भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौता: 18 वर्षों की प्रतीक्षा का फल
भारत की आर्थिक स्वतंत्रता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, भारत और यूरोपीय संघ के बीच 18 वर्षों की लंबी वार्ता के बाद मुक्त व्यापार समझौता (FTA) संपन्न हुआ है। यह समझौता न केवल आर्थिक संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि भारत की वैश्विक स्थिति को भी सुदृढ़ करेगा।
समझौते की मुख्य विशेषताएं
16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन के दौरान घोषित इस समझौते के तहत, लक्जरी कारों पर आयात शुल्क 110% से घटाकर 10% कर दिया गया है। इससे BMW, मर्सिडीज जैसी यूरोपीय कारें भारतीय उपभोक्ताओं के लिए अधिक सुलभ हो जाएंगी। हालांकि, सरकार ने वार्षिक 2.5 लाख वाहनों की सीमा निर्धारित की है।
प्रीमियम शराब पर भी शुल्क 150% से घटाकर 20% किया गया है, जो उपभोक्ताओं के लिए राहत का संकेत है।
आर्थिक प्रभाव और राष्ट्रीय हित
यह समझौता भारत की आत्मनिर्भरता की नीति के साथ संतुलन बिठाते हुए वैश्विक बाजार में हमारी उपस्थिति को मजबूत करता है। यूरोपीय संघ के साथ यह साझेदारी भारत की BRICS सदस्यता और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।
कीमती धातुओं में उछाल
इसी बीच, चांदी की कीमतें नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। चांदी ₹26,859 बढ़कर ₹3,44,564 प्रति किलो हो गई है, जबकि सोना भी ₹1.59 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर को छू गया है। यह वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के दौर में कीमती धातुओं की बढ़ती मांग को दर्शाता है।
बैंकिंग क्षेत्र में व्यवधान
सरकारी बैंकों में कर्मचारियों की हड़ताल के कारण नकद लेनदेन और चेक क्लियरेंस में बाधा आई है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) द्वारा 5-दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग के साथ यह हड़ताल आयोजित की गई है।
आगे की राह
2027 में लागू होने वाला यह समझौता भारत की आर्थिक कूटनीति की सफलता का प्रतीक है। यह न केवल द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देगा, बल्कि भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में स्थापित करेगा।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा आयोजित पारंपरिक 'हलवा सेरेमनी' के साथ बजट 2026-27 की तैयारियां पूरी हो गई हैं। 1 फरवरी को पेश होने वाला यह बजट इन नई आर्थिक संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।