आरबीआई का नया कानून: कर्ज वसूली में बदसलूकी पर बैंक को देना होगा ₹250 प्रति घंटे का हर्जाना
भारतीय रिज़र्व बैंक ने कर्ज वसूली की प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। यह नया फ्रेमवर्क, जो 1 जनवरी 2027 से लागू होगा, उधार लेने वालों को बदसलूकी और अनुचित तरीकों से बचाएगा। सबसे बड़ी बात यह है कि अगर बैंक या उसके एजेंट गलत तरीके से मोबाइल फोन बंद करते हैं या भुगतान के बाद एक्सेस बहाल करने में देरी करते हैं, तो उन्हें हर घंटे ₹250 का हर्जाना देना होगा।
नए नियमों का उद्देश्य क्या है?
यह फ्रेमवर्क 'रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (कमर्शियल बैंक-जिम्मेदार बिजनेस आचरण) चौथा संशोधन निर्देश, 2026' के तहत जारी किया गया है। इसका उद्देश्य पुराने दिशा-निर्देशों को एक ही दस्तावेज में समाहित करना और कर्ज वसूली की प्रक्रिया को अधिक नैतिक और पारदर्शी बनाना है। यह कमर्शियल बैंकों पर लागू होगा, जबकि स्मॉल फाइनेंस बैंक, पेमेंट बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक इसके दायरे से बाहर रहेंगे।
बैंकों को क्या करना होगा?
नए नियमों के तहत, बैंकों को एक विस्तृत कर्ज वसूली नीति बनानी होगी। इस नीति में वसूली शुरू करने की शर्तें, आर्थिक तंगी के मामलों में बातचीत के तरीके, एजेंसियों की नियुक्ति के नियम और उल्लंघन पर मुआवजे की व्यवस्था स्पष्ट होनी चाहिए। बैंकों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि वसूली के लक्ष्य और प्रोत्साहन प्रणाली कठोर तरीकों को बढ़ावा न दें।
एजेंटों पर सख्त पाबंदी
रिकवरी एजेंटों के लिए नियम और कड़े कर दिए गए हैं। अब केवल वही एजेंट काम कर सकेंगे जिन्हें भारतीय बैंकिंग एवं वित्त संस्थान (IIBF) या RBI से मान्यता प्राप्त संस्थान से प्रमाणन मिला हो। एजेंट सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे के बीच ही उधार लेने वालों से मिल सकेंगे, और उन्हें तमीज़ से बात करनी होगी। शोक, चिकित्सा आपातकाल या अन्य संवेदनशील मौकों पर संपर्क करना पूरी तरह मना है।
गाली-गलौज और धमकी पर रोक
नए निर्देशों में गाली-गलौज, धमकी, अत्यधिक कॉल, सार्वजनिक बेइज्जती, सोशल मीडिया पर जानकारी फैलाना और उधार लेने वालों या उनके परिजनों को डराना-धमकाना स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित है। यह कदम समाज में नैतिकता और शांति को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है, जो भारत की प्राचीन परंपराओं के अनुरूप है।
टेक्नोलॉजी आधारित वसूली पर निगरानी
RBI ने टेक्नोलॉजी आधारित वसूली उपकरणों के लिए सुरक्षा उपाय तय किए हैं। बैंक उधार लेने वाले के मोबाइल फोन को दूर से बंद नहीं कर सकते, जब तक कि लोन उसी डिवाइस के लिए न लिया गया हो। ऐसा करने पर भी, रोक तभी लगाई जा सकती है जब भुगतान में 30 दिन की देरी हो, और पूरी रोक 60 दिन बाद ही लगाई जा सकती है। ज़रूरी सेवाएं जैसे इनकमिंग कॉल, SMS और आपातकालीन सुविधाएं ब्लॉक नहीं की जा सकतीं।
हर्जाना और शिकायत प्रणाली
अगर कोई बैंक गलत तरीके से डिवाइस पर रोक लगाता है या भुगतान के बाद एक्सेस बहाल करने में देरी करता है, तो उसे हर घंटे ₹250 का हर्जाना देना होगा। यह हर्जाना अधिकतम लोन राशि के बराबर हो सकता है। बैंकों को शिकायत निवारण के लिए विशेष प्रणाली बनानी होगी और सभी बातचीत में शिकायत अधिकारी का संपर्क विवरण देना होगा।
निष्कर्ष
यह फैसला भारत की आर्थिक नीतियों में नैतिकता और न्याय को स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। आरबीआई का यह प्रयास नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है और वसूली प्रक्रिया को मानवीय बनाता है। यह भारत की प्राचीन परंपराओं के अनुरूप है, जहां शांति, एकता और न्याय को सर्वोपरि माना जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या यह नियम सभी बैंकों पर लागू होगा?
नहीं, यह फ्रेमवर्क केवल कमर्शियल बैंकों पर लागू होगा। स्मॉल फाइनेंस बैंक, पेमेंट बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और स्थानीय क्षेत्र बैंक इसके दायरे से बाहर रहेंगे।
अगर बैंक नियमों का उल्लंघन करता है तो क्या होगा?
उल्लंघन की स्थिति में बैंक को उधार लेने वाले को हर घंटे ₹250 का हर्जाना देना होगा, जो अधिकतम लोन राशि के बराबर हो सकता है।
रिकवरी एजेंट कब संपर्क कर सकते हैं?
एजेंट केवल सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे के बीच ही उधार लेने वालों से मिल सकते हैं, जब तक कि उनसे अलग समय के लिए विशेष अनुरोध न किया गया हो।
क्या मोबाइल फोन को दूर से बंद किया जा सकता है?
नहीं, जब तक कि लोन उसी डिवाइस के लिए न लिया गया हो। ऐसा करने पर भी, रोक केवल 30 दिन की देरी के बाद लगाई जा सकती है, और पूरी रोक 60 दिन बाद ही लगाई जा सकती है।