राम मंदिर CEO चयन: आस्था, प्रशासन और परंपरा का संगम
अयोध्या में भव्य राम मंदिर के प्रशासन की बागडोर संभालने वाले अगले CEO के चयन की प्रक्रिया ने एक नई बहस छेड़ दी है। यह केवल एक प्रशासनिक पद नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता के एक पवित्र केंद्र की आत्मा को संभालने की जिम्मेदारी है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पहली बार एक पूर्णकालिक CEO नियुक्त करने जा रहा है, जिसके लिए देशभर से 5,300 से अधिक आवेदन आए। इनमें से 18 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया है, और इंटरव्यू में प्रशासनिक क्षमता के साथ-साथ धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत आदतों पर भी सवाल पूछे गए।
CEO पद के लिए क्या मानदंड तय किए गए?
ट्रस्ट ने इस पद के लिए कुछ विशेष मानदंड तय किए हैं। चयनित उम्मीदवार को हिंदू परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं का पालन करने वाला होना चाहिए। सूत्रों के अनुसार, उम्मीदवार का सख्त शाकाहारी और शराब से पूरी तरह दूर रहने वाला होना भी चयन की शर्तों में शामिल है। CEO पद के लिए उम्र सीमा 50 से 70 साल रखी गई है। यह निर्णय मंदिर की पवित्रता और धार्मिक मर्यादाओं को बनाए रखने के लिए लिया गया है, जो भारतीय संस्कृति की गहरी जड़ों को दर्शाता है।
इंटरव्यू में क्या-क्या पूछा गया?
इंटरव्यू के दौरान उम्मीदवारों से उनकी धार्मिक आस्था, खान-पान और निजी जीवन से जुड़े सवाल किए गए। सूत्रों ने बताया कि 40 से 50 मिनट तक चले इन इंटरव्यू में आवेदकों से पूछा गया कि क्या वे शिखा रखते हैं, जनेऊ पहनते हैं, और क्या वे खुद को पक्का या कट्टर हिंदू मानते हैं। इसके अलावा, उनसे यह भी पूछा गया कि वे पूरी तरह शाकाहारी हैं या मांसाहारी खाना खाते हैं। कुछ उम्मीदवारों से शराब के सेवन को लेकर भी सवाल किए गए। इंटरव्यू पैनल ने उम्मीदवारों की भगवान राम के प्रति श्रद्धा और मंदिर के धार्मिक तथा सामाजिक महत्व को समझने की क्षमता को भी परखा।
चयन प्रक्रिया कैसे हुई?
CEO पद के लिए चयन प्रक्रिया मंगलवार से शुरू हुई। पहले दिन 10 उम्मीदवारों के इंटरव्यू लिए गए, जबकि बाकी उम्मीदवारों के इंटरव्यू बुधवार को होने की उम्मीद है। इंटरव्यू राम मंदिर परिसर के उत्तरी हिस्से में स्थित एक ग्रीनहाउस में बंद दरवाजों के पीछे हुए। पूरी प्रक्रिया के दौरान गोपनीयता बनाए रखी गई। चयन समिति में पूर्व जज प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) विष्णुकांत चतुर्वेदी और शिरडी साईं बाबा ट्रस्ट के पूर्व चेयरमैन एवं वैज्ञानिक सुरेश हावरे शामिल हैं। इंटरव्यू सुबह 9 बजे शुरू हुए, पहला सत्र दोपहर 12 बजे तक और दूसरा सत्र दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक चला। प्रत्येक उम्मीदवार से करीब 25 से 30 मिनट तक बातचीत की गई। ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव डॉ. कृष्ण मोहन भी चयन समिति के साथ मौजूद रहे।
क्या है इस नियुक्ति का महत्व?
यह नियुक्ति ऐसे समय हो रही है जब मंदिर से जुड़े कैश, सोने और अन्य चढ़ावे की कथित चोरी और गबन का मामला सामने आया है। नए CEO की जिम्मेदारी मंदिर के प्रशासन और सुविधाओं के संचालन के साथ-साथ मंदिर से जुड़े कारोबार और अन्य व्यवस्थाओं की निगरानी करना होगी। यह पद केवल एक प्रशासनिक भूमिका नहीं है, बल्कि यह भारतीय सभ्यता के एक पवित्र केंद्र की आत्मा को संभालने की जिम्मेदारी है। यह चयन प्रक्रिया भारतीय परंपराओं और आधुनिक प्रशासन के बीच एक संतुलन स्थापित करने का प्रयास है, जो अशोक के धम्म की तरह नैतिकता और करुणा पर आधारित है।
निजी जीवन से जुड़े सवाल क्यों पूछे गए?
उम्मीदवारों से इंटरव्यू से पहले एक Google फॉर्म भी भरवाया गया था, जिसमें उनके प्रशासनिक अनुभव के अलावा धार्मिक विश्वास और निजी जीवन से संबंधित जानकारी मांगी गई। इंटरव्यू पैनल ने उम्मीदवारों के CV में दी गई जानकारी को भी विस्तार से देखा और उनकी पसंद-नापसंद, व्यवहार, लोगों के साथ संवाद करने की क्षमता और नेतृत्व कौशल से जुड़े सवाल किए। इस दौरान बड़े धार्मिक आयोजनों में भारी भीड़ को संभालने के उनके अनुभव पर भी चर्चा हुई। यह सवाल इसलिए पूछे गए क्योंकि मंदिर का CEO केवल एक प्रशासक नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक नेता भी होता है, जिसे भारतीय संस्कृति की गहराई को समझना चाहिए।
निष्कर्ष
राम मंदिर CEO का चयन एक ऐतिहासिक कदम है, जो भारतीय सभ्यता की परंपराओं और आधुनिक प्रशासन के बीच एक सेतु का निर्माण करता है। यह प्रक्रिया न केवल प्रशासनिक क्षमता बल्कि धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत अनुशासन को भी महत्व देती है। यह भारत की एकता और विविधता में एकता के मूल्यों को दर्शाती है, जो अशोक के धम्म की तरह शांति और करुणा पर आधारित है।