एक शिक्षक, 266 बच्चे: सुपौल के संस्कृत विद्यालय में शिक्षा का संकट
बिहार के सुपौल जिले के प्रतापगंज प्रखंड में स्थित किशोरी प्राथमिक सह मध्य संस्कृत विद्यालय, तेकुना की दयनीय स्थिति ने एक बार फिर सरकारी शिक्षा व्यवस्था की असल तस्वीर सामने रख दी है। वर्ष 1978 में स्थापित इस विद्यालय में कक्षा एक से आठवीं तक 266 बच्चे नामांकित हैं, लेकिन एक भी स्थायी शिक्षक नहीं है। यह संकट हमारी प्राचीन शिक्षा परंपरा और आधुनिक प्रशासन के बीच की खाई को दर्शाता है।
एक शिक्षक पर पूरे विद्यालय का बोझ
2022 में स्थायी प्रधान शिक्षक के सेवानिवृत्त होने के बाद से यहां व्यवस्था चरमरा गई। वर्तमान में प्रभारी प्रधान शिक्षक अभय कुमार अरुण, जो दूसरे पंचायत के संस्कृत स्कूल से प्रतिनियुक्ति पर आए हैं, अकेले ही पूरे विद्यालय का संचालन कर रहे हैं। प्रतिदिन औसतन 140 से 150 बच्चों की उपस्थिति के बीच,