गोरखपुर आश्रय गृह से 4 युवक लापता: CCTV बंद, पूर्व नियोजित साजिश की आशंका
गोरखपुर के राजकीय मानसिक मंदित आश्रय गृह सह प्रशिक्षण केंद्र से चार युवकों के एक साथ लापता होने का मामला अब महज सुरक्षा चूक नहीं, बल्कि पूर्व नियोजित साजिश का रूप ले चुका है। जिस रात युवक गायब हुए, उस रात केंद्र में लगे सभी आठ सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग बंद थी, जिससे जांच अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
कैमरों की रिकॉर्डिंग बंद होने से बढ़ी जांच की गुत्थी
केंद्र में लगे आठ सीसी कैमरों में रिकॉर्डिंग की सुविधा मौजूद है और पुरानी रिकॉर्डिंग भी उपलब्ध है, लेकिन घटना वाली रात की रिकॉर्डिंग गायब है। एक साथ सभी कैमरों का बंद होना जांचकर्ताओं के लिए एक बड़ा सवाल है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, यह तकनीकी खराबी भी हो सकती है, लेकिन रिकॉर्डिंग सिस्टम से जानबूझकर छेड़छाड़ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
रवि की बढ़ी बौद्धिक क्षमता ने जांच को मोड़ा रवि की ओर
जांच में सबसे महत्वपूर्ण पहलू 22 वर्षीय रवि की भूमिका है, जो लापता चार युवकों में से एक है। केंद्र के कर्मचारियों और मनोविज्ञानी के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में रवि की मानसिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया था। वह अन्य युवकों की तुलना में अधिक सजग, सक्रिय और तेजी से बातों को समझने लगा था। अधिकारियों को आशंका है कि रवि ने परिसर की सुरक्षा व्यवस्था और कैमरों की स्थिति को समझने के बाद बाहर निकलने की योजना बनाई होगी।
13 साल की देखभाल के बाद सुधर रहे थे युवक
लापता युवकों में रवि के अलावा आजम, सोमारू और बबलू शामिल हैं। सभी की उम्र 19 से 23 वर्ष के बीच है। इन्हें करीब 13 वर्ष पहले आश्रय गृह में लाया गया था। लंबे समय तक प्रशिक्षण, देखभाल और उपचार के बाद इनमें धीरे-धीरे सुधार आया था। यह घटना न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि इन युवकों के पुनर्वास की प्रक्रिया पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।
48 युवकों की जिम्मेदारी, सीमित स्टाफ और सुरक्षा की चुनौती
केंद्र में वर्तमान में 48 युवक रह रहे हैं। उनकी देखभाल के लिए अधीक्षक रविकांत पांडेय के अलावा एक नर्स, वार्डन और तीन अनुचर हैं। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के चार स्वीकृत पदों में से केवल दो पर तैनाती है। युवकों की गिनती रोजाना रात में भोजन के बाद और सुबह नाश्ते के समय की जाती है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि रात में भोजन के बाद सभी युवक मौजूद थे, तो चार युवक कब और किस रास्ते से बाहर निकले?
जवाबदेही तय करने की कवायद शुरू
दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी तनुज त्रिपाठी ने मामले की जानकारी निदेशालय को दे दी है और अधीक्षक को विस्तृत आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। जांच में विशेष रूप से यह पता लगाया जाएगा कि घटना वाली रात किस अनुचर और होमगार्ड की ड्यूटी थी। उप निदेशक दिव्यांगजन अनूप कुमार सिंह और तनुज त्रिपाठी ने मौके पर पहुंचकर पड़ताल की है। पुलिस भी लापता युवकों की तलाश में बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों पर अलर्ट जारी कर दिया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गोरखपुर आश्रय गृह से कितने युवक लापता हुए?
गोरखपुर के राजकीय मानसिक मंदित आश्रय गृह से चार युवक लापता हुए हैं, जिनके नाम रवि, आजम, सोमारू और बबलू हैं।
घटना वाली रात सीसीटीवी कैमरे क्यों बंद थे?
जांच में सामने आया है कि घटना वाली रात केंद्र में लगे सभी आठ सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग बंद थी। अधिकारी तकनीकी खराबी और जानबूझकर छेड़छाड़ दोनों संभावनाओं की जांच कर रहे हैं।
लापता युवकों की तलाश में क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
पुलिस लापता युवकों की तलाश में बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों पर अलर्ट जारी कर दिया है। विभागीय अधिकारियों ने भी अपने स्तर से जांच शुरू कर दी है।