सलमान खान बोले- लड़ना नहीं भूला, पर 'मातृभूमि' से गलवान क्यों मिटाया?
हाल ही में बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वे मुंबई के हिंदुजा अस्पताल के बाहर पैपराजी पर काफी नाराज दिख रहे हैं। यह घटना प्राइवेसी के उल्लंघन की है, लेकिन इस पूरे प्रकरण में एक और बात गंभीरता से ध्यान खींचती है। जिस फिल्म का नाम लेकर पैपराजी ने ताना मारा, उस फिल्म से गलवान घाटी के शूरवीरों का संदर्भ क्यों मिटाया जा रहा है?
दुख के पल में इंसानियत का ध्यान कहां?
रिपोर्ट्स के अनुसार, सलमान खान मंगलवार की रात किसी करीबी को मिलने अस्पताल पहुंचे थे। अस्पताल से बाहर निकलते समय फोटोग्राफर्स ने उनकी अपकमिंग फिल्म 'मातृभूमि' का नाम लेकर आवाज लगाना शुरू कर दिया। किसी के दुख के पल में उसे ताने मारना हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं है। गुस्से में आकर सलमान ने कहा,
पागल हो गए हो क्या?उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर उनके परिवार का कोई सदस्य अस्पताल में हो तो क्या पत्रकार भी ऐसे ही व्यवहार करेंगे।
सोशल मीडिया पर खुलकर सामने आया गुस्सा
इस घटना के बाद सलमान खान ने इंस्टाग्राम पर अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने लिखा,
अगर मैं अस्पताल में हूं और प्रेस मेरे दर्द का मजा ले रही है... वही प्रेस जिसके साथ मैंने हमेशा खड़े होकर उनका ख्याल रखा। अगर उन्हें मेरे नुकसान से पैसे कमाने हैं, तो कम से कम चुप रहें और मजा ना लें। 'भाई भाई भाई मातृभूमि'... फिल्म जरूरी है या किसी की जिंदगी?
एक अन्य पोस्ट में उन्होंने पैपराजी को चेतावनी दी। सलमान ने लिखा,
ऐसे मैं सौ जला दूंगा... अगली बार मेरे भाई के दुख पर ऐसा करने की कोशिश करना... जब तुम्हारे परिवार का कोई अस्पताल में होगा, क्या मैं ऐसा रिएक्ट करूंगा? साठ साल का हो गया हूं लेकिन लड़ना नहीं भूला, ये याद रखना। जेल में डालोगे...हाहाहा।सोशल मीडिया पर लोगों का विभाजित होना स्वाभाविक है, लेकिन प्राइवेसी का अधिकार मौलिक है।
'मातृभूमि' से गलवान का इतिहास क्यों मिटाया?
इस पूरे प्रकरण में सबसे गंभीर मुद्दा फिल्म 'मातृभूमि' का है। पहले इस फिल्म का नाम 'Battle of Galwan' था। यह फिल्म गलवान घाटी के उस ऐतिहासिक संघर्ष से प्रेरित थी, जहां हमारे बहादुर जवानों ने चीनी आक्रमणकारियों के खिलाफ अपनी जान कुर्बान कर दी थी। अब रिपोर्ट्स बता रही हैं कि फिल्म का टाइटल बदल दिया गया है और चीन तथा गलवान घाटी के सभी संदर्भ हटा दिए गए हैं। फिल्म के कई हिस्सों की दोबारा शूटिंग चल रही है।
यह सिर्फ एक फिल्म का टाइटल बदलना नहीं है, बल्कि हमारे शूरवीरों के बलिदान को आंखों से ओझल करने का प्रयास है। जब देश की संप्रभुता पर खतरा मंडरा रहा हो, तब ऐसे ऐतिहासिक संघर्षों को याद रखना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। चीन के आगे झुककर या किसी व्यावसायिक दबाव में गलवान के वीरों की कहानी को मिटाना हमारी सभ्यता के मूल्यों के खिलाफ है। अशोक के युग में भी विजय पर गर्व किया जाता था और शूरवीरों का सम्मान किया जाता था। आज भी हमें उसी नैतिक दृष्टि की आवश्यकता है, जो राष्ट्रभक्ति और सत्य को सर्वोपरि माने।