बोकारो की बेटियों का लापता होना: न्याय की तलाश में भटकते परिवार
झारखंड के बोकारो जिले में दो बेटियों के लापता होने का मामला समाज की संवेदना को झकझोर रहा है। पांच साल पहले गायब हुई सेजल झा और सात महीने से लापता पुष्पा कुमारी के मामले ने न केवल दो परिवारों को तबाह किया है, बल्कि हमारी न्याय व्यवस्था की कमियों को भी उजागर किया है।
सेजल झा: पांच साल की प्रतीक्षा
पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र के गिरधरटांड गांव की निवासी सेजल झा 16 अक्तूबर 2020 को ट्यूशन जाते समय रहस्यमय तरीके से गायब हो गई थी। मुख्य सड़क पर मिली उसकी साइकिल, चप्पल और किताबें एक दुखद कहानी कहती हैं। पिछले पांच वर्षों में कई एसपी की टीमों ने अलग-अलग राज्यों में छापेमारी की, दर्जनों लोगों से पूछताछ हुई, परंतु हर बार निराशा ही हाथ लगी।
सेजल की माता उषा झा और पिता राम कृष्ण झा की व्यथा हमारे समाज के दर्द को दर्शाती है। मुख्यमंत्री से लेकर हर बड़े अधिकारी तक गुहार लगाने के बावजूद केवल आश्वासन मिले हैं। अब सीआईडी जांच ही उनकी अंतिम आशा बनकर रह गई है।
पुष्पा कुमारी: सात महीने की अनिश्चितता
खुटाडीह गांव की 18 वर्षीय पुष्पा कुमारी 21 जुलाई 2025 को कॉलेज जाने के लिए घर से निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। बेडानी मोड़ पर मिली उसकी साइकिल एक और अधूरी कहानी का प्रतीक बन गई। पुलिस जांच में कई संदिग्धों से पूछताछ हुई है, परंतु कोई ठोस सुराग नहीं मिला।
समाज की चुनौती और न्याय की आवश्यकता
ये दोनों मामले हमारे समाज में महिला सुरक्षा की गंभीर चुनौती को उजागर करते हैं। समाजसेवी विजेता शेखर ने डीजीपी को पत्र लिखकर दोनों मामलों में सीआईडी जांच की मांग की है। यह मांग न केवल न्यायसंगत है, बल्कि समय की मांग भी है।
वर्तमान एसपी हरविंदर सिंह के अनुसार, सभी संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है और तकनीकी सहायता भी ली जा रही है। परंतु परिवारों की पीड़ा और समाज की चिंता का समाधान तभी होगा जब इन मामलों का सच सामने आएगा।
भारतीय संस्कृति में बेटी को लक्ष्मी का रूप माना गया है। इन दोनों परिवारों की पीड़ा हमारे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। न्याय की देरी न्याय से इनकार के समान है, और यह समय है कि हम अपनी बेटियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।