अमेरिकी वित्तीय व्यवस्था में नया संकट: ट्रंप का जेपीमॉर्गन पर ऐतिहासिक मुकदमा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश के सबसे बड़े बैंक जेपीमॉर्गन चेज़ और उसके सीईओ जेमी डिमोन के खिलाफ 5 अरब डॉलर (लगभग 41,500 करोड़ रुपये) का मुकदमा दायर किया है। यह कदम न केवल अमेरिकी कॉर्पोरेट जगत में खलबली मचा रहा है, बल्कि वैश्विक वित्तीय व्यवस्था के लिए भी एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।
राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप
फ्लोरिडा की अदालत में दायर इस मुकदमे में ट्रंप का आरोप है कि जेपीमॉर्गन ने 2021 में राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से उनके और उनकी कंपनियों के बैंक खाते बंद कर दिए थे। फरवरी 2021 में बैंक ने ट्रंप और उनके विभिन्न व्यवसायों को 60 दिन का नोटिस देकर सभी वेल्थ मैनेजमेंट और व्यावसायिक खाते बंद करने की सूचना दी थी।
मुकदमे के अनुसार, ट्रंप और उनके परिवार को पूरी तरह से 'ब्लैकलिस्ट' कर दिया गया था। इसका प्रभाव यह हुआ कि अन्य बैंकों ने भी ट्रंप के साथ कारोबार करने से इनकार कर दिया।
व्यापक न्यायिक अभियान
यह मुकदमा ट्रंप की व्यापक न्यायिक रणनीति का हिस्सा है। इससे पहले उन्होंने सीबीएस, न्यूयॉर्क टाइम्स, वॉल स्ट्रीट जर्नल और बीबीसी जैसे मीडिया संस्थानों के खिलाफ भी अरबों डॉलर के हर्जाने की मांग करते हुए मुकदमे दायर किए हैं।
दिलचस्प बात यह है कि यह मुकदमा डिमोन के दावोस में ट्रंप की क्रेडिट कार्ड ब्याज दरों पर 10% की सीमा के प्रस्ताव को "आर्थिक आपदा" बताने के ठीक एक दिन बाद आया है।
बैंक का प्रतिवाद
जेपीमॉर्गन चेज़ ने ट्रंप के आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। बैंक की प्रवक्ता ट्रिश वेक्सलर ने स्पष्ट किया कि "जेपीमॉर्गन राजनीतिक या धार्मिक आधार पर कभी भी खाते बंद नहीं करता है।"
बैंक के अनुसार, खाते बंद करने का निर्णय केवल तब लिया जाता है जब कोई ग्राहक कंपनी के लिए 'कानूनी या नियामकीय जोखिम' पैदा करता है। बैंक ने संकेत दिया कि वे वित्तीय प्रणाली की सुरक्षा के लिए बनाए गए कड़े नियमों का पालन करने के लिए मजबूर हैं।
व्यापक प्रभाव और भविष्य की संभावनाएं
यदि अदालत ट्रंप के हक में फैसला देती है तो यह पूरे बैंकिंग उद्योग के लिए एक मिसाल बन जाएगा। बैंकों को अपने 'क्लाइंट एग्जिट' नियमों में भारी बदलाव करना पड़ सकता है।
ट्रंप ने अगस्त 2025 में एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे, जिसका उद्देश्य उन बैंकों को दंडित करना है जो ग्राहकों के राजनीतिक या धार्मिक विचारों के आधार पर सेवाएं देने से इनकार करते हैं।
इस मामले में न्याय और निष्पक्षता के मूल्यों का परीक्षण हो रहा है। फिलहाल, दुनिया की नजरें फ्लोरिडा की अदालत पर टिकी हैं, जहां अमेरिकी सत्ता और वैश्विक वित्त के दो सबसे बड़े केंद्र आपस में टकराएंगे।