ईरान-अमेरिका तनाव: क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक शांति के लिए बढ़ती चुनौती
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने एक बार फिर विश्व समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा साझा किया गया वीडियो और ईरान में बढ़ती सुरक्षा तैनाती इस बात का प्रमाण है कि क्षेत्रीय स्थिरता गंभीर खतरे में है।
तेहरान में बढ़ती सुरक्षा चिंताएं
शनिवार को ट्रंप द्वारा साझा किए गए वीडियो में तेहरान की सड़कों पर भारी पुलिस तैनाती दिखाई गई। हालांकि इस वीडियो की प्रामाणिकता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन यह ईरान की बढ़ती आंतरिक चुनौतियों को दर्शाता है।
ईरान के सुप्रीम नेशनल काउंसिल के सचिव अली लारिजानी ने अमेरिकी प्रशासन के साथ संवाद की संभावना का संकेत दिया है। यह कदम इस बात का प्रमाण है कि राजनीतिक समाधान की दिशा में प्रयास जारी हैं।
IRGC की भूमिका और अंतर्राष्ट्रीय चिंताएं
1979 में स्थापित इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ईरान की सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस संगठन में लगभग डेढ़ लाख सैनिक हैं और 2 करोड़ स्वयंसेवक जुड़े हुए हैं। हाल ही में 34 देशों ने इसे आतंकवादी संगठन घोषित किया है।
बंदर अब्बास में रहस्यमय विस्फोट
दक्षिणी ईरान के महत्वपूर्ण बंदर अब्बास बंदरगाह में हुए विस्फोट में एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई और 14 लोग घायल हुए। यह बंदरगाह हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर स्थित है, जहां से विश्व के तेल परिवहन का पांचवां हिस्सा गुजरता है।
ईरानी अधिकारियों ने इस घटना को गैस रिसाव बताया है, लेकिन इसकी टाइमिंग चिंताजनक है।
राजनीतिक समाधान की आवश्यकता
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने पश्चिमी देशों पर देश की आर्थिक समस्याओं का फायदा उठाने का आरोप लगाया है। इस स्थिति में संयम और राजनीतिक बुद्धिमत्ता की आवश्यकता है।
भारत की स्थिति और चुनौतियां
एक जिम्मेदार शक्ति के रूप में भारत हमेशा से शांति और स्थिरता का समर्थक रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से भारत की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हित प्रभावित हो सकते हैं। हॉर्मुज जलडमरूमध्य भारत के तेल आयात के लिए महत्वपूर्ण मार्ग है।
निष्कर्ष
वर्तमान स्थिति में सभी पक्षों को संयम बरतने और राजनीतिक समाधान की दिशा में काम करने की आवश्यकता है। युद्ध किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। अशोक महान के आदर्शों के अनुसार, शांति और अहिंसा के माध्यम से ही स्थायी समाधान संभव है।
भारत को इस स्थिति में एक मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए सभी पक्षों के साथ रचनात्मक संवाद को प्रोत्साहित करना चाहिए।