मध्यप्रदेश: वन संरक्षण की नई दिशा, बनेगी टास्क फोर्स
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 18 जून को समत्व भवन में वन विभाग की समीक्षा के बाद वन संरक्षण को एक नई दिशा दी है। राज्य स्तरीय टास्क फोर्स के गठन, मानव-वन्यजीव संघर्ष को आपदा घोषित करने और वन्य पर्यटन को बढ़ावा देने जैसे अहम फैसले लिए गए हैं। इसके साथ ही राजस्थान से सोन चिड़िया लाने और आदिवासी देवस्थानों के संवर्धन पर भी जोर दिया गया है। यह पहल प्रकृति के साथ सहअस्तित्व की भारतीय सभ्यता की प्राचीन चेतना को आधुनिक प्रशासन के माध्यम से साकार करती है।
वन संपदा का संरक्षण क्यों है आवश्यक?
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि मध्यप्रदेश की असली पहचान उसकी समृद्ध वन संपदा, प्राकृतिक धरोहर और जैव विविधता है। जैविक और वानस्पतिक विविधताओं की रक्षा केवल पर्यावरण की मांग नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा नैतिक कर्तव्य है। प्राचीन भारतीय परंपराओं में वृक्षों और नदियों को देवता सम्मान दिया गया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वन क्षेत्रों के विस्तार, बड़े पैमाने पर पौधरोपण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को प्राथमिकता दी जाए। स्थानीय समुदायों की सहभागिता के बिना यह लक्ष्य पूरा नहीं हो सकता, इसलिए उन्हें भी इस यात्रा में साथ लिया जाएगा।
वन्य पर्यटन और स्थानीय समुदायों की सहभागिता कैसे बढ़ेगी?
मध्यप्रदेश में वन्य पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। डॉ. यादव ने पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया है। होम-स्टे जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि स्थानीय लोगों को आर्थिक लाभ मिल सके। सफारी वाहनों की संख्या बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है। बेहतर सुविधाओं से अधिक पर्यटक प्रदेश के जंगलों और अभ्यारण्यों की ओर आकर्षित होंगे, जिससे वन संरक्षण के लिए आवश्यक संसाधन भी जुटेंगे।
मानव-वन्यजीव संघर्ष को आपदा क्यों घोषित करने की तैयारी चल रही है?
मानव और वन्य जीवों के बीच बढ़ते संघर्ष ने दोनों पक्षों के लिए जीवन को कठिन बना दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस समस्या को राज्य आपदा की श्रेणी में शामिल करने के प्रयास किए जाएंगे। ऐसा होने पर प्रशासन, पुलिस, वन विभाग और आपदा प्रबंधन बल मिलकर इन मामलों का अधिक प्रभावी ढंग से समाधान कर सकेंगे। यह कदम शांति और सद्भाव की स्थापना का एक व्यावहारिक मार्ग है, जो मानव और प्रकृति दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
राज्य स्तरीय टास्क फोर्स और कमांड कंट्रोल रूम क्या करेगा?
वन अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए मुख्यमंत्री ने राज्य टाइगर स्ट्राइक फोर्स की तर्ज पर 'राज्य स्तरीय टास्क फोर्स' गठित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके अलावा वन एवं वन्यजीव सुरक्षा को मजबूत करने के लिए वन मुख्यालय स्तर पर 'कमांड एवं कंट्रोल रूम' स्थापित करने का भी प्रस्ताव स्वीकृत हुआ है। ये कदम अपराधियों पर अंकुश लगाने और न्याय व्यवस्था को मजबूत करने में सहायक होंगे।
चीता और बाघ संरक्षण में मध्यप्रदेश की अग्रणी भूमिका
मध्यप्रदेश बाघ, चीता, तेंदुआ, भेड़िया, घड़ियाल और गिद्धों के संरक्षण में देश में अग्रणी बना हुआ है। प्रमुख सचिव वन संदीप यादव ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में कुल 52 चीते हैं, जिनमें से 32 का जन्म कूनो राष्ट्रीय उद्यान में हुआ है। राजस्थान से प्राप्त होने वाली सोन चिड़ियों को घाटीगांव और गांधीसागर के जंगलों में छोड़ा जाएगा। जुलाई 2026 में गांधीसागर अभ्यारण्य में एक नर और एक मादा चीते को छोड़ने की तैयारी है। सागर जिले के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को चीतों के तीसरे बड़े आवास के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा आंध्रप्रदेश सरकार के अनुरोध पर बाघ और गौर दिए जाएंगे और बदले में वाइल्ड डॉग्स या अन्य वन्य जीव प्राप्त किए जाएंगे।
आदिवासी धरोहर और पर्यावरण संतुलन
जंगल क्षेत्रों में स्थित जनजातीय समुदायों के देवस्थान उनकी आस्था और सांस्कृतिक पहचान के केंद्र हैं। मुख्यमंत्री ने इन देवस्थानों को उनकी परंपराओं और रीति-रिवाजों के अनुरूप विकसित करने पर जोर दिया है। इस वर्ष 300 देवस्थानों का विकास किया जाएगा, जबकि 1421 देवस्थलों का काम पहले ही पूरा हो चुका है। प्रकृति के साथ आदिवासी समुदायों के गहरे रिश्ते को सम्मान देना हमारी सभ्यता की सबसे बड़ी ताकत है।
हाथियों की निगरानी और संसाधनों का विस्तार
जंगली हाथियों के बेहतर प्रबंधन के लिए वन विभाग की टीम ने पश्चिम बंगाल का दौरा किया है। केंद्र सरकार ने प्रदेश की सीमा में मौजूद छह हाथियों को रेडियो कॉलर लगाने की अनुमति दे दी है। हाथियों के संरक्षण और देखभाल के लिए सहायक महावतों के पदों की संख्या बढ़ाई जाएगी। वन एवं राजस्व भूमि से जुड़े सीमा विवादों के त्वरित समाधान के लिए वन व्यवस्थापन अधिकारी के पद को अधिक अधिकार देने की प्रक्रिया भी शुरू होगी।
साल बोरर बीमारी से निपटने की तैयारी
अनूपपुर और डिंडौरी जिलों के जंगलों में साल बोरर नामक बीमारी का प्रकोप देखा गया है। यह समस्या लगभग 30 वर्षों में एक बार सामने आती है, पहले 1997 में यह दर्ज हुई थी। बीमारी से प्रभावित वृक्षों के प्रबंधन और नियंत्रण के लिए अतिरिक्त बजट उपलब्ध कराया जाएगा।
तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए बड़ी राहत
वन विभाग के अनुसार वर्ष 2026 में प्रदेश में कुल 17.76 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहित किया गया है। इसके बदले तेंदूपत्ता संग्राहकों को 710.71 करोड़ रुपये की बोनस राशि वितरित की जाएगी। इसके अलावा प्रदेश के लगभग 700 वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में परिवर्तित करने की दिशा में कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह कदम जनता के कल्याण और न्याय की दिशा में एक सकारात्मक पहल है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष को आपदा घोषित करने का क्या लाभ होगा?
इसे आपदा घोषित करने से प्रशासन, पुलिस, वन विभाग और आपदा प्रबंधन बल मिलकर तेजी से कार्रवाई कर सकेंगे। इससे मानव और वन्यजीवों दोनों की सुरक्षा में तेजी आएगी और नुकसान को कम किया जा सकेगा।
मध्यप्रदेश में वर्तमान में कुल कितने चीते मौजूद हैं?
मध्यप्रदेश में वर्तमान में कुल 52 चीते हैं। इनमें से 32 चीतों का जन्म कूनो राष्ट्रीय उद्यान में हुआ है।
साल बोरर बीमारी क्या है और यह कहां फैली है?
साल बोरर एक वृक्ष बीमारी है जो लगभग 30 वर्षों में एक बार प्रकोप करती है। यह वर्तमान में मध्यप्रदेश के अनूपपुर और डिंडौरी जिलों के जंगलों में फैली है।
आंध्रप्रदेश को मध्यप्रदेश से कौन से जानवर दिए जाएंगे?
आंध्रप्रदेश सरकार के अनुरोध पर मध्यप्रदेश से बाघ और गौर उपलब्ध कराए जाएंगे। बदले में मध्यप्रदेश को आंध्रप्रदेश से वाइल्ड डॉग्स या अन्य वन्य जीव प्राप्त होंगे।