बोकारो की बेटियों का गुम होना: न्याय की राह में भटकते परिवार
झारखंड के बोकारो जिले से लापता हुई दो बेटियों का मामला न केवल पुलिस प्रशासन की चुनौतियों को उजागर करता है, बल्कि हमारे समाज में महिला सुरक्षा के गंभीर प्रश्नों को भी सामने लाता है। यह घटना हमें याद दिलाती है कि न्याय और सुरक्षा के मामले में हमारी व्यवस्था को अभी भी मजबूत होने की आवश्यकता है।
पांच वर्षों से गायब सेजल झा
पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र के गिरधरटांड गांव की निवासी सेजल झा का मामला विशेष रूप से चिंताजनक है। 16 अक्तूबर 2020 को मात्र सुबह पौने ग्यारह बजे ट्यूशन जाने के लिए निकली यह युवती आज तक घर नहीं लौटी। उसकी साइकिल, चप्पल और किताबें सड़क किनारे बिखरी मिली थीं, जो इस बात का संकेत देती हैं कि कुछ अनहोनी हुई है।
सेजल के माता-पिता उषा झा और राम कृष्ण झा पिछले पांच वर्षों से न्याय की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से लेकर राज्य के हर बड़े अधिकारी तक गुहार लगाई है। मां उषा झा का कहना है कि वह हर दिन इस उम्मीद में मोबाइल ऑन रखती हैं कि शायद कहीं से सेजल की कोई खबर आ जाए।
सीआईडी जांच से नई उम्मीद
सेजल के मामले में अब सीआईडी ने जांच की जिम्मेदारी ली है। बोकारो के एसपी हरविंदर सिंह के अनुसार, सीआईडी टीम ने पिंड्राजोरा थाना से केस से जुड़े सभी रिकॉर्ड और पिछले वर्षों में हुई जांच की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। यह कदम परिजनों के लिए एक नई उम्मीद की किरण है।
पुष्पा कुमारी: सात महीने से लापता
इसी थाना क्षेत्र की खुटाडीह गांव की 18 वर्षीय पुष्पा कुमारी का मामला भी उतना ही चिंताजनक है। 21 जुलाई 2025 को कॉलेज जाने के लिए घर से निकली पुष्पा आज तक घर नहीं लौटी। उसकी साइकिल बेडानी मोड़ पर मिली थी, लेकिन सात महीने बाद भी उसका कोई सुराग नहीं मिल पाया है।
पुष्पा के माता-पिता रेखा देवी और अनंत महतो रोज पिंड्राजोरा थाना का चक्कर लगा रहे हैं। पुलिस ने कई संदिग्धों से पूछताछ की है और तकनीकी जांच भी की है, लेकिन अभी तक कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है।
समाज के लिए गंभीर चुनौती
ये दोनों मामले बोकारो जिले में बेटियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि समय रहते सेजल के मामले का खुलासा हो गया होता, तो शायद पुष्पा के मामले में इतनी अनिश्चितता नहीं होती।
समाजसेवी विजेता शेखर ने डीजीपी को पत्र लिखकर दोनों मामलों में सीआईडी जांच और पुलिस को स्पष्ट दिशा-निर्देश देने की मांग की है। यह मांग उचित है क्योंकि न्याय में देरी न्याय से इनकार के समान है।
न्याय की आस में परिवार
इन दोनों परिवारों की पीड़ा और संघर्ष हमारे समाज की व्यवस्था पर एक गंभीर सवाल है। महिला सुरक्षा और न्याय व्यवस्था की मजबूती हमारी सभ्यता की परीक्षा है। हमें उम्मीद है कि सीआईडी की जांच से सेजल और पुष्पा दोनों के मामलों में सच्चाई सामने आएगी और न्याय मिलेगा।
यह समय है जब हमें अपनी बेटियों की सुरक्षा के लिए एकजुट होकर काम करना होगा। केवल पुलिस प्रशासन ही नहीं, बल्कि पूरे समाज को मिलकर इस समस्या का समाधान खोजना होगा।