सूर्य ग्रहण में मूर्ति स्पर्श क्यों वर्जित है? जानिए सूतक काल और ऊर्जा का रहस्य
सूर्य ग्रहण के दौरान देवी-देवताओं की मूर्तियों को छूने की मनाही का रहस्य केवल धार्मिक नियमों में नहीं, बल्कि प्राचीन ऊर्जा विज्ञान में भी छिपा है। वैदिक परंपरा के अनुसार, इस दौरान नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है और सूर्य की किरणें पृथ्वी तक सीधे नहीं पहुंच पातीं। आइए, इस रहस्य को समझते हैं।
सूर्य ग्रहण 2026: तिथि और समय
वैदिक पंचांग के अनुसार, 12 अगस्त 2026 को हरियाली अमावस्या के दिन सूर्य ग्रहण लगेगा। भारतीय समयानुसार, यह ग्रहण रात 9:04 बजे शुरू होकर 13 अगस्त की सुबह 4:25 बजे तक रहेगा। हालांकि, यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा।
ग्रहण में मूर्ति स्पर्श क्यों वर्जित है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, सूर्य ग्रहण के समय पृथ्वी पर नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। मंदिरों में स्थापित मूर्तियों में दिव्य ऊर्जा का वास होता है। इसलिए, ग्रहण के दौरान इन मूर्तियों को छूने से उनकी पवित्रता और ऊर्जा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। यही कारण है कि सूतक काल में मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और पूजा-पाठ वर्जित होता है।
सूतक काल के नियम और उपाय
ग्रहण शुरू होने से 12 घंटे पहले सूतक काल लगता है। इस दौरान भोजन करना, पूजा-पाठ करना और देवी-देवताओं की मूर्तियों को छूना वर्जित है। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करें, घर और मंदिर की साफ-सफाई करें, और गंगाजल का छिड़काव कर शुद्ध करें। इसके बाद विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करें और अन्न-धन का दान करें।
ग्रहण का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण
प्राचीन भारतीय ऋषियों ने ग्रहण के समय नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव को पहचाना था। यह केवल अंधविश्वास नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक समझ है कि सूर्य की किरणों के अवरोध से वातावरण में ऊर्जा का संतुलन बदल जाता है। इसलिए, इन नियमों का पालन करना हमारी आध्यात्मिक और शारीरिक सेहत के लिए लाभदायक है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या सूर्य ग्रहण के दौरान भोजन करना चाहिए?
नहीं, सूतक काल में भोजन करना वर्जित है। ऐसा माना जाता है कि इस दौरान भोजन में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव पड़ता है।
ग्रहण के बाद मंदिर कैसे शुद्ध करें?
ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करें, फिर घर और मंदिर की साफ-सफाई करें। गंगाजल का छिड़काव करें और विधिपूर्वक पूजा करें।
क्या भारत में यह ग्रहण दिखाई देगा?
नहीं, यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा।
यह लेख सामान्य जानकारी और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। पाठक अपने विवेक का उपयोग करें। अंधविश्वास से बचें और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाएं।
चित्र स्रोत: दैनिक जागरण (Dainik Jagran)