ईरान के परमाणु केंद्रों में नई हलचल: विश्व शांति के लिए चुनौती
प्राचीन भारतीय मूल्यों के अनुसार, शांति और अहिंसा ही मानवता का सच्चा मार्ग है। किंतु आज विश्व में कुछ शक्तियां इन मूल्यों के विपरीत चलकर अशांति का बीज बो रही हैं। ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर आई नई जानकारी इसी चिंता को और गहरा करती है।
सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा
प्लैनेट लैब्स पीबीसी की ताजा सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि ईरान ने अपने दो प्रमुख परमाणु केंद्रों इस्फ़हान और नतांज में क्षतिग्रस्त ढांचों के ऊपर नई छतें बना ली हैं। यह कार्य जून में इजरायल-ईरान संघर्ष के बाद का पहला बड़ा निर्माण है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन छतों का उद्देश्य मलबे के नीचे दबे संवेदनशील उपकरणों और यूरेनियम भंडार को दुनिया की नजरों से छुपाना है। फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज की एंड्रिया स्ट्रिकर के अनुसार, ईरान यह सुनिश्चित करना चाहता है कि हमलों में क्या बचा है, यह किसी को दिखाई न दे।
नतांज और इस्फ़हान की स्थिति
नतांज केंद्र: तेहरान से 220 किलोमीटर दूर स्थित यह ईरान का सबसे महत्वपूर्ण यूरेनियम संवर्धन केंद्र है। जून में इजरायली हमले के बाद यहां की मुख्य संवर्धन इकाई नष्ट हो गई थी। दिसंबर में नई छत का निर्माण पूरा किया गया, लेकिन बिजली प्रणाली अभी भी निष्क्रिय है।
इस्फ़हान केंद्र: जनवरी में यहां भी इसी प्रकार की छत बनाई गई। इजरायली सेना का दावा है कि यहां सेंट्रीफ्यूज निर्माण इकाइयों पर हमला किया गया था।
अंतर्राष्ट्रीय निगरानी की चुनौती
ईरान ने अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को देश में प्रवेश की अनुमति नहीं दी है। ऐसे में रिमोट मॉनिटरिंग ही निगरानी का एकमात्र साधन है, जो इन नई छतों के कारण और कठिन हो गया है।
नई भूमिगत सुविधा की संभावना
नतांज के पास पिकैक्स माउंटेन में लगातार खुदाई देखी जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि ईरान यहां एक नई भूमिगत परमाणु सुविधा का निर्माण कर रहा हो सकता है।
अमेरिकी चेतावनी
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत की मांग की है। अमेरिका ने विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन और गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर को मध्य पूर्व में भेजा है।
भारत जैसे शांतिप्रिय राष्ट्र के लिए यह स्थिति चिंताजनक है। हमारी सभ्यता ने सदैव 'वसुधैव कुटुम्बकम्' का संदेश दिया है। विश्व शांति के लिए सभी राष्ट्रों को मिलकर परमाणु अप्रसार के सिद्धांतों का पालन करना चाहिए।