यूपी में बिजली संकट: 1912 हेल्पलाइन पर सात महीने में शिकायतें चार गुना बढ़ीं
उत्तर प्रदेश में बिजली आपूर्ति को लेकर सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मिले आंकड़ों के अनुसार, राज्य की टोल-फ्री हेल्पलाइन '1912' पर बिजली से जुड़ी शिकायतें दिसंबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच लगभग चार गुना बढ़ गई हैं। इनमें से 70 प्रतिशत से अधिक शिकायतें बिजली कटने और खराब आपूर्ति से जुड़ी हैं।
यह आंकड़े उस समय सामने आए हैं जब प्रदेश सरकार बिजली व्यवस्था में सुधार का दावा कर रही है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि शिकायतों में यह बढ़ोतरी आंशिक रूप से हेल्पलाइन को पूरे प्रदेश में सुलभ बनाए जाने के कारण भी हुई है। एक जनवरी 2026 से यह सेवा सभी जिलों में शुरू की गई थी।
क्या कहते हैं आरटीआई में मिले आंकड़े?
उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) द्वारा आरटीआई के तहत दी गई जानकारी के मुताबिक, दिसंबर 2025 में हेल्पलाइन पर 5,62,177 शिकायतें दर्ज की गई थीं। यह संख्या जुलाई 2026 में बढ़कर 20,17,302 हो गई। इस दौरान शिकायतों का ग्राफ साढ़े तीन गुना से अधिक बढ़ा है।
मध्यांचल विद्युत वितरण निगम में एक कैलेंडर वर्ष में कुल 12,61,032 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से 40 प्रतिशत अकेले लखनऊ जिले से थीं। लखनऊ में उपभोक्ताओं की संख्या 15 लाख है, यानी हर तीसरे उपभोक्ता ने किसी न किसी समस्या की शिकायत दर्ज कराई।
मई 2026 में सबसे ज्यादा शिकायतें
शिकायतों की संख्या में सबसे अधिक बढ़ोतरी मई 2026 में देखी गई, जब 18 लाख शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें से 70 प्रतिशत से अधिक बिजली आपूर्ति से जुड़ी थीं। मार्च 2026 में आठ लाख उपभोक्ताओं ने अपनी समस्याएं हेल्पलाइन पर बताई थीं।
हालांकि, हेल्पलाइन पर शिकायत करने के कुछ सकारात्मक उदाहरण भी सामने आए हैं। वृंदावन कॉलोनी के मनोज चौहान ने बताया कि उनके घर में केबल खराब होने के कारण बिजली नहीं आ रही थी, हेल्पलाइन पर शिकायत करने के 20-25 मिनट में ही स्टाफ मौके पर पहुंच गया। इसी तरह गोमती नगर के अशोक को बिल न मिलने पर शिकायत करने के बाद अगले दिन मोबाइल पर बिल मिल गया।
हेल्पलाइन का केंद्रीकरण और सुधार के प्रयास
यूपीपीसीएल ने लखनऊ और नोएडा में 1912 हेल्पलाइन सेंटर को केंद्रीकृत करके एक जनवरी 2026 को खोला था। शुरुआत में शिकायतों के निस्तारण की गति धीमी थी, लेकिन निगरानी बढ़ाने और अभियंताओं की जवाबदेही तय करने के बाद इसमें तेजी आई है।
मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के निदेशक (वाणिज्य) रजत जुनेजा के अनुसार, पहले प्रतिदिन 50 से 60 हजार शिकायतें आती थीं, जो अब बढ़कर 90 हजार तक पहुंच गई हैं। इस पूरी व्यवस्था पर सालाना छह करोड़ 25 लाख रुपये का खर्च आता है, जबकि लाभ लगभग साढ़े तीन करोड़ उपभोक्ताओं को मिल रहा है।
आगे की राह
बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता सुधारना और उपभोक्ताओं की समस्याओं का समय पर समाधान करना प्रदेश की प्राथमिकता होनी चाहिए। हेल्पलाइन पर बढ़ती शिकायतें एक ओर जहां व्यवस्था में खामियों को उजागर करती हैं, वहीं दूसरी ओर यह भी दर्शाती हैं कि उपभोक्ता अब अपनी समस्याओं को लेकर जागरूक हुए हैं। यह जागरूकता ही एक सशक्त लोकतंत्र की नींव है, जहां हर नागरिक की आवाज सुनी जाती है।
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