधा भी विकसित होगी। यह जानकारी
इस योजना का उद्देश्य बिहार को यात्रिओं के आवागमन का मात्र केंद्र नहीं बनाना, बल्कि एविएशन सेक्टर से जुड़े तकनीकी कारोबार और शिक्षा का भी हब बनाना है। सरकार इस पूरे विजन को एक विशेष एविएशन नीति के जरिए अमल में लाने जा रही है, जिसका निर्माण कार्य परामर्शदात्री एजेंसी केपीएमजी को सौंपा गया है।
सोनपुर और सुल्तानगंज में क्या होगा खास
सोनपुर (सारण) और सुल्तानगंज, जिसे अजगैवीनाथ धाम के नाम से भी जाना जाता है, में प्रस्तावित इन दोनों ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट पर एमआरओ यानी मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल हब बनाया जाएगा। , यहां बड़े विमानों की तकनीकी जांच, मरम्मत और ओवरहॉल का पूरा काम हो सकेगा, जो अब तक मुख्यतः दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में केंद्रित है।
इसके साथ ही दोनों स्थलों पर फ्लाइट ट्रेनिंग ऑर्गेनाइजेशन यानी एफ्टिओ खोले जाएंगे। इन संस्थानों में युवाओं को पायलट बनने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह बात रोजगार की दृष्टि से विशेष महत्व रखती है, क्योंकि अब तक पायलट ट्रेनिंग के लिए बिहार के युवाओं को देश के दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता था।
एविएशन विजन पॉलिसी और केपीएमजी की भूमिका
बिहार सरकार इस योजना को ठोस आकार देने के लिए एक विशेष एविएशन नीति तैयार कर रही है। इसके लिए गुरुग्राम की कंसल्टेंसी एजेंसी केपीएमजी इंडिया सर्विसेज एलएलपी को सलाहकार नियुक्त किया गया है। इस कार्य के लिए एजेंसी को लगभग 90 लाख रुपए दिए जाएंगे, जिसमें करीब 86.17 लाख रुपए सेवा शुल्क और लागू कर सम्मिलित हैं।
केपीएमजी बिहार की भौगोलिक स्थिति और व्यापारिक संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए राज्य के लिए एक दीर्घकालिक विमानन रोडमैप तैयार करेगी। बिहार की स्थिति देखें तो यह राज्य पूर्वोत्तर भारत, नेपाल और पड़ोसी राज्यों को जोड़ने वाले मार्ग के मध्य में स्थित है, जो कार्गो और यात्री सेवा दोनों के लिए अनुकूल मानी जाती है।
छोटे शहरों को जोड़ेगी उड़ान योजना
सरकार का ध्यान केवल बड़े हवाई अड्डों पर नहीं है। केंद्र सरकार की उड़ान योजना के तहत राज्य के क्षेत्रीय हवाई अड्डों का भी विकास होगा। इनमें मुजफ्फरपुर का पताही, वीरपुर, वाल्मीकिनगर और सहरसा के एयरपोर्ट शामिल हैं। इन सभी जगहों पर रनवे और आवश्यक बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ किया जाएगा, ताकि छोटे कमर्शियल विमान सहजता से उतर सकें।
कि सोनपुर और अजगैवीनाथ धाम के प्रस्तावित एयरपोर्ट को बड़े विमानों के मेंटेनेंस हब के रूप में विकसित करने की योजना है, साथ ही पायलटों को प्रशिक्षण की सुविधा भी मिलेगी।
पर्यटन, तीर्थ और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
इन हवाई अड्डों के विकास से बिहार के पर्यटन को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। सुल्तानगंज स्वयं एक प्राचीन तीर्थ स्थल है, जहां गंगा के मध्य अजगैवीनाथ का मंदिर है। सोनपुर का हरिहर क्षेत्र प्रसिद्ध सोनपुर मेले के लिए जाना जाता है। वाल्मीकिनगर वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान के लिए प्रवेश द्वार है, जबकि मुजफ्फरपुर और सहरसा अपने सांस्कृतिक और व्यापारिक महत्व के कारण जाने जाते हैं।
हवाई सेवा से इन क्षेत्रों का जुड़ाव बढ़ने पर देश और विदेश से आने वाले यात्रियों की संख्या में वृद्धि होगी। इससे स्थानीय कारोबारियों, होटल व्यवसायियों और परिवहन से जुड़े लोगों को नए अवसर मिलेंगे। तीर्थ पर्यटन और आधुनिक विमानन का यह संगम बिहार की अर्थव्यवस्था के लिए एक संतुलित विकास का मॉडल बन सकता है।
हमारी सभ्यता में यात्रा को केवल आवागमन नहीं, बल्कि ज्ञान और संवाद का साधन माना गया है। जब गंगा तट के तीर्थ विश्व से जुड़ेंगे और वहीं युवा विमान की अच्छाई सीखेंगे, तो यह चित्र अपने आप में अनूठा होगा। एक ओर विरासत, दूसरी ओर आधुनिक कौशल।
रोजगार के नए द्वार
एमआरओ हब और फ्लाइट ट्रेनिंग संस्थानों के खुलने से बिहार में एविएशन से जुड़े तकनीकी कार्य बढ़ेंगे। विमान रखरखाव में इंजीनियरों, तकनीकी कर्मियों और सहायक स्टाफ की भारी मांग रहती है। पायलट प्रशिक्षण संस्थान ऐसे युवाओं के लिए मार्ग खोलेंगे जो महंगी विदेशी ट्रेनिंग का खर्च नहीं उठा पाते।
, ये दो नए एयरपोर्ट पूरे प्रदेश की हवाई यात्रा की तस्वीर बदलने की क्षमता रखते हैं, क्योंकि इन पर सिर्फ उड़ानें नहीं, बल्कि मरम्मत से लेकर प्रशिक्षण तक की समग्र सुविधा विकसित होगी।
आगे क्या
अभी ये योजनाएं प्रस्तावित चरण में हैं और केपीएमजी द्वारा तैयार रोडमैप के आने के बाद अमल शुरू होगा। एविएशन नीति का मसौदा तैयार होने के बाद जमीन अर्जन, रनवे निर्माण और एमआरओ सुविधाओं के ठेकों की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अगले कुछ वर्षों में बिहार यात्रा सेवा के साथ विमानन कारोबार, प्रशिक्षण और तकनीकी सेवाओं का एक मजबूत केंद्र बनने की दिशा में कदम बढ़ाएगा।
सामान्य प्रश्न
सुल्तानगंज और सोनपुर में किस तरह के एयरपोर्ट बनेंगे?
दोनों स्थानों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर के ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनेंगे, जिनमें यात्री सेवा के साथ एमआरओ हब और पायलट ट्रेनिंग संस्थान भी शामिल होंगे।
एमआरओ हब से बिहार को क्या लाभ होगा?
एमआरओ हब से बड़े विमानों की तकनीकी जांच, मरम्मत और रखरखाव बिहार में ही संभव होगा, जिससे तकनीकी रोजगार और निवेश के अवसर बढ़ेंगे।
एविएशन नीति किस एजेंसी तैयार कर रही है?
बिहार सरकार ने गुरुग्राम की केपीएमजी इंडिया सर्विसेज एलएलपी को लगभग 90 लाख रुपए में सलाहकार नियुक्त किया है, जो राज्य का विमानन रोडमैप तैयार करेगी।
उड़ान योजना से कौन से एयरपोर्ट विकसित होंगे?
केंद्र की उड़ान योजना के तहत मुजफ्फरपुर का पताही, वीरपुर, वाल्मीकिनगर और सहरसा के एयरपोर्ट के रनवे और बुनियादी सुविधाओं का विकास होगा।
