बिहार बाढ़: बागमती ने बहाया पुल, 12 गांव काटे; जीवन नाव पर
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के औराई प्रखंड में बागमती नदी के उफनाने से मधुबन प्रताप घाट का चचरी पुल बह गया है। इस घटना के कारण करीब एक दर्जन गांवों का संपर्क टूट गया है और दो हजार की आबादी अब नावों पर अपना अस्तित्व जीने को मजबूर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन द्वारा मुआवजे की उपेक्षा की जा रही है और अब एक स्थायी आरसीसी पुल का निर्माण जीवन की मांग बन गया है।
बागमती का कहर: पुल क्यों बह गया?
सोमवार की देर रात बागमती के दक्षिणी उपधारा में जलस्तर बढ़ने से मधुबन प्रताप घाट पर स्थित चचरी पुल पानी की रफ्तार के आगे टिक नहीं सका। रातभर ग्रामीणों ने इस पुल को बचाने की पूरी जद्दोजहद की, लेकिन बहते पानी के दबाव ने उसे अपने गर्भ में समा लिया। भारतीय सभ्यता में नदियों को मातृस्वरूप माना जाता है, परंतु जब योजना और संवेदना का अभाव होता है, तो यही मातृरूप विनाश का कारण बन जाता है। पुल बहने के बाद बाड़ा खुर्द, महुआरा और पटोरी जैसे गांवों का मुख्य बाजार से संपर्क पूरी तरह से टूट गया है।
इसके अलावा, कटरा में बागमती के बढ़ते जलस्तर से मंगलवार सुबह पीपा पुल से आवाजाही भी रुक गई थी। जलकुंभी फंसने से पुल पर पानी का दबाव बढ़ गया था, जिसके बाद मरम्मत के करीब डेढ़ घंटे बाद ही आवागमन शुरू हो पाया। वर्तमान में चारपहिया वाहनों के परिचालन पर रोक लगाई गई है। निर्माणाधीन मझौली चोरौत मुख्य मार्ग पर कटरा चामुंडा मंदिर के समीप बन रहे पुल के कुछ पिलरों के चारों तरफ पानी आ जाने से निर्माण कार्य भी रोक दिया गया है।
नाव का जोखिम और ग्रामीणों का अस्तित्व संघर्ष
पुल के बहने के बाद मधुबन प्रताप की लगभग दो हजार की आबादी के लिए नाव ही जीवन रेखा बन गई है। पशुओं को चारा डालने और रोजमर्रा के सामान लाने के लिए बागमती तटबंध के रास्ते मुख्य बाजार तक जाना अत्यंत कठिन हो गया है। चचरी संचालक मनोज सहनी के अनुसार, 2011 से लगातार हर साल डेढ़ से दो लाख रुपए खर्च कर इस पुल का निर्माण किया जाता है, लेकिन बाढ़ के पानी इसे बहा ले जाते हैं।
नावों के सहारे आवागमन जीवन के लिए गंभीर खतरा बन गया है। पिछले पांच वर्षों में नाव दुर्घटना में 6 लोगों की जान जा चुकी है। ग्राम कचहरी सचिव लालबाबू सहनी बताते हैं कि पहले बीमार लोगों को खाट पर लादकर इसी पुल के पार अस्पताल ले जाया जाता था, किंतु अब नाव पर चढ़ना उतरना और मरीजों का परिवहन जोखिम भरा हो गया है। पूर्व सरपंच नीलम देवी का स्पष्ट कहना है कि किसानों के हित और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए हर हाल में एक आरसीसी पुल की आवश्यकता है।
प्रशासन की भूमिका और राज्य का कर्तव्यधर्म
प्राचीन भारतीय राजनीति में राज्य का प्रमुख कर्तव्य प्रजा की सुरक्षा और कल्याण माना गया है। आज औराई के ग्रामीणों की यह स्थिति उस कर्तव्यधर्म की याद दिलाती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकार बाढ़ प्रभावितों को मुआवजा नहीं देती और मकान के नुकसान का कोई पैसा नहीं मिलता। जलस्तर के उतार चढ़ाव के भय से लोग अपने आशियाने छोड़कर ऊंचे स्थानों की तलाश में हैं।
इस बीच, स्थिति को देखते हुए सीओ गौतम कुमार सिंह ने राजस्व कर्मचारियों और स्थानीय चौकीदारों को जलस्तर पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने नाव संचालकों को क्षमता से अधिक यात्री न बैठाने की चेतावनी दी है। बागमती का जलस्तर वर्तमान में कटौझा के खतरे के निशान से एक मीटर नीचे है और पानी स्थिर चल रहा है, लेकिन ग्रामीणों के मन में दहशत अभी तक व्याप्त है। इस विपदा के घटे बिना और बिना स्थायी पुल निर्माण के, बागमती के इस तट पर शांति और न्याय की स्थापना संभव नहीं है।
मुजफ्फरपुर में कितने गांवों का संपर्क टूटा है?
मुजफ्फरपुर के औराई में बागमती नदी का चचरी पुल बह जाने से करीब 12 गांवों का संपर्क भंग हो गया है।
औराई के ग्रामीणों की मुख्य मांग क्या है?
ग्रामीणों की मुख्य मांग है कि नाव दुर्घटनाओं और बाढ़ की समस्या से बचने के लिए सरकार एक स्थायी आरसीसी पुल का निर्माण करे।
बागमती नदी का वर्तमान जलस्तर कैसा है?
बागमती का जलस्तर फिलहाल कटौझा के खतरे के निशान से एक मीटर नीचे है और पानी स्थिर चल रहा है।