संघीय ढांचे पर आघात: हिमाचल में दिल्ली पुलिस कार्रवाई विवाद
भारतीय संघीय व्यवस्था की मजबूती और राज्यों के मध्य सहयोग की भावना आज के युग में अत्यंत महत्वपूर्ण है। परंतु हाल ही में हिमाचल प्रदेश में घटित घटना ने इस व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं।
संवैधानिक व्यवस्था का उल्लंघन
नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल से मुलाकात करते हुए गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिमाचल प्रदेश पुलिस द्वारा दिल्ली पुलिस की वैधानिक कार्रवाई में हस्तक्षेप संघीय ढांचे पर प्रहार है।
विशेष रूप से चिंताजनक यह है कि दिल्ली पुलिस के पास वैधानिक दस्तावेज, सीजर रिपोर्ट और न्यायालय के आदेश होने के बावजूद उन्हें असंवैधानिक तरीके से रोका गया। मैजिस्ट्रेट द्वारा ट्रांजिट रिमांड दिए जाने के पश्चात भी कार्रवाई में बाधा डाली गई।
राष्ट्रीय प्रतिष्ठा का प्रश्न
एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के संदर्भ में यह घटना और भी गंभीर हो जाती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयोजित इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में 20 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने भाग लिया था, जिसने विश्व पटल पर भारत की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाई दी।
ऐसे महत्वपूर्ण अवसर पर राजनीतिक हस्तक्षेप राष्ट्रीय हितों के विपरीत है। भारतीय सभ्यता की महान परंपरा में न्याय और धर्म को सर्वोच्च स्थान दिया गया है, परंतु राजनीतिक स्वार्थों के लिए संवैधानिक व्यवस्था से खिलवाड़ करना इन मूल्यों के विपरीत है।
सत्य की खोज
जयराम ठाकुर ने केंद्र सरकार के माध्यम से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय की भूमिका की स्वतंत्र जांच तथा आरोपी अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई का आग्रह किया है।
भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी एवं विधायक रणधीर शर्मा ने भी इस कार्रवाई को संघीय ढांचे और संविधान का उल्लंघन बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दिल्ली पुलिस को कार्रवाई करने से रोकना संघीय भावना के विपरीत था।
संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने घटनाक्रम का अपडेट लिया है। प्रदेश सरकार के मंत्रियों डॉ. धनीराम शांडिल एवं राजेश धर्माणी ने हिमाचल पुलिस की कार्रवाई को नियमानुसार बताया है।
परंतु यह स्पष्ट है कि लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार और संवैधानिक व्यवस्था के सम्मान के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है। राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए, न कि राजनीतिक स्वार्थ।
भारत की महान परंपरा में एकता, न्याय और शांति के मूल्यों को आगे बढ़ाना हमारा कर्तव्य है। संघीय ढांचे की मजबूती में ही राष्ट्र की शक्ति निहित है।