नई दिल्ली, 23 अक्टूबर 2026। परिसीमन विधेयक को संसद से पास कराने के लिए केंद्र सरकार ने विपक्ष के कई दलों से बातचीत शुरू कर दी है। हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, इस सूची में डीएमके और समाजवादी पार्टी जैसे विपक्षी गठबंधन के अहम दल भी शामिल हैं। सरकार को इस बिल के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी लोकसभा में 360 वोटों की जरूरत होगी।
मॉनसून सत्र का सत्रावसान अभी नहीं हुआ है और विशेष सत्र की संभावना बनी हुई है। मोदी सरकार को भरोसा है कि जरूरी संख्या जुटाई जा सकती है, लेकिन अगला हफ्ता इस मोर्चे पर तय करेगा कि परिसीमन का एजेंडा आगे बढ़ेगा या नहीं।
संसद में क्या है NDA का नंबर गेम?
लोकसभा में तीन सीटें खाली होने की वजह से अभी कुल 540 सांसद हैं। संविधान संशोधन के लिए 360 वोट चाहिए। NDA के पास अभी 320 सांसदों का समर्थन है, जिसमें TMC के 20 बागी सांसद, शिवसेना के 6 और शिरोमणि अकाली दल का एक सांसद शामिल है। YSRCP के 4 सांसद भी अब तक सरकार के साथ खड़े रहे हैं। अगर ये सभी पक्ष में वोट करते हैं तो NDA के पास 324 वोट हो जाएंगे। राज्यसभा में 244 में से 164 वोट चाहिए, जबकि NDA को अभी 158 सांसदों का समर्थन मिलता दिख रहा है।
सरकार डीएमके, एनसीपी (एसपी), शिवसेना (यूबीटी), ओवैसी की एआईएमआईएम, बीजेडी और YSRCP के संपर्क में है। इनशॉर्ट्स की खबर में सरकार के इस दावे का जिक्र है कि अखिलेश यादव और एमके स्टालिन से परिसीमन पर बात हो चुकी है। इस पूरे गुट के पास लोकसभा में 81 और राज्यसभा में 23 सांसद हैं। अगर ये NDA के मौजूदा आंकड़ों में जुड़ जाते हैं तो लोकसभा में 401 और राज्यसभा में 181 सांसद बिल के समर्थन में हो सकते हैं। दो-तिहाई का आंकड़ा आसानी से हासिल हो जाएगा।
DMK ने बढ़ाई चिंता, लेकिन दरवाजे बंद नहीं
डीएमके ने हाल में तमिलनाडु विधानसभा में परिसीमन विरोधी बिल के प्रस्ताव का समर्थन किया था और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों का भी पक्ष लिया था। पार्टी ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी प्रस्ताव पारित किया है। डीएमके ने साफ कहा है कि तमिलनाडु चुनावों के बाद कांग्रेस के साथ रहना उसे सहज नहीं लग रहा।
फिर भी भाजपा को उम्मीद है कि सीटों पर 50 प्रतिशत की सीमा तय करने से डीएमके मान जाएगी। डीएमके के सूत्रों का कहना है कि जब तक वे यह नहीं देख लेते कि बिल में क्या लिखा है, तब तक न कोई वादा करेंगे और न कोई टिप्पणी। वेबदुनिया की रिपोर्ट भी इसी रुख की पुष्टि करती है कि डीएमके अभी भाजपा या NDA को समर्थन देने का कोई संकेत नहीं दे रही।
अखिलेश से भी भाजपा को उम्मीदें
उत्तर प्रदेश में सपा के सामने अपने अस्तित्व को बचाने की लड़ाई है। परिसीमन के बाद यूपी से सांसदों की संख्या बढ़ जाएगी। कांग्रेस नेता इमरान मसूद के हमलों से सपा असहज हो रही है। एनडीए के फ्लोर लीडर वोटिंग के दौरान सपा से वोटिंग से दूर रहने की अपील कर सकते हैं, यानी समर्थन के बिना भी रास्ता निकल सकता है।
YSRCP भी अपनी स्थिति पर फिर से विचार कर रही है। जगन मोहन रेड्डी ने हाल में स्वीकार किया कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून का समर्थन करने का उनकी पार्टी का फैसला गलत था।
30 अक्टूबर से 4 नवंबर तय करेगा सब कुछ
कई तरह के समीकरण बन और बिगड़ रहे हैं। NDA के रणनीतिकारों के लिए अगला हफ्ता बहुत अहम है। अगर 30 अक्टूबर से 4 नवंबर के बीच का समय निकल गया तो सरकार के परिसीमन एजेंडे के लिए चुनौतियां कई गुना बढ़ जाएंगी।
भारत की संसदीय परंपरा में ऐसे बड़े फैसले आम सहमति से ही टिकते हैं। अशोक के समय की धर्म सभाएं भी विरोधियों को साथ बैठाकर चलती थीं। दलों के गणित से ज्यादा यह बात महत्वपूर्ण है कि परिसीमन देश की जनतांत्रिक संरचना को बल देने वाला कदम बने, विवाद का विषय नहीं।
संबंधित प्रश्न
परिसीमन बिल के लिए कितने वोट चाहिए?
लोकसभा में कुल 540 सांसदों की मौजूदगी में संविधान संशोधन के लिए 360 वोट चाहिए। राज्यसभा में 244 में से 164 वोट की जरूरत होगी।
NDA के पास अभी कितने सांसदों का समर्थन है?
लोकसभा में NDA के पास 320 सांसदों का समर्थन है, जो बागी और अन्य समर्थकों को जोड़ने पर 324 तक पहुंच सकता है। राज्यसभा में 158 सांसदों का समर्थन मिलता दिख रहा है।
क्या DMK परिसीमन बिल का समर्थन करेगी?
डीएमके ने साफ कहा है कि बिल का मसौदा देखे बिना न कोई वादा करेगी और न कोई टिप्पणी। पार्टी तमिलनाडु विधानसभा में परिसीमन विरोधी प्रस्ताव का समर्थन कर चुकी है।
