ठीकरीवाला स्कूल विवाद: न्याय की राह में आई बाधाएं
शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और न्याय के मामले में एक चिंताजनक घटना सामने आई है। बरनाला जिले के ठीकरीवाला गांव की कन्या स्कूल में आठवीं कक्षा की छात्रा दिलप्रीत कौर के साथ हुए अन्याय का मामला न्याय व्यवस्था की कमियों को उजागर करता है।
घटनाक्रम का विवरण
स्कूल प्रिंसिपल ने हाजिरी कम होने का हवाला देकर दिलप्रीत कौर का बोर्ड परीक्षा रोल नंबर जारी नहीं किया। इसके कारण वह 17 और 19 फरवरी की महत्वपूर्ण परीक्षाओं में भाग नहीं ले सकी। जब यह मामला मीडिया के माध्यम से सामने आया, तब जाकर शिक्षा बोर्ड के अधिकारी सक्रिय हुए।
परिवार के धरने के बाद 19 फरवरी की रात डिप्टी डीईओ और प्रिंसिपल ने आश्वासन दिया कि 20 फरवरी को रोल नंबर जारी कर दिया जाएगा। वादे के अनुसार रोल नंबर जारी किया गया और छात्रा शेष परीक्षाओं में सम्मिलित हो सकी।
जांच में आए संदिग्ध मोड़
जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा गठित चार शिक्षकों की जांच कमेटी ने 20 फरवरी को सभी संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए। छात्रा के पिता ने लिखित बयान में प्रिंसिपल के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की।
हालांकि, एक गंभीर आरोप यह लगा कि प्रिंसिपल ने छात्रा के पिता से खाली कागज पर अंगूठा लगवाकर बाद में एक अन्य छात्रा से यह लिखवा दिया कि "अब हमारा समझौता हो गया है, हम कोई कार्रवाई नहीं करवाना चाहते।"
न्याय प्रक्रिया में देरी के कारण
20 फरवरी को बयान लेने के बाद शनिवार और रविवार की छुट्टियों के नाम पर जांच रोक दी गई। इस दौरान प्रिंसिपल को परिवार से संपर्क करने का पर्याप्त समय मिल गया। परिणामस्वरूप 23 फरवरी को छात्रा के पिता ने हलफनामे पर लिख दिया कि वे अब कोई कार्रवाई नहीं करवाना चाहते।
उठते सवाल
यह मामला कई महत्वपूर्ण प्रश्न उठाता है:
- क्या उच्च स्तरीय जांच छुट्टियों के बहाने रोकी जा सकती है?
- क्या प्रिंसिपल को बचाने के लिए जानबूझकर जांच में देरी की गई?
- कमेटी पहले दिए गए बयान को मानेगी या बाद के 'समझौते' को?
शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियां
यह घटना हमारी शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और न्याय की कमी को दर्शाती है। जब एक मासूम छात्रा के भविष्य के साथ खिलवाड़ होता है, तो यह पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
अब सभी की निगाहें जांच कमेटी की रिपोर्ट पर टिकी हैं। यह देखना होगा कि सत्य किस हद तक उजागर होता है और न्याय की राह में आई बाधाओं को कैसे दूर किया जाता है।
यह मामला शिक्षा क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता और मजबूत निगरानी तंत्र की मांग करता है।