बेंगलुरु, 16 अक्टूबर 2026. केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने गुरुवार को बेंगलुरु में परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के साथ चर्चा के दौरान सरकारी नौकरियों की सेवा अवधि घटाकर 10, 15 या 20 साल करने का विचार रखा. उन्होंने कहा कि इससे हर परिवार में कम से कम एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी देने का लक्ष्य पूरा हो सकता है.
इस बैठक की खबर सबसे पहले India TV Hindi ने दी. कुमारस्वामी ने यह प्रस्ताव KPSC यानी कर्नाटक लोक सेवा आयोग में सुधार को लेकर अभ्यर्थियों से खुली चर्चा के दौरान रखा और साफ किया कि यह फिलहाल केवल एक सुझाव है, कोई घोषित नीति नहीं.
क्या है कुमारस्वामी का पूरा प्लान?
कुमारस्वामी ने समझाया कि आमतौर पर सरकारी कर्मचारी लगभग 35 साल तक नौकरी करते हैं. अगर यह अवधि घटाकर 10, 15 या 20 साल कर दी जाए और लक्ष्य रखा जाए कि हर परिवार को कम से कम एक सरकारी नौकरी मिले, तो बेरोजगारी से जूझ रहे लाखों युवाओं को अवसर मिल सकते हैं.
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित मॉडल में तय सेवा अवधि पूरी करने वाले कर्मचारियों को पेंशन और सेवानिवृत्ति से जुड़े अन्य लाभ देने का प्रावधान भी शामिल हो सकता है. उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था योग्य उम्मीदवारों को पर्याप्त अवसर देने में नाकाम हो रही है.
डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के अनुसार, यह 2028 के चुनाव से पहले कुमारस्वामी का पहला बड़ा वादा है, जिसमें उन्होंने सरकारी कर्मचारियों को 15 साल में सेवानिवृति लेकर दूसरों के लिए रास्ता खोलने की बात कही है. डेक्कन हेराल्ड की खबर में इसे 2028 के चुनाव से पहले उनका पहला बड़ा वादा बताया गया है.
KPSC पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
चर्चा में कुमारस्वामी ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग पर तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि योग्य उम्मीदवारों का पारदर्शी चयन करने वाली यह संस्था भ्रष्टाचार का अड्डा बन गई है और पैसे लेकर नौकरियां देने के गंभीर मामले सामने आए हैं.
उन्होंने सहायक कार्यकारी अभियंताओं की भर्ती, पशुपालन विभाग की नियुक्तियों और कर्नाटक प्रशासनिक सेवा की भर्ती में कथित गड़बड़ियों का जिक्र किया. इन मामलों में पैसों के लेन-देन, पक्षपात और जाति के आधार पर फैसलों के आरोप लगाए.
अभ्यर्थियों ने बताई अपनी परेशानी
चर्चा के दौरान बेरोजगार अभ्यर्थियों ने प्रश्नपत्रों में गलतियों, OMR शीट से कथित छेड़छाड़ और भर्ती कार्यक्रम बार-बार बदलने जैसी शिकायतें रखीं. कई उम्मीदवारों ने कहा कि इन समस्याओं ने उनका भविष्य अनिश्चित कर दिया है.
उत्तर कर्नाटक के एक अभ्यर्थी ने कहा कि भर्ती के नोटिफिकेशन की तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलता. उत्तर कर्नाटक से बेंगलुरु आकर कठिन परिस्थितियों में महीनों तक पढ़ाई करनी पड़ती है और रहने का खर्च जुटाना भी मुश्किल होता है.
एक अन्य अभ्यर्थी ने कहा कि आयोग पात्रता की शर्तों और परीक्षा की तारीखों को लेकर बार-बार भ्रम पैदा करता है. परीक्षा की तैयारी के बीच वेबसाइट पर नए दस्तावेज अपलोड हो जाते हैं और मामला अदालत पहुंचने पर उम्मीदवारों की मेहनत अधर में लटक जाती है.
चन्नपटना के एक अभ्यर्थी ने कहा कि नोटिफिकेशन आना संघर्ष की सिर्फ शुरुआत है. परीक्षा पास करने के बाद भी यह पता नहीं होता कि नियुक्ति पत्र मिलेगा या नहीं.
उत्तर और दक्षिण कर्नाटक में भेदभाव नहीं होना चाहिए
यादगीर के एक छात्र ने विधानसभा में तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के कथित बयान पर आपत्ति जताई, जिसमें कहा गया था कि उत्तर कर्नाटक से बेंगलुरु आने वाले लोग वहीं बस जाते हैं.
छात्र ने कहा कि कर्नाटक एक राज्य है और कन्नड़ सबकी भाषा है. उत्तर और दक्षिण कर्नाटक के बीच कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए. बेंगलुरु सभी का शहर है. यह बात भारत की उस पुरानी साझेदारी की याद दिलाती है जो न्याय और समरसता पर टिकी है.
धारवाड़ के एक अभ्यर्थी ने KPSC में व्यापक सुधारों की मांग की. उन्होंने सुझाव दिया कि आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति ऐसी विशेषज्ञ समिति के जरिए होनी चाहिए जिसकी ईमानदारी पर कोई सवाल न उठे. दोषी पाए जाने वालों को जल्द हटाया जाए.
कुछ उम्मीदवारों ने यह भी सवाल उठाया कि अगर भर्ती की जिम्मेदारी कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण यानी KEA को सौंप दी जाए, लेकिन बुनियादी समस्याएं दूर न हों, तो इससे क्या फायदा. उन्होंने आयोग के सदस्यों, अधिकारियों और बिचौलियों के बीच कथित सांठगांठ के आरोप भी लगाए.
कुमारस्वामी ने युवाओं को क्या भरोसा दिलाया?
शिकायतें सुनने के बाद कुमारस्वामी ने कहा कि यह चर्चा सिर्फ शुरुआत होनी चाहिए. इस मुद्दे पर रुकना नहीं है, बल्कि आने वाले दिनों में एक बड़ा आंदोलन खड़ा करना होगा. उन्होंने अभ्यर्थियों को भरोसा दिलाया कि इस प्रयास में वे उनके साथ खड़े रहेंगे.
उन्होंने कहा कि मौका मिला तो वे इस योजना को लागू करने की संभावना तलाशेंगे और यह विचार जनता के सामने इसलिए रखा जा रहा है ताकि इस पर सार्वजनिक चर्चा हो सके. उन्होंने कहा कि बेरोजगारी खतरनाक स्तर पर बढ़ रही है और युवाओं को अपने भविष्य को लेकर डरने की जरूरत नहीं.
सवाल और जवाब
कुमारस्वामी ने सरकारी नौकरी की सेवा अवधि कितनी करने का सुझाव दिया?
कुमारस्वामी ने मौजूदा लगभग 35 साल की सेवा अवधि घटाकर 10, 15 या 20 साल करने पर विचार करने का सुझाव दिया ताकि ज्यादा लोगों को रोजगार मिल सके.
क्या यह योजना लागू हो चुकी है?
नहीं. कुमारस्वामी ने स्वयं साफ किया कि यह फिलहाल केवल चर्चा के लिए रखा गया विचार है और भविष्य में मौका मिलने पर इसे लागू करने की संभावना तलाशी जाएगी.
अभ्यर्थियों ने KPSC पर क्या आरोप लगाए?
अभ्यर्थियों ने प्रश्नपत्रों में गलतियों, OMR शीट से छेड़छाड़, भर्ती कार्यक्रम बार-बार बदलने और नियुक्तियों में पक्षपात के आरोप लगाए. कुमारस्वामी ने आयोग को भ्रष्टाचार का अड्डा बताया.
