उत्तराखंड में प्रकृति का प्रकोप: बदरीनाथ हाईवे बंद, चमोली में भूस्खलन
उत्तराखंड में मानसून के तेवरों ने एक बार फिर प्रकृति के सामने मानव की असहायता को उजागर किया है। मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून ने अगले दो दिनों के लिए भारी से बहुत भारी वर्षा का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जिसके चलते राज्य के तीन जिलों में स्कूल बंद कर दिए गए हैं और बदरीनाथ हाईवे भूस्खलन के कारण बंद हो गया है। यह घटना हमें हिमालय की नाजुक पारिस्थितिकी और विकास की मौजूदा अवधारणा पर पुनर्विचार करने का अवसर देती है।
किन जिलों में सबसे ज्यादा खतरा?
मौसम विभाग ने देहरादून, चमोली और बागेश्वर जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में गुरुवार को स्कूल बंद रखे गए हैं। वहीं, टिहरी, उत्तरकाशी, पौड़ी, पिथौरागढ़, चंपावत, नैनीताल और रुद्रप्रयाग के लिए यलो अलर्ट जारी किया गया है। हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में भी गरज-चमक के साथ बारिश की चेतावनी दी गई है।
बदरीनाथ हाईवे क्यों बंद हुआ?
बदरीनाथ हाईवे हेलंग में भूस्खलन के कारण बंद हो गया है। चमोली जिले में 30 से अधिक ग्रामीण मोटर मार्ग बंद हैं। कुनीगाड मल्ली नरेंद्र नगर में भूस्खलन से कई घरों में मलबा घुस गया है। प्रशासन और आपदा नियंत्रण कक्ष को सूचना दे दी गई है।
प्रशासन ने क्या कदम उठाए?
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने सभी विभागों को पूर्ण सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में ट्रेकिंग गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पर्यटकों के आवागमन पर भी प्रतिबंध रहेगा। आमजन से अपील की गई है कि किसी भी आपात स्थिति में 1077 या 112 पर सूचना दें।
हरिद्वार और कोटद्वार में क्या हाल है?
हरिद्वार में बुधवार शाम से बारिश जारी है, जिससे उमस भरी गर्मी से राहत मिली है। कोटद्वार में राष्ट्रीय राजमार्ग 534 पर बरसाती रपटे पर पानी बढ़ने से पूरी रात यातायात बंद रहा। गुमखाल सतपुली के मध्य भी राष्ट्रीय राजमार्ग अवरुद्ध है।
देहरादून में सुसवा नदी का खतरा
देहरादून जिले के डोईवाला में सुसवा नदी का प्रवाह लगातार बढ़ रहा है। बुल्लावाला स्थित मोक्ष धाम की सुरक्षा दीवार क्षतिग्रस्त हो गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि नवनिर्मित पुल के कारण नदी का प्रवाह बदल गया है, जिससे भूमि में कटाव हो रहा है। यदि और वर्षा हुई तो मोक्ष धाम को भी खतरा हो सकता है।
प्रकृति के इस संकट से क्या सीख?
यह घटना हमें याद दिलाती है कि हिमालयी क्षेत्रों में विकास की योजना प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर ही की जानी चाहिए। अशोक के धम्म की तरह, हमें सभी प्राणियों के कल्याण और प्रकृति के संरक्षण को प्राथमिकता देनी चाहिए। बिना पर्यावरणीय प्रभाव के बनाए गए पुल और सड़कें ही वास्तविक विकास का प्रतीक हैं।