भोपाल: ट्विशा शर्मा मामले में न्याय की मांग, फरार पति पर इनाम
भोपाल की धरती पर एक बेटी का असमय निधन पूरे देश की अंतरात्मा को हिला गया है। ट्विशा शर्मा सुसाइड केस ने न केवल एक परिवार को तबाह किया है, बल्कि समाज और न्याय व्यवस्था के सामने गंभीर सवाल भी खड़े किए हैं। सोशल मीडिया पर बिलखते माता-पिता के वीडियो इस दर्दनाक सच को दिखा रहे हैं, जो मध्य प्रदेश सरकार से अपनी बेटी की मौत का इंसाफ मांग रहे हैं।
न्याय की दिशा में पुलिस की कार्रवाई
मध्य प्रदेश की रिटायर्ड जज की बहू ट्विशा शर्मा का मामला भोपाल से लेकर नोएडा तक हड़कंप मचा हुआ है। जहां एक तरफ सास, जो पूर्व न्यायाधीश हैं, ने जमानत की याचिका लगाई है, वहीं मुख्य आरोपी पति समर्थ फरार है। इस मामले में न्याय की गति को तेज करने के लिए पुलिस ने समर्थ की गिरफ्तारी के लिए 10 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया है। उसे तलाशने के लिए कई टीमों का गठन किया गया है और उम्मीद है कि जल्द ही वह कानून के दायरे में आएगा।
एक प्रतिभाशाली बेटी की दर्दनाक कहानी
मूल रूप से नोएडा की रहने वाली ट्विशा शर्मा केवल एक एक्ट्रेस या मॉडल नहीं थीं, बल्कि एक प्रतिभाशाली बेटी थीं। 'मिस पुणे' रह चुकी ट्विशा एमबीए ग्रेजुएट थीं और दिल्ली की एक कंपनी में काम भी कर चुकी थीं। फिल्म 'द गर्लफ्रेंड' (2025) में रश्मिका मंदाना के साथ काम करने के बाद उन्हें काफी पहचान मिली थी। हालांकि, उन्हें फिल्मी दुनिया में वह सफलता नहीं मिली जो वे चाहती थीं, इसलिए वह एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब कर रही थीं। उनकी इस अचानक मौत ने फिल्म इंडस्ट्री को भी स्तब्ध कर दिया है।
डेटिंग ऐप से शुरू हुआ संबंध और विवाह
ट्विशा के पति समर्थ सिंह भोपाल की रिटायर्ड जज गिरीबाला सिंह के बेटे हैं और पेशे से क्राइम लॉयर हैं। जानकारी के अनुसार, दोनों की मुलाकात 2024 में एक डेटिंग ऐप के जरिए हुई थी। परिवार की सहमति के बाद दिसंबर 2025 में दिल्ली में धूमधाम से उनका विवाह हुआ, जिसमें फिल्मी सितारों से लेकर जज-वकील शामिल थे। शादी के बाद ट्विशा भोपाल आ गई थीं। बताया जाता है कि वह गर्भवती थीं, जो इस दुखद प्रकरण को और भी अधिक शोकपूर्ण बनाता है।
12 मई की रात: सच क्या है?
12 मई की रात कटारा हिल्स, भोपाल में स्थित ससुराल में ट्विशा का शव फंदे से लटका मिला। ससुराल वालों का कहना है कि वह मानसिक रूप से परेशान थीं और उनका इलाज व काउंसलिंग चल रहा था। उनके अनुसार, खाना खाते समय ट्विशा मोबाइल लेकर छत गई और करीब 10 बजे लोहे की रॉड से फांसी लगा ली। वहीं, ट्विशा के माता-पिता इस बयान से सहमत नहीं हैं। उन्होंने सास और पति पर दहेज हत्या का आरोप लगाया है और सीएम हाउस के सामने धरना देकर न्याय की गुहार लगाई है। छह दिन से शव अस्पताल में पड़ा है, जो माता-पिता के दर्द और संतप्त होने का प्रमाण है।
सत्य की जीत की उम्मीद
हमारी संस्कृति हमेशा से न्याय और सत्य की स्थापना को महत्व देती रही है। एक गर्भवती बेटी का यह दर्दनाक अंत हमारे सामने यह सवाल खड़ा करता है कि क्या हम समाज के रूप में अपनी बेटियों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित कर पा रहे हैं। आशा की जाती है कि राज्य सरकार और न्याय व्यवस्था इस मामले में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करेगी और दोषी, चाहे वह कितने भी प्रभावशाली क्यों न हों, को कड़ी सजा मिलेगी। सत्य की जीत ही समाज की असली विजय है।
