कानपुर के रेउना गांव में साइबर ठगी का अड्डा: 20 आरोपियों पर 750 पेज की चार्जशीट
आदित्य वर्मा | 6 जुलाई 2026
कानपुर के घाटमपुर क्षेत्र में साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई में, पुलिस ने 20 आरोपियों के खिलाफ 750 पेज की चार्जशीट दाखिल की है। यह गिरोह सीबीआई, क्राइम ब्रांच और पुलिस अधिकारी बनकर लोगों को ठगता था। पिछले चार सालों में इसने 500 से अधिक लोगों को अपना शिकार बनाया और करोड़ों रुपये की ठगी की।
कैसे पकड़ा गया यह गिरोह?
सात अप्रैल 2026 को रेउना गांव में एक फिल्मी अंदाज में छापेमारी हुई। 70 गाड़ियों और 230 से अधिक पुलिसकर्मियों ने ड्रोन की मदद से गांव की घेराबंदी की। लाउडहेलर पर चेतावनी देते हुए पुलिस ने 20 अंतरराज्यीय साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया।
गिरोह का सरगना और उसका तरीका
इस गिरोह का सरगना शैलेंद्र है। वह तमिलनाडु के एन्नोर में काम करने के दौरान एक ठग गिरोह के संपर्क में आया था। वहां से साइबर ठगी के तरीके सीखकर वह अपने गांव लौटा और यहां 'ठगी की पाठशाला' खोल दी। कुछ ही सालों में रेउना गांव झारखंड के जामताड़ा की तरह ठगी का केंद्र बन गया था।
पुलिस को क्यों हुआ संदेह?
थाना प्रभारी अनुज कुमार ने बताया कि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो और प्रतिबिंब पोर्टल पर प्रदेशभर से साइबर ठगी की कई शिकायतें आईं। जांच में पता चला कि ठगी में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर रेउना गांव में सक्रिय थे। इसके बाद एडीसीपी एसओजी सुमित सुधाकर रामटेके के नेतृत्व में यह कार्रवाई की गई।
गिरफ्तारी के दौरान विरोध और फरार आरोपी
गिरफ्तारी के दौरान गांव की महिलाओं ने पुलिस पर पथराव किया, जिससे 17 अन्य साइबर अपराधी जंगल के रास्ते भाग निकले। पुलिस अब इन फरार आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट लेने की प्रक्रिया में है। इनमें विजय, भोला, मधुर, दीपू उर्फ दारोगा, टाइगर उर्फ जितेंद्र, सोहित, खुशवंती, प्रद्युमन, सोभन, पंकज, अनिरुद्ध सिंह, अशोक, सर्वेश, दीपक और दिलीप सिंह शामिल हैं।
कैसे करते थे ठगी?
जांच में सामने आया कि यह गिरोह पीएम आवास दिलाने, ऑनलाइन गेम और अश्लील वीडियो देखने के बहाने लोगों को फंसाता था। फिर वे क्राइम ब्रांच, पुलिस अधिकारी या सीबीआई अधिकारी बनकर लोगों को डराते और ठगी करते थे। गिरोह के 40 म्यूल बैंक खातों में करीब सवा करोड़ रुपये का लेन-देन पाया गया।
चार्जशीट में क्या है?
750 पेज की इस चार्जशीट में 30 शिकायतकर्ताओं और पांच से अधिक पुलिसकर्मियों को गवाह बनाया गया है। यह मामला भारतीय न्याय संहिता और साइबर कानूनों के तहत दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही फरार आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट ले लिए जाएंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या यह गिरोह पूरे देश में सक्रिय था?
हां, इस गिरोह ने चार सालों में 500 से अधिक लोगों को ठगा, जो विभिन्न राज्यों से थे। पुलिस को प्रदेशभर से शिकायतें मिली थीं।
क्या पुलिस ने सभी आरोपियों को पकड़ लिया है?
नहीं, 20 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 17 अन्य फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश कर रही है और गैर जमानती वारंट जारी करने की प्रक्रिया में है।
लोग इस तरह की ठगी से कैसे बच सकते हैं?
लोगों को किसी भी अनजान कॉल या संदेश पर तुरंत विश्वास नहीं करना चाहिए। सरकारी अधिकारी बनकर फोन करने वालों से सावधान रहें और किसी भी व्यक्तिगत जानकारी या पैसे की मांग पर तुरंत पुलिस को सूचित करें।
फोटो: दैनिक जागरण (Dainik Jagran)