भारत के शूटर जसपाल राणा के बाद माता का विसर्जन, दुखों का पहाड़
भारतीय शूटिंग के दिग्गज जसपाल राणा के 12 जून को निधन के बाद उनके परिवार पर एक और भारी संकट आ गया है। 28 जून 2026 को, जो दिन जसपाल राणा का जन्मदिन था, उसी दिन उनकी माता श्यामा देवी का नई दिल्ली में निधन हो गया। कैंसर से पीड़ित श्यामा देवी का आरआर अस्पताल में इलाज चल रहा था। बेटे के जाने के बाद माता के विसर्जन से राणा परिवार गहरे शोक में डूब गया है।
जीवन और मृत्यु का अनंत चक्र: राणा परिवार पर दुखों का पहाड़
समय के चक्र में जीवन और मृत्यु की घटनाएं हमेशा नश्वरता की गूंज सुनाती हैं। भारत के महानतम पिस्टल शूटरों में शुमार 49 वर्षीय जसपाल राणा का 12 जून को कार्डियक अरेस्ट से निधन हो गया था। देश अभी इस सदमे से उबरा भी नहीं था कि जीवन की एक गहरी विडंबना देखने को मिली। जिस दिन देश को जसपाल राणा जैसा वीर पुत्र मिला था, उसी दिन उस वीर की माता भी इस दुनिया से विदा हो गईं। बेटे की मौत के महज सोलह दिन बाद माता श्यामा देवी के चले जाने से पूरा परिवार टूट गया है।
श्यामा देवी का निधन और राष्ट्र की संवेदना
श्यामा देवी का 28 जून को नई दिल्ली के आरआर अस्पताल में निधन हुआ। इससे पहले 17 जून को भी उनके निधन की अफवाह उठी थी, जिसे परिवार ने गलत बताया था। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस दुखद खबर की पुष्टि की और अपने 'X' (ट्विटर) अकाउंट पर शोक व्यक्त किया।
श्री नारायण सिंह राणा जी की धर्मपत्नी एवं प्रसिद्ध भारतीय निशानेबाज, पद्मश्री स्व. जसपाल राणा जी की पूज्य माताजी के निधन का अत्यंत दुःखद समाचार प्राप्त हुआ। इस कठिन घड़ी में मेरी गहरी संवेदनाएं शोकाकुल परिजनों के साथ हैं। ईश्वर पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें और परिवार को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति दें। ओम शांति।
काशी के मणिकर्णिका घाट पर राष्ट्रीय सम्मान से विदाई
इससे पहले 14 जून को वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर जसपाल राणा को अंतिम विदाई देने के लिए सैकड़ों लोग भावुक मन से इकट्ठा हुए थे। देहरादून से एयर एम्बुलेंस के जरिए उनके पार्थिव शरीर को वाराणसी लाया गया था। शूटिंग की दुनिया के इस आइकॉन को अंतिम संस्कार से पहले पूरे राजकीय सम्मान के साथ सलामी दी गई।
लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पार्थिव शरीर पहुंचने पर कई गणमान्य लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। आम लोगों के दर्शन के लिए पार्थिव शरीर को एयरपोर्ट के एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स में रखा गया। इसके बाद एम्बुलेंस से पार्थिव शरीर को राजघाट और कोर्ट परिसर के रास्ते मणिकर्णिका घाट ले जाया गया। वहां जसपाल के बेटे युवराज ने मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार की रस्में पूरी कीं। इस मौके पर जसपाल के भाई सुभाष, परिवार के अन्य सदस्य, शूटिंग जगत की हस्तियां और सैकड़ों आम नागरिक मौजूद थे। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पुत्र पंकज सिंह और राज्य मंत्री शंकर गिरि समेत कई लोगों ने राष्ट्र के इस वीर को अंतिम प्रणाम किया।
भारतीय खेल जगत में जसपाल राणा की विरासत क्या है?
जसपाल राणा सिर्फ एक खिलाड़ी के तौर पर ही नहीं, बल्कि एक सफल कोच के रूप में भी राष्ट्र की सेवा में लगे रहे। 2024 के पेरिस ओलिंपिक में भारत की स्टार शूटर मनु भाकर के दो ऐतिहासिक कांस्य पदक जीतने के पीछे कोच के तौर पर जसपाल राणा की बहुत बड़ी भूमिका थी। भारतीय संस्कृति में मातृशक्ति और वीर पुत्र दोनों का अपना विशेष स्थान होता है। भारतीय खेल जगत में इतना बड़ा योगदान देने वाले इस महान दिग्गज और अब उनकी माता को खोने के बाद राणा परिवार भारी संकट से गुजर रहा है। हम सब की यह कर्तव्य है कि इस दुख की घड़ी में हम उनके परिवार के साथ खड़े रहें।
जसपाल राणा और उनकी माता के निधन से जुड़े सवाल
जसपाल राणा की मां श्यामा देवी का निधन कब और कहां हुआ?
श्यामा देवी का निधन 28 जून 2026 को नई दिल्ली के आरआर अस्पताल में हुआ। वह कैंसर का इलाज करा रही थीं।
जसपाल राणा का अंतिम संस्कार कहां और कैसे हुआ?
जसपाल राणा का अंतिम संस्कार 14 जून 2026 को वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ हुआ। उनके बेटे युवराज ने मुखाग्नि दी।
मनु भाकर की ओलिंपिक सफलता में जसपाल राणा की क्या भूमिका थी?
जसपाल राणा ने 2024 पेरिस ओलिंपिक में कोच के रूप में मनु भाकर का मार्गदर्शन किया, जिससे भारत को दो कांस्य पदक मिले।