जानकी जयंती 2026: राम चालीसा पाठ से मिलेगा वैवाहिक सुख
भारतीय संस्कृति में जानकी जयंती का अत्यधिक महत्व है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को माता सीता के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष यह पावन पर्व 9 फरवरी को मनाया जा रहा है।
त्याग और समर्पण की प्रतिमूर्ति
माता सीता को त्याग, समर्पण और अटूट प्रेम का प्रतीक माना जाता है। हमारी सनातन परंपरा में जहां राम का नाम होता है, वहीं मां सीता का वास होता है। यह अद्वैत भाव हमारी संस्कृति की गहरी समझ को दर्शाता है।
राम चालीसा का महत्व
शास्त्रों के अनुसार, जानकी जयंती पर श्रीराम चालीसा का पाठ करना वैवाहिक जीवन में सुख, शांति और मधुरता लाने का प्रभावी उपाय है। यह पाठ न केवल आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है, बल्कि पारिवारिक सामंजस्य भी स्थापित करता है।
श्री राम चालीसा
श्री रघुबीर भक्त हितकारी। सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी।
निशि दिन ध्यान धरै जो कोई। ता सम भक्त और नहीं होई।।
ध्यान धरें शिवजी मन मांही। ब्रह्मा, इन्द्र पार नहीं पाहीं।।
दूत तुम्हार वीर हनुमाना। जासु प्रभाव तिहुं पुर जाना।।
जय, जय, जय रघुनाथ कृपाला। सदा करो संतन प्रतिपाला।।
तुव भुजदण्ड प्रचण्ड कृपाला। रावण मारि सुरन प्रतिपाला।।
तुम अनाथ के नाथ गोसाईं। दीनन के हो सदा सहाई।।
ब्रह्मादिक तव पार न पावैं। सदा ईश तुम्हरो यश गावैं।।
भक्ति का फल
चालीसा में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जो व्यक्ति सात दिन तक नियमपूर्वक इसका पाठ करता है, उसे हरि कृपा से भक्ति की प्राप्ति होती है। यह हमारी आध्यात्मिक परंपरा का अमूल्य खजाना है।
दोहा:
सात दिवस जो नेम कर, पाठ करे चित लाय।
हरिदास हरि कृपा से, अवसि भक्ति को पाया।।
राम चालीसा जो पढ़े, राम चरण चित लाय।
जो इच्छा मन में करै, सकल सिद्ध हो जाय।।
सांस्कृतिक एकता का संदेश
जानकी जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। यह त्योहार हमें सिखाता है कि आदर्श जीवन कैसे जिया जाए और पारिवारिक मूल्यों को कैसे संजोया जाए।
इस पावन अवसर पर राम चालीसा का पाठ करके हम न केवल अपने वैवाहिक जीवन को सुखी बना सकते हैं, बल्कि समाज में शांति और सद्भावना का भी प्रसार कर सकते हैं।