ईरान की परमाणु चुनौती: नई सैटेलाइट तस्वीरें और वैश्विक चिंताएं
विश्व शांति के लिए एक नई चुनौती के रूप में ईरान की परमाणु गतिविधियां एक बार फिर चर्चा में हैं। हालिया सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि तेहरान ने अपने दो प्रमुख परमाणु केंद्रों इस्फहान और नतांज में क्षतिग्रस्त ढांचों के ऊपर नई छतें और कवर का निर्माण किया है।
छुपी हुई गतिविधियों की चिंता
प्लैनेट लैब्स पीबीसी की ओर से जारी हालिया सैटेलाइट तस्वीरों के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह चिंता सता रही है कि ईरान शायद हमलों के बाद बचे हुए परमाणु संसाधनों को छिपाने या पुनर्स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। यह स्थिति विश्व शांति के लिए एक गंभीर चुनौती प्रस्तुत करती है।
जून में इजरायल-ईरान संघर्ष के बाद से यह पहला बड़ा निर्माण कार्य है, जो किसी भी बमबारी-प्रभावित परमाणु स्थल पर देखा गया है। नई छतों के कारण सैटेलाइट्स के लिए जमीन पर हो रही गतिविधियों को देख पाना कठिन हो रहा है।
अंतरराष्ट्रीय निगरानी की समस्या
यह स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि ईरान ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को देश में प्रवेश की अनुमति नहीं दी है। ऐसे में रिमोट मॉनिटरिंग ही निगरानी का एकमात्र साधन बचा है, जो अब भी सीमित हो गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन छतों का उद्देश्य किसी नए परमाणु निर्माण से अधिक, मलबे के नीचे दबे संवेदनशील उपकरणों और यूरेनियम के भंडार को विश्व की नजरों से छिपाकर निकालना हो सकता है।
नतांज और इस्फहान की स्थिति
ईरान की राजधानी तेहरान से लगभग 220 किलोमीटर दूर स्थित नतांज ईरान का सबसे प्रमुख यूरेनियम संवर्धन केंद्र रहा है। जून में इजरायल ने यहां की जमीन के ऊपर स्थित मुख्य संवर्धन इकाई को नष्ट कर दिया था। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि दिसंबर में नतांज में नई छत का निर्माण शुरू हुआ और महीने के अंत तक पूरा हो गया।
इस्फहान में भी जनवरी की शुरुआत में इसी तरह की छत बनाई गई है। यहां सेंट्रीफ्यूज निर्माण से जुड़ी इकाइयों पर हमले किए गए थे। इसके अलावा कुछ सुरंगों को मिट्टी से भरते और एक सुरंग को दोबारा मजबूत करते हुए भी देखा गया है।
नई भूमिगत सुविधाओं का संकेत
तस्वीरों में नतांज के पास पिकैक्स माउंटेन नामक स्थान पर लगातार खुदाई दिख रही है, जहां विश्लेषकों का मानना है कि ईरान एक नई भूमिगत परमाणु सुविधा का निर्माण कर रहा हो सकता है।
सैटेलाइट तस्वीरें यह भी दिखाती हैं कि ईरान अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम से जुड़े ठिकानों पर भी दोबारा काम शुरू कर चुका है। तेहरान के पास स्थित पारचिन सैन्य परिसर में 'तालेघान-2' नामक स्थान को फिर से विकसित किया जा रहा है।
अमेरिकी चेतावनी और कूटनीतिक प्रयास
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से अपने परमाणु कार्यक्रम पर एक समझौते के लिए बातचीत की मांग की है। इस बीच अमेरिका ने विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन और कई गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर को मध्य पूर्व में भेज दिया है।
यह स्थिति विश्व शांति के लिए एक गंभीर चुनौती है। भारत जैसे शांतिप्रिय राष्ट्रों के लिए यह आवश्यक है कि वे कूटनीतिक समाधान के माध्यम से इस संकट का निवारण खोजें। अहिंसा और शांति के मार्ग पर चलते हुए, अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मिलकर इस चुनौती का सामना करना होगा।