गुरुग्राम के जलभराव पर मानवाधिकार आयोग सख्त: नागरिक ढांचे का होगा तकनीकी ऑडिट
मिलेनियम सिटी गुरुग्राम में हर वर्षा के बाद सड़कों के तालाब बनने और यातायात ठप होने की समस्या अब मानवाधिकार आयोग के सख्त दायरे में आ गई है। आयोग ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन और संबंधित एजेंसियों से जवाब मांगा है और शहर के नागरिक ढांचे का तकनीकी ऑडिट कराने का निर्देश दिया है।
स्कूल बसों में फंसे बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल
आयोग की चिंता केवल जलभराव और जाम तक सीमित नहीं है। सुभाष चौक पर एक स्कूल बस के जलभराव में फंसने और बच्चों के परेशान होने की घटना ने बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। आयोग ने उपायुक्त और जिला शिक्षा अधिकारी को स्कूल बसों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
आयोग ने कहा है कि स्कूल बसों में रियल टाइम ट्रैकिंग की सुविधा होनी चाहिए। किसी बस के फंसने पर स्कूल, अभिभावक, पुलिस और प्रशासन के बीच तत्काल संचार व्यवस्था स्थापित की जानी चाहिए। जलभराव वाले संवेदनशील स्थानों की पहले से पहचान कर वहां अत्यधिक वर्षा के दौरान स्कूल बसों की आवाजाही प्रतिबंधित करने को भी कहा गया है।
24 अगस्त की बारिश ने उजागर की व्यवस्था की कमजोरी
आयोग ने 24 अगस्त को दर्ज की गई करीब 75 मिलीमीटर वर्षा के बाद गुरुग्राम में बने हालात का संज्ञान लिया है। उस दिन सुभाष चौक, राजीव चौक, नरसिंहपुर, इफको चौक, सोहना रोड और दिल्ली-जयपुर हाईवे समेत शहर के बड़े हिस्से में जलभराव हो गया था। प्रमुख चौराहों पर घंटों जाम लगा रहा और लोगों को कम दूरी तय करने में भी असामान्य समय लगा।
सबसे गंभीर बात यह रही कि जलभराव के कारण एंबुलेंस और आपातकालीन वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हुई। आयोग के सामने यह सवाल उठा है कि यदि किसी गंभीर मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाना हो या तत्काल बचाव अभियान चलाना पड़े तो क्या शहर की व्यवस्था सक्षम है?
वर्षा को दोष देकर नहीं बच पाएंगी एजेंसियां
आयोग ने स्पष्ट किया है कि गुरुग्राम के जलभराव को केवल अत्यधिक वर्षा का परिणाम मानकर जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता। यह स्थिति शहर के कई हिस्सों में बार-बार सामने आने वाली शहरी बाढ़ और अपर्याप्त नागरिक बुनियादी ढांचे की ओर इशारा करती है। हर मानसून से पहले नालों की सफाई और ड्रेनेज सुधार के दावे किए जाते हैं, लेकिन अब आयोग ने बयानों के बजाय तकनीकी आडिट की दिशा में आगे बढ़ने को कहा है।
इफको चौक पर सड़क धंसने से बढ़ी चिंता
आयोग ने इफको चौक के पास सर्विस रोड के धंसने और भूमिगत सीवरेज पाइपलाइन में रिसाव की रिपोर्ट का भी संज्ञान लिया है। आयोग ने इसे महज सड़क धंसने की घटना नहीं माना, बल्कि शहर के भूमिगत नागरिक ढांचे की स्थिति से जोड़कर देखा है। जल निकासी नालियों, सीवरेज नेटवर्क, जलापूर्ति पाइपलाइन और सड़कों को अलग-अलग देखकर समस्या का समाधान नहीं हो सकता। इनके बीच के संबंधों का एकीकृत तकनीकी आकलन जरूरी है।
15 दिसंबर की सुनवाई में तय होगी दिशा
15 दिसंबर की अगली सुनवाई में प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के जवाब से यह स्पष्ट होगा कि गुरुग्राम के लिए इस बार केवल आश्वासन मिलेगा या स्थायी समाधान की ठोस कार्ययोजना सामने आएगी। आयोग का यह कदम शहर के नागरिक ढांचे की जवाबदेही तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।