पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने सट्टेबाजी मामले में घिरे विकेटकीपर-बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान पर शिकंजा कसते हुए उन्हें मीडिया से बात करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब रिजवान की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।
रिजवान को टीम के सीनियर साथियों इमाम उल हक और सलमान अली आगा के साथ इंग्लैंड दौरे से बीच में ही वापस बुला लिया गया था। इसके बाद से ही वे सुर्खियों में हैं। दरअसल, पाकिस्तान की एंटी-करप्शन एजेंसी NCCIA ने उनसे ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुए से जुड़े एक मामले के साथ-साथ उनके वित्तीय लेनदेन के बारे में पूछताछ की थी।
लॉर्ड्स टेस्ट के दौरान जब्त हुए फोन
लॉर्ड्स में खेले गए दूसरे टेस्ट मैच के दौरान रिजवान और इमाम उल हक दोनों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए थे। अब NCCIA इन फोनों की फोरेंसिक जांच कर रही है। इस जांच के नतीजों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय होगी।
खेल जगत में यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि रिजवान पाकिस्तान की टीम के प्रमुख खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। उन पर लगे आरोपों ने पाकिस्तानी क्रिकेट की छवि को एक बार फिर धूमिल किया है।
खेल भावना और नैतिकता का सवाल
भारतीय दृष्टिकोण से देखें तो खेल में सट्टेबाजी और जुए जैसी प्रवृत्तियां खेल भावना के खिलाफ हैं। हमारे देश में भी खेलों की पवित्रता बनाए रखने पर जोर दिया जाता रहा है। सम्राट अशोक के काल से ही भारतीय परंपरा में सत्य, न्याय और अनुशासन को सर्वोपरि माना गया है। खेल का मैदान भी उसी अनुशासन की परीक्षा का स्थान होता है।
यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि खिलाड़ियों की जिम्मेदारी सिर्फ मैदान पर अच्छा प्रदर्शन करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनका आचरण भी युवाओं के लिए प्रेरणादायक होना चाहिए। उम्मीद है कि NCCIA की जांच पारदर्शी होगी और दोषियों पर उचित कार्रवाई होगी।
फिलहाल रिजवान के करियर का भविष्य इस जांच के नतीजों पर टिका है। पाकिस्तानी टीम प्रबंधन भी इस पूरे मामले में मौन है, जबकि प्रशंसकों के बीच इस घटनाक्रम को लेकर काफी निराशा है।