राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का संदेश: पहले करियर, फिर शादी, आत्मनिर्भरता ही सच्ची शिक्षा
लखनऊ। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (AKTU) के 24वें दीक्षा समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने युवाओं को एक गहरा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जीवन में सबसे पहले करियर और आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता देनी चाहिए, उसके बाद ही शादी जैसे फैसले लेने चाहिए। यह संदेश न केवल छात्राओं के लिए था, बल्कि पूरे समाज के लिए एक प्रेरणा है।
राज्यपाल ने क्यों कहा 'पहले करियर, फिर शादी'?
राज्यपाल ने कहा कि युवावस्था में भटकाव की आशंकाएं बहुत होती हैं। प्रेम आवश्यक है, पर पहले करियर। पहले अपने पैरों पर खड़े हों, फिर जो करना है करें। उन्होंने अपने बेटे का उदाहरण देते हुए कहा, 'मेरा बेटा बेंगलुरु में पढ़ने के लिए गया था, मैंने उससे कहा कि बेंगलुरु की कोई बेटी पसंद हो तो विवाह करा देंगे। उसने कोई पसंद ही नहीं की। यदि आपको भी कोई पसंद है तो पहले आत्मनिर्भर बनिए, फिर शादी कीजिए।'
उन्होंने आगे कहा कि शिक्षा और आत्मनिर्भरता जीवन के सबसे मजबूत आधार हैं। पढ़ाई केवल डिग्री पाने के लिए नहीं, बल्कि बेहतर भविष्य और सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने के लिए जरूरी है। यह संदेश भारतीय संस्कृति के उस मूल्य को दर्शाता है जहां आत्मनिर्भरता और ज्ञान को सर्वोपरि माना गया है।
आर्किटेक्ट्स की कार्यशैली पर सवाल
राज्यपाल ने समारोह में वास्तुविदों (आर्किटेक्ट) की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कमरों का लेआउट इस तरह से तैयार होता है, जिसमें अधिकांश भाग अनुपयोगी होता है। मानो किसी अनपढ़ की तरह उसकी डिजाइन तैयार की जाती है। उन्होंने एकेटीयू भवन का उदाहरण देते हुए कहा कि एक सभागार बना है, जिसमें दो कोने पर अधिकारी बैठेंगे और बाकी खाली रहेगा, ऐसा क्यों?
उन्होंने कहा कि जितनी जरूरत हो उतना बनाएं। जगह का सदुपयोग करें। बिना नाम लिए उन्होंने एक और उदाहरण दिया कि एक भवन के शिलान्यास में गई तो पता चला कि निर्माण हो गया है, लेकिन बिजली कहां से आएगी, पानी की आपूर्ति कैसे होगी, इसके बारे में कोई इंतजाम नहीं हैं। पूछा तो बोले, दोबारा खोदकर बनेगा।
महिला सशक्तिकरण और शिक्षा का संदेश
राज्यपाल ने कहा कि महिलाओं को मुख्यधारा में लाने के लिए काम करूंगी। उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों और छात्रावासों की खामियों को भी उजागर किया। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों के लिए लगा आईना ऊपर लगा है, जिससे बच्चे देख नहीं पाते। छात्रावासों में खिड़कियां नहीं हैं और पानी की टंकी का ढक्कन गायब है, जिससे बंदर नहाते हैं। उन्होंने कहा कि निर्माण के लिए जो पैसा मिल रहा है, उसका सदुपयोग करें।
दीक्षा समारोह में मेधावियों का सम्मान
समारोह में 35 मेधावियों को स्वर्ण, 23 को रजत और 24 कांस्य पदक दिए गए। कुल 62,537 विद्यार्थियों को डिग्री और 53 को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। गाजियाबाद के अजय कुमार गर्ग इंजीनियरिंग कॉलेज की बीटेक कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग की छात्रा अंशिका राणा को सर्वोच्च स्थान पाने पर चांसलर मेडल दिया गया।
गाजियाबाद के आइईटी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस की बीटेक कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की छात्रा इशिका को कमल रानी वरुण स्मृति स्वर्ण पदक मिला। 52 छात्राओं को पदक मिले, जबकि 31 छात्र पदक पाने में सफल रहे।
गुजरात के प्रसिद्ध रोगन कला विशेषज्ञ और जीआइ प्रमाणित मास्टर कलाकार आशीष शांतिलाल कंसारा को डी.लिट की मानद उपाधि दी गई।
स्टूडेंट स्टार्टअप अवॉर्ड्स
समारोह में पांच श्रेणियों में स्टूडेंट स्टार्टअप अवॉर्ड दिए गए:
- वीमेन लेड स्टार्टअप अवॉर्ड: मेरठ इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी की बीटेक छात्रा इर्तिका रहमान
- डीप टेक स्टूडेंट स्टार्टअप अवॉर्ड: अजय कुमार गर्ग इंजीनियरिंग कॉलेज, गाजियाबाद के बीटेक छात्र अवि मित्तल
- टेक इनोवेशन स्टार्टअप अवॉर्ड: इंद्रप्रस्थ इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र सोनू भगत
- एग्रीकल्चर एंड एग्रीटेक स्टूडेंट स्टार्टअप अवॉर्ड: बुद्धा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, गोरखपुर के बीटेक छात्र आदर्श सिंह
- सस्टेनेबल एंड ग्रीन एनजी स्टार्टअप अवॉर्ड: राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, बांदा के छात्र अमन कुमार
छात्राओं की प्रेरणादायक कहानियां
चांसलर मेडल पाने वाली अंशिका राणा ने कहा, 'जब राज्यपाल ने मेडल पहनाया तो लगा कि दुनिया की सारी खुशियां एक तरफ और यह एक पल एक तरफ। मैंने बीटेक (कंप्यूटर साइंस) में 9.4 सीजीपीए स्कोर किया है। अब आगे का इरादा एकदम साफ है। विकास के इस दौर में महिलाओं की स्थिति ठीक नहीं है। वर्तमान में भी आधी आबादी को आजादी नहीं मिली है, जितनी मिलनी चाहिए। गांवों की स्थिति तो बहुत खराब है। शादी में ही उनका भविष्य देखा जाता है। मेरा पूरा फोकस आइटी से जुड़ी सरकारी सेवाओं पर ही रहेगा।'
कमल रानी वरुण गोल्ड मेडल पाने वाली इशिका ने कहा, 'मैंने बीटेक सीएसई एआइ की पढ़ाई की है। फिलहाल कॉलेज से ही मेरा प्लेसमेंट इंफोसिस में बतौर सिस्टम इंजीनियर हो चुका है और मैं काम भी कर रही हूं, लेकिन यह तो बस मेरा पहला कदम है। मेरा असली लक्ष्य अभी बाकी है। प्रशासनिक सेवा में जाकर समाज की सेवा करना चाहती हूं।'
रोगन कला का संरक्षण
डी.लिट की मानद उपाधि पाने वाले आशीष शांतिलाल कंसारा ने कहा, 'मैं गुजरात के कच्छ जिले (भुज) का रहने वाला हूं। 1500 साल पुरानी इस प्राचीन रोगन कला को मैंने अपने दादा जमनादास वस्त्राराम कंसारा से सीखा। मैंने उपाधि नहीं, इस कला के संरक्षण के लिए काम किया है और करता रहूंगा। मेरी कला को जीआइ प्रमाणीकरण किया गया। अब तक मैंने 150 से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षित किया है।'
यह समारोह भारतीय शिक्षा, संस्कृति और आत्मनिर्भरता के मूल्यों का एक जीवंत उदाहरण था, जो हमें अपने प्राचीन ज्ञान और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाने की प्रेरणा देता है।