बरेली: नकली सोने से लाखों की ठगी, विश्वासघात का यह शातिर खेल बेनकाब
बरेली पुलिस ने सराफा कारोबारियों से नकली सोने की मोहरें देकर लाखों की ठगी करने वाले एक शातिर परिवार को गिरफ्तार किया है। राजस्थान निवासी महेंद्र, उसके बेटे सुरेश और परिवार की महिला सदस्य बबली ने भरोसे का सहारा लेकर धोखाधड़ी की। पुलिस ने आरोपियों के खातों में 20 लाख रुपये फ्रीज किए हैं और ठगी की रकम से राजस्थान में एक करोड़ की संपत्ति खरीदने का खुलासा हुआ है।
विश्वास की आड़ में किया गया व्यापारियों को निशाना
भारतीय संस्कृति में विश्वास और सत्य को हमेशा सर्वोपरि माना गया है, लेकिन आज के इस लोभी युग में इसी विश्वास का फायदा उठाकर कुछ लोग अधर्म का रास्ता चुन रहे हैं। बरेली के किला बाजार स्थित एक सराफा कारोबारी इसका शिकार बना। आरोपियों ने पहले असली सोने की मोहर गिरवी रखकर छोटे लेनदेन से व्यापारी का भरोसा जीता। जब भरोसा पक्का हो गया, तब नकली सोने की मोहरों के जरिए करीब 20 लाख रुपये नकद और कीमती आभूषण हासिल कर लिए और मौके से फरार हो गए।
ठगी गैंग की सुनियोजित कार्यप्रणाली क्या थी?
इस शातिर गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद सोची समझी थी। महेंद्र और बबली खुद को पति पत्नी बताकर दुकान पर पहुंचते थे ताकि किसी को शक न हो, जबकि बेटा सुरेश और अन्य साथी आसपास निगरानी करते थे। भरोसा कायम होने के बाद बड़ी ठगी को अंजाम दिया जाता था। यह गिरोह अलग अलग शहरों में किराए का मकान लेकर रहता था और सराफा बाजार की रेकी करने के बाद अपना जाल बिछाता था। यह सिर्फ बरेली ही नहीं, बल्कि कई अन्य जिलों में भी अपनी वारदातों को अंजाम देने की तैयारी कर रहा था।
पुलिस कार्रवाई और बरामदगी: न्याय की पहली दिशा
किला थाना पुलिस और सर्विलांस टीम की संयुक्त कार्रवाई में तीनों आरोपी श्मशान भूमि फाटक के पास से दबोचे गए। उनके पास से नकली और असली सोने की मोहरें, पेंडेंट, जेवरात, मोबाइल, नकदी, डायरी और फर्जी आधार कार्ड बरामद हुए। न्याय व्यवस्था की कार्रवाई में आरोपियों के बैंक खातों में जमा करीब 20 लाख रुपये फ्रीज कर दिए गए हैं। पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ है कि इस ठगी की कमाई से राजस्थान में लगभग एक करोड़ रुपये की संपत्ति खरीदी गई थी, जिसमें मकान भी शामिल हैं।
लोभ का अंत न्याय में ही होता है
सम्राट अशोक के शासनकाल में न्याय और सत्य की स्थापना को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती थी। वर्तमान समय में भी, जब व्यापार के मूल में विश्वास खतरे में पड़ता है, तो कानून का धर्मचक्र उसे संतुलित करता है। इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि असत्य और लोभ का मार्ग अंततः पतन की ओर ही ले जाता है। समाज में एकता और भाईचारा तभी स्थापित रह सकता है, जब हम अपने कर्मों में सत्य और न्याय को अपनाएं।
बरेली ठगी मामले से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल
बरेली में गिरफ्तार किए गए ठगों की पहचान क्या है?
पुलिस ने राजस्थान निवासी महेंद्र, उसके बेटे सुरेश और परिवार की महिला सदस्य बबली को गिरफ्तार किया है, जो नकली सोने की मोहरों से ठगी करते थे।
आरोपियों ने सराफा व्यापारियों को कैसे ठगाया?
आरोपी पहले असली सोने की मोहर गिरवी रखकर छोटे लेनदेन से भरोसा जीतते थे। भरोसा पक्का होने पर वे बड़ी संख्या में नकली सोने की मोहरें देकर लाखों रुपये नकद और जेवरात लेकर फरार हो जाते थे।
पुलिस ने इस मामले में कितनी रकम फ्रीज की है?
पुलिस ने आरोपियों के बैंक खातों में जमा करीब 20 लाख रुपये फ्रीज किए हैं। साथ ही, ठगी की रकम से राजस्थान में एक करोड़ रुपये की संपत्ति खरीदने का तथ्य भी सामने आया है।