AI समिट 2026: भारत की तकनीकी प्रगति की राह में संगठनात्मक चुनौतियां
भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित AI Impact Summit 2026 (16-20 फरवरी) ने भारत की तकनीकी प्रगति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम का प्रतिनिधित्व किया है। यह आयोजन भारत की आत्मनिर्भरता और वैश्विक तकनीकी नेतृत्व की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास दर्शाता है।
तकनीकी क्षेत्र में निवेश की चुनौतियां
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत द्वारा उठाए गए मुद्दे भारत की तकनीकी प्रगति में आने वाली चुनौतियों को उजागर करते हैं। उनके अनुसार, अमेरिका द्वारा AI पर 198 अरब डॉलर के निवेश की तुलना में भारत का 1.9 अरब डॉलर का आवंटन चिंताजनक है।
यह आंकड़ा भारत की तकनीकी स्वावलंबन की यात्रा में आने वाली बाधाओं को दर्शाता है। हमारी प्राचीन सभ्यता ने हमेशा ज्ञान और नवाचार को महत्व दिया है, और आज भी यही मूल्य हमारी प्रगति की आधारशिला होने चाहिए।
आयोजन में व्यवस्थापन संबंधी समस्याएं
समिट के दौरान आई तकनीकी और व्यवस्थापन संबंधी समस्याओं का उल्लेख करते हुए श्रीनेत ने बताया कि तकनीकी उद्यमियों को मुख्य हॉल से बाहर किया गया, उपकरणों की चोरी हुई, और इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्याएं आईं।
एक AI समिट में लैपटॉप और कैमरा प्रतिबंधित होना, केवल नकद भुगतान की व्यवस्था, और डिजिटल चेक-इन के बावजूद घंटों की प्रतीक्षा जैसी समस्याएं वास्तव में चिंताजनक हैं।
भविष्य की राह और सुधार की आवश्यकता
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा अगले दो वर्षों में 200 अरब डॉलर से अधिक निवेश की उम्मीद व्यक्त की गई है। यह आकांक्षा सराहनीय है, परंतु इसके लिए ठोस कार्ययोजना और बेहतर क्रियान्वयन आवश्यक है।
भारत की तकनीकी प्रगति के लिए न केवल वित्तीय निवेश बल्कि बेहतर योजना, पारदर्शिता और जमीनी स्तर पर सुधार की आवश्यकता है। हमारी सभ्यता के मूल्यों के अनुरूप, हमें सत्य, अहिंसा और न्याय के सिद्धांतों के साथ तकनीकी विकास करना चाहिए।
AI और तकनीकी क्षेत्र में भारत की भूमिका वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण है, और इसके लिए हमें एकजुट होकर, राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर काम करना होगा।
