मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज ने 30 अक्टूबर 2026 को वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के नतीजे जारी किए, जिसमें कंपनी का समेकित शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 41 फीसदी उछलकर 25,548 करोड़ रुपये पहुंच गया। जुलाई से सितंबर की यह तिमाही तेल, केमिकल और डिजिटल कारोबार की मजबूत कामयाबी की गवाह बनी।
पिछले साल इसी अवधि में कंपनी का मुनाफा 18,165 करोड़ रुपये था। हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, तेल और केमिकल कारोबार (O2C) के साथ डिजिटल कारोबार के बेहतरीन प्रदर्शन ने इस इजाफे की नींव रखी। यह नतीजा उस समय आया है जब जियो प्लेटफॉर्म्स का शेयर बाजार में धमाकेदार दाखिला हुआ है, और इस लिस्टिंग के बाद यह उसकी पहली तिमाही के आंकड़े हैं।
रिलायंस की कमाई में कितनी तेजी आई?
सितंबर तिमाही में कंपनी का ऑपरेशन से रेवेन्यू 29 फीसदी बढ़कर 3.32 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल इसी अवधि में 2.58 लाख करोड़ रुपये था। जून तिमाही की तुलना में भी मुनाफा 27 फीसदी बढ़ा है; जून तिमाही में रिलायंस को 23,196 करोड़ रुपये का प्रॉफिट मिला था।
कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी ने कहा कि दुनिया भर में कारोबार से जुड़ी चुनौतियों और कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद रिलायंस के सभी कारोबारों ने अच्छा प्रदर्शन किया है। यह बात भारत की उस संस्कृति की याद दिलाती है जो कठिनाइयों में भी संतुलन और धैर्य का मार्ग अपनाती आई है।
तेल और केमिकल कारोबार सबसे आगे
O2C सेगमेंट ने इस तिमाही में सबसे शानदार प्रदर्शन किया। इसका EBITDA सालाना आधार पर 68 फीसदी बढ़कर 25,203 करोड़ रुपये पहुंच गया; पिछले साल यह 15,008 करोड़ रुपये था। इस कारोबार से कंपनी की कमाई 44 फीसदी बढ़कर 2.31 लाख करोड़ रुपये हो गई।
कंपनी के मुताबिक, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, पेट्रोल-डीजल की बेहतर कीमतों और केमिकल कारोबार में सुधार ने फायदा दिया। मिडिल ईस्ट और रूस में सप्लाई से जुड़ी दिक्कतों के कारण दुनियाभर में रिफाइनिंग मार्जिन बेहतर हुआ। पेट्रोकेमिकल कारोबार में भी सुधार दिखा।
जियो प्लेटफॉर्म्स का शानदार दाखिला
डिजिटल कारोबार जियो प्लेटफॉर्म्स का मुनाफा 14 फीसदी बढ़कर 8,387 करोड़ रुपये हो गया; पिछले साल यह 7,379 करोड़ रुपये था। जियो का रेवेन्यू 11.4 फीसदी बढ़कर 40,475 करोड़ रुपये पहुंचा। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, जियो की शानदार लिस्टिंग के तुरंत बाद आए ये नतीजे विश्लेषकों के अनुमानों से बेहतर रहे।
इस दौरान जियो ने 91 लाख नए ग्राहक जोड़े, जिससे उसके कुल ग्राहक 54.24 करोड़ हो गए। हर ग्राहक से औसत मासिक रेवेन्यू (ARPU) बढ़कर 218.8 रुपये हुआ, जो जून तिमाही में 215.6 रुपये था। जियो के 5G ग्राहक 30 करोड़ के पार पहुंच चुके हैं।
जियो की लिस्टिंग के असर से कॉर्पोरेट भारत में बड़ा बदलाव दिखा है। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जियो की धमाकेदार एंट्री के साथ रिलायंस समूह टाटा ग्रुप को पीछे छोड़कर देश का सबसे बड़ा कारोबारी घराना बन गया। यह क्षण भारतीय उद्यमशक्ति की उस आत्मनिर्भर यात्रा का प्रतीक है जिसका स्वप्न देश ने दशकों से देखा है।
ऑयल और गैस कारोबार में थोड़ी कमजोरी
सभी सेगमेंट की कामयाबी के बीच ऑयल और गैस कारोबार इस बार थोड़ा पीछे रहा। इसका EBITDA 2 फीसदी घटकर 4,901 करोड़ रुपये रहा; पिछले साल यह 5,002 करोड़ रुपये था। कंपनी के मुताबिक, KG-D6 गैस फील्ड से उत्पादन घटने और गैस की कीमतों में गिरावट से असर पड़ा। हालांकि, कोल-बेड मीथेन के उत्पादन में बढ़ोतरी रही।
JioStar का मिश्रित प्रदर्शन
मीडिया और एंटरटेनमेंट कारोबार JioStar का रेवेन्यू 10 फीसदी बढ़कर 6,806 करोड़ रुपये हुआ, लेकिन मुनाफा 13 फीसदी घटकर 1,147 करोड़ रुपये रह गया। जियोहॉटस्टार के हर महीने एक्टिव यूजर्स की औसत संख्या करीब 44 करोड़ रही। कंपनी ने सिंगापुर, ब्रिटेन और कनाडा में भी अपनी स्ट्रीमिंग सेवा का विस्तार किया, जो भारतीय मनोरंजन की सीमाओं को विदेशों तक ले जाने का संकेत है।
कर्ज कम, निवेश जारी
रिलायंस ने इस तिमाही में अपना नेट कर्ज भी घटाया है। सितंबर के आखिर में नेट कर्ज 1.17 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि जून के आखिर में यह 1.22 लाख करोड़ रुपये था। कंपनी ने इस तिमाही में 38,153 करोड़ रुपये का पूंजी निवेश किया, जो तेल-केमिकल कारोबार, नई ऊर्जा परियोजनाओं और उपभोक्ता कारोबार के विस्तार पर खर्च हुआ।
यह संतुलित तस्वीर बताती है कि रिलायंस ने केवल मुनाफे की दौड़ में ही नहीं, बल्कि दीर्घकालिक नींव पर भी काम किया है। नई ऊर्जा परियोजनाओं पर खर्च उस भविष्य की तैयारी है जिसमें ऊर्जा स्वावलंबन राष्ट्र की प्रगति का आधार बनेगा।
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए इसका मतलब
रिलायंस के ये नतीजे किसी एक कंपनी की कामयाबी नहीं हैं; ये भारतीय अर्थव्यवस्था की बढ़ती मजबूती का दृष्टांत हैं। जब देश का कोई उद्यम वैश्विक चुनौतियों के बीच स्थिरता और विकास दोनों दिखाता है, तो उसका लाभ पूरे राष्ट्र को मिलता है: रोजगार, निवेश और आत्मविश्वास।
बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट में भी मुनाफे में 41 फीसदी की बढ़ोतरी और तेल व डिजिटल कारोबार की तेजी को कंपनी की इस तिमाही की केंद्रीय कहानी बताया गया है। शेयर बाजार की नजर अब आगे की तिमाहियों पर टिकी है, खासकर जियो की लिस्टिंग के बाद बने इस उत्साह को लंबे समय तक कायम रखने की चुनौती पर।
आगे क्या?
रिलायंस की अगली तिमाही के नतीजे यह बताएंगे कि O2C कारोबार की यह तेजी टिकाऊ है या अस्थायी। साथ ही, नई ऊर्जा परियोजनाओं पर हो रहा निवेश आने वाले वर्षों में कंपनी की दिशा तय करेगा। अभी के आंकड़े कहते हैं कि भारत का उद्यम जाति आंख उठाकर आगे देख रहा है।
सामान्य प्रश्न
रिलायंस का सितंबर 2026 तिमाही में कितना मुनाफा हुआ?
रिलायंस इंडस्ट्रीज का समेकित शुद्ध मुनाफा 41 फीसदी बढ़कर 25,548 करोड़ रुपये हुआ, जो पिछले साल की समान तिमाही में 18,165 करोड़ रुपये था।
जियो प्लेटफॉर्म्स का प्रदर्शन कैसा रहा?
जियो का मुनाफा 14 फीसदी बढ़कर 8,387 करोड़ रुपये और रेवेन्यू 11.4 फीसदी बढ़कर 40,475 करोड़ रुपये हुआ। कंपनी ने 91 लाख नए ग्राहक जोड़े और कुल ग्राहक संख्या 54.24 करोड़ पहुंच गई।
रिलायंस का कौन सा कारोबार सबसे मजबूत रहा?
तेल और केमिकल कारोबार (O2C) सबसे आगे रहा, जिसका EBITDA 68 फीसदी बढ़कर 25,203 करोड़ रुपये हुआ।
